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आखिर क्यों अरविन्द केजरीवाल को भ्रष्ट साबित करने पर तुली है भाजपा की केन्द्र सरकार?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 11, 2017
in ब्लॉग
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भ्रष्टाचार के खिलाफ उठे विशाल जनान्दोलन की लहर से निकली एक छोटी पार्टी ने जब दिल्ली की सत्ता पर काबिज होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान को और तेज कर दिया तभी उसी लहर पर सवार होकर केन्द्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी ने भ्रष्टाचार का तगमा अपने गले में लटकाये अंबानी और अदानी जैसे काॅरपोरेट घरानों की दलाली में उसके साथ पृथ्वी की परिक्रमा में जुट गया और विश्व भर में अपनी हंसी उड़वाई. ये दोनों ही घटनायें रामलीला मैदान के ही एक छोर से निकली थी. दिल्ली की सत्ता पर काबिज एक छोटी पार्टी जो अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आन्दोलन को गति प्रदान कर रही थी, वही बायप्रोडक्ट के तौर पर निकली नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार को कानूनीजामा पहनाने के लिए दिन-रात एक कर रही थी. भारतीय जनता पार्टी के इस ‘महान काम’ को विघ्नरहित पूरा करने में एक मात्र अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ही बाधा बन रही थी. यह बाधा तब बहुत बड़ी साबित हुई जब भारतीय जनता पार्टी के ‘आराघ्य-देव’ अंबानी के खिलाफ ही अरविन्द केजरीवाल ने थाना में एफ.आई.आर. दर्ज करवा दिया. यह घटना भारत के इतिहास में पहली बार घटी एक आश्चर्यजनक घटना थी. इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने मिलकर आम आदमी पार्टी के अल्पमत में बनी दिल्ली सरकार को ही गिरा दिया. फिर केन्द्र की भाजपा सरकार ने शुरू किया तोड़-जोड़ का वह ‘महान प्रयास’ जिसके माध्यम से उसने देश के कई राज्यों में विपक्ष की सरकार को गिरा कर अपनी सरकार बनाया.

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भारतीय जनता पार्टी के अथक प्रयास के बावजूद भी जब आम आदमी पार्टी को तोड़ पाने में कामयाबी हाथ नहीं लगी तब जाकर पूरे 9 महीने बाद दिल्ली में दुबारा चुनाव की घोषणा की गई. जिसमें आम आदमी पार्टी की जबर्दस्त जीत ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी की तेज धार अभी बिकने को तैयार नहीं है. इसके बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ अरविन्द केजरीवाल और भ्रष्टाचार के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी के बीच जबर्दस्त भिड़ंत हुई. भाजपा ने अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ अपने तमाम दलाल सी.बी.आई., ई.डी., आई.बी., दिल्ली पुलिस, एल.जी., यहां तक कि दिल्ली हाईकोर्ट के जजों को भी खरीद कर हमला बोल दिया और अरविन्द केजरीवाल को डराने के लिए उसके एक-एक कर 14 विधायकों को जेल के सलाखों में बंद करने का दुश्प्रयास किया. वहीं अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के पास बचे एक मात्र संस्था ए.सी.बी. के जरिये ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ दिया. अरविन्द केजरीवाल के ए.सी.बी. के इस जंग से घबराये भ्रष्टों की पार्टी बन चुकी भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली सरकार के इस संस्था – ए.सी.बी. – को ही पारा मिलिट्री फोर्स भेज कर अपने दलाल मीणा को इस संस्था के प्रमुख पद पर बैठा दिया. दिल्ली सरकार को अपंग बनाने की पूरी कोशिश में हाई कोर्ट के जज को खरीदकर यह फैसला भी करवा लिया कि ‘‘सत्ता संस्थान में एक चुनी हुई सरकार का कोई महत्व नहीं होता और वह गवर्नर के मातहत होता है.’’ विश्व के इतिहास में लोकतंत्र के नाम पर कोर्ट के इस्तेमाल और कोर्ट के इस बहसियाना फैसले ने जिस प्रकार लोकतंत्र को कलंकित किया, ऐसी दूसरी मिसाल अन्यत्र नहीं मिलती. इससे आगे बढ़कर केन्द्र की भाजपा सरकार ने चुनाव आयोग को ही डरा-धमकाकर या उसे अपना दलाल बना कर लोकतंत्र और चुनाव के नाम पर ई.वी0एम. द्वारा अश्लीलतम खेल का शुरूआत कर दिया है.

केन्द्र के भाजपा सरकार के तमाम उपक्रमों के बाद भी जब दिल्ली की आम आदमी पार्टी को झुकाने में भारतीय जनता पार्टी कामयाब नहीं हुई तब दिल्ली सरकार के सचिव राजेन्द्र कुमार को फर्जी केशों में फंसा कर इस बात के लिए मजबूर किया जाने लगा कि ‘‘ऐसा कोई बयान दो जिससे अरविन्द केजरीवाल को बदनाम किया जा सके अथवा उसे गिरफ्तार कर जेल के सलाखों के पीछे भेजा जा सके.’’ अर्थात्, केजरीवाल को खत्म किया जा सके. पर जब राजेन्द्र कुमार तैयार नहीं हुए तब उसी को जेल में बंद कर दिया गया. दूसरी तरफ केन्द्र की भाजपा सरकार ने देश के तमाम मीडिया संस्थानों को खरीद कर अपना गुलाम बना लिया और दिन-रात अपने गुणगान और केजरीवाल के आम आदमी पार्टी के खिलाफ दुश्प्रचार में लगा दिया. वहीं दूसरी तरफ अपेक्षाकृत स्वतंत्र सोशल मीडिया पर – एक रिपोर्ट के अनुसार – 80 हजार से ज्यादा अपने ट्रोल को बैठा कर उन तमाम लोगों को निशाने पर लेकर गाली-गलौज देने की मुहिम को तेज कर दिया जो सच्चे और ईमानदार लोग भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बोलते या लिखते थे.

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आखिर अरविन्द केजरीवाल ही क्यों?

पर इन तमाम प्रयासों से भी भारतीय जनता पार्टी के द्वारा भ्रष्टाचार को निर्विघ्न जारी रखने में आम आदमी पार्टी के प्रतिरोध को रोक पाने में जब कामयाबी नहीं मिली तब उसका नया पैंतरा चुनाव आयोग के माध्यम से खेला गया. बिक चुके दलाल चुनाव आयोग के माध्यम से पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली एम.सी.डी. चुनाव में ई.वी.एम. को ही हैक कर आम आदमी पार्टी को रोकने का एक प्रयास किया गया. पर जब ई.वी.एम. हैक की यह प्रक्रिया भी नंगे चिट्टे रूप में खुलकर सामने आ गई है तब आम आदमी पार्टी को ही तोड़ने के नये प्रयास के तहत् राजनीतिक रूप से शून्य कुमार विश्वास को ही ‘विश्वास’ में लेकर केजरीवाल पर हमला करावाया गया. फिर कुमार विश्वास के ही कंधे पर बंदूक रखकर भाजपा के नये जरखरीद ‘‘बिन्नी’’ कपिल मिश्रा को – जो आम आदमी पार्टी में मंत्री था – को उतारा. पर यह भी हर बार की ही तरह उस समय फुस्स साबित हो गया जब कपिल मिश्रा के अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ आयोजित अनशन में घुस कर भारतीय जनता पार्टी का ही एक कार्यकत्र्ता यह कहकर कपिल मिश्रा पर लात-जूता की बारिश कर दी कि ‘‘वह आम आदमी पार्टी का कार्यकत्र्ता है.’’ इतना ही नहीं वी. के. सिंह, किरण बेदी सहित अन्ना हजारे तक को अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ उतारने का प्रयास किया पर जैसा कि देश की जनता ने साफ कर दिया कि अन्ना हजारे समेत ये सारे लोग केवल पिटे हुए मोहरे ही हैं, कपिल मिश्रा भी इससे अलग नहीं है. वे भारतीय जनता पार्टी का केवल एक मोहरा भर ही है, जो आम आदमी पार्टी के सरकार में रहकर भाजपा के एजेंडा को लागू कर रही थी.

इस सबके सार में लाख टके का प्रश्न है कि ‘‘आखिर क्यों भारतीय जनता पार्टी अरविन्द केजरीवाल को भी अपने जैसा ही भ्रष्ट साबित करने पर तुली हुई है ?’’ तो इसका जवाब यह है कि आज तक की कांग्रेस-भाजपा सहित तमाम सरकारों ने देश के काॅरपोरेट घरानों की चाकरी में देश की विशाल आबादी को बर्बादी की कागार पर पहुंचा दिया है. देश के लोगों को भूखमरी, बेकारी, आतंक, भ्रष्टाचार के नरक में डाल दिया है. सत्ता केवल लूट और दलाली का पर्याय बन चुका था. पर 2014 में केन्द्र की भाजपा सरकार ने पूर्व के तमाम रिकार्डों को तोड़ते हुए अंबानी-अदानी जैसे कुछ दर्जन भर काॅरपोरेट घरानों की दलाली और चाकरी में जिस आश्चर्यजनक गति के साथ तमाम न्यूनतम लज्जा को भी ताक पर रखते हुए, जा भिड़ा, वह हैरतअंगेज है. उसके इस दलाली की पोल जो खोल रही है वह है एक मात्र अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व वाली – आम आदमी पार्टी. यही वह एक मात्र पार्टी है जो अपने निश्चित अभियान के साथ बिना डिगे, बिना बिके और बिना डरे तमाम बाधाओं को चिरते हुए न केवल अडिग है वरन् देश की विशाल आम जनता के आशा की उम्मीद भी है. जनता के आशा की इसी उम्मीद ने भ्रष्टाचारियों का खुदा बन बैठे भारतीय जनता पार्टी सहित उन तमाम पार्टियों को खतरा है, जिसने जनता को लूटना और काॅरपोरेट घरानों की सेवा करना ही अपना धर्म बना लिया था. यही कारण है कि आम आदमी पार्टी खासकर अरविन्द केजरीवाल को मिटाना अथवा उसे भी खुद की तरह ही भ्रष्टाचार की नदी में डुबोकर आम दुखी जनता के उम्मीदों की किरण को खत्म कर देना हर भष्टाचारी और काॅरपोरेट घरानों की दलाली को अपना धर्म बना चुके भाजपा-कांग्रेस समेत तमाम पार्टियों का प्रधान लक्ष्य बन चुका है.

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