Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

NRC संविधान की बुनियादी अवधारणा के खिलाफ

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 22, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

NRC पर गिरीश मालवीय कहते हैं, आप समझ नहीं पा रहे हैं. बात दरअसल NRC की नहीं है. NRC तो चारा है. NRC के पीछे जो ‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ छुपा हुआ है वो है असली खेल.

पिछली लोकसभा भंग होने के साथ ही मोदी-1 में लाया गया विवादित नागरिकता संशोधन विधेयक भी रद्द हो गया था. मोदी सरकार ने 8 जनवरी, 2019 को इसे लोकसभा में पेश किया था, जहां ये पारित हो गया, लेकिन राज्यसभा में ये बिल पास नहीं हो पाया था, अब इसे दुबारा से लाने की कोशिश की जा रही है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

यह ऐसा विधेयक था जो भारत के पिछले 70 सालों के संसदीय इतिहास में कभी नहीं आया था. यह विधेयक भारतीय संविधान की मूल अवधारणा के खिलाफ है. यह हमारी संविधान की प्रस्तावना की मूल भावना के विपरीत है.

दरअसल सरकार के नागरिकता संशोधन विधेयक में पड़ोसी देशों अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, पारसी, सिख, जैन और ईसाई प्रवासियों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है, लेकिन मुसलमानों को नहीं. इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि ग़ैर-मुस्लिम समुदायों के लोग अगर भारत में छह साल गुज़ार लेते हैं तो वे आसानी से नागरिकता हासिल कर सकते हैं, लेकिन मुस्लिम मतावलंबियों को यह छूट हासिल नहीं होगी.

कभी किसी ने सोचा भी नही था कि भारत में नागरिकता का आधार धर्म को बनाया जाएगा और धार्मिक आधार पर लोगों से नागरिकता प्रदान करने को लेकर भेदभाव किया जाएगा. पर अब यह सच होने जा रहा है.

संघ चाहता है कि मोदी सरकार नागरिकता संशोधन विधेयक को एक बार फिर संसद में पेश करे. दरअसल NRC में एक गड़बड़ भी हो गयी है. एनआरसी की फ़ाइनल सूची से जो 19 लाख लोग बाहर रह गए हैं, उनमें 13 लाख हिंदू और अन्य आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हैं और उन्हें अब कैसे भी करके बचाना है.

लेकिन पूर्वोत्तर की शरणार्थी समस्या कभी भी हिन्दू वर्सेज मुस्लिम नहीं था. यह मुद्दा हमेशा से स्थानीय वर्सेज बाहरी था.

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 1985 के असम समझौते का उल्लंघन करता है. सरकार की ओर से तैयार किया जा रहा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और असम समझौता ये दोनों धर्म को आधार नहीं मानते. ये दोनों किसी को भारतीय नागरिक मानने या किसी को विदेशी घोषित करने के लिए 24 मार्च, 1971 को आधार मानते हैं.

असम समझौता बिना किसी धार्मिक भेदभाव के 1971 के बाद बाहर से आये सभी लोगों को अवैध घुसपैठिया ठहराता है. जबकि नागरिकता संशोधन क़ानून बनने के बाद 2014 से पहले आये सभी गैर-मुस्लिमों को नागरिकता दी जा सकेगी, जो कि असम समझौते का उल्लंघन होगा. इसलिए यहांं समझने लायक बात यह है कि NRC का मुद्दा उठा कर, घुसपैठियों की बात कर के देश में हिन्दू वोट बैंक को पक्का किया जा रहा है

दरअसल बीजेपी की राजनीति देश में हिंदू वोट बैंक मज़बूत करने की कोशिश है. पहले दलित वोट बैंक होता था, मुस्लिम वोट बैंक होता था, पिछड़ा वोट बैंक हुआ करता था, लेकिन अब इनसे कहीं आगे हिंदू भी अब वोट बैंक बन चुका है.

पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई छात्र संगठन प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक में पहले ही विरोध में उतर चुके हैं. पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोग प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ हैं, क्योंकि यह धार्मिक आधार पर लोगों को नागरिकता देगा.

उदाहरण के तौर पर मिज़ोरम के संदर्भ में इसका मतलब यह होगा कि यह कानून बनने के बाद चकमा बौद्धों को वैध कर देगा, जो अवैध तरीके से बांग्लादेश से राज्य में घुसे हैं. ऐसे ही नागालैंड और अन्य राज्यों की स्थिति है.

लेकिन इन सब बातों को सिरे से खारिज कर मोदी सरकार जल्द ही फिर से सिटिजनशिप अमेडमेंट बिल (Citizenship Amendment Bill-CAB) लाने वाली है. इसलिए बार-बार NRC के बहाने घुसपैठियों का तर्क दिया जा रहा है. इस खेल को जनता जितना जल्दी समझ ले उतना अच्छा है.

उधर पुरुषोत्तम शर्मा NRC पर बताते हैं कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भी राज्य में एनआरसी लागू करने की बात कर रहे हैं. ये मूर्ख नहीं, अपने ही नागरिकों के खून के प्यासे दैत्य हैं.

पहाड़ के दो तिहाई नागरिक रोटी-रोजी की तलाश में पलायन कर चुके हैं. जो गांवों में बचे हैं, उनमें भी दलितों की संख्या काफी है, जो 90 प्रतिशत से ऊपर भूमिहीन हैं और उनके पास कोई पुराना रिकार्ड नहीं है.

इसी तरह समय-समय पर आई आपदाओं में जिनका सब कुछ चला गया, उनके पास नागरिकता साबित करने को क्या बचा है ? तराई भाबर के खत्तों में सदियों से बसे गुर्जर व खत्तावासियों के पास भी कोई पुराना रिकार्ड नहीं है. तराई भाबर की लगभग 80 प्रतिशत बसावट 1951 के बाद की है, जिनके पास राज्य की नागरिकता साबित करने का कोई सबूत नहीं है. इस तरह से हिसाब लगाएं तो पहाड़ के 75 प्रतिशत नागरिक और तराई भाबर के 80 प्रतिशत नागरिक तो सीधे इनके नागरिकता रजिस्टर से बाहर हो जाएंगे.

ज्यादातर राज्यों में आज इन एनआरसी समर्थक दैत्यों की ही सरकारें हैं, जो वहां रोजगार के लिए बसे बाहरी राज्यों के लोगों को नागरिकता रजिस्टर में दर्ज नहीं करेंगे. ऐसे में उत्तराखंड के नागरिकों की 75 प्रतिशत आबादी इन हत्यारों के डिटेंशन कैम्पों में मरने को मजबूर होगी.

एनआरसी का विरोध करें. धर्म के नाम पर अपने ही नागरिकों के खून के प्यासे इन दैत्यों को सत्ता से बाहर करने के लिए प्रतिरोध संघर्ष तेज करें.

Read Also –

गैर-राजनैतिक व्यक्ति घोर राजनैतिक स्वार्थी, चालाक और डरपोक व्यक्ति हैं
मानवाधिकार किसके लिए ?
किताबों से थर्राती सरकार और न्यायपालिका 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

युवा पीढ़ी को मानसिक गुलाम बनाने की संघी मोदी की साजिश बनाम अरविन्द केजरीवाल की उच्चस्तरीय शिक्षा नीति

Next Post

कश्मीर : आजादी और मौत के बीच जंग

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

कश्मीर : आजादी और मौत के बीच जंग

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

पेगासस जासूसी कांड : निजता के अधिकार और जनतंत्र पर हमला

September 12, 2021

तुमने बेच दी जमीर अपनी, तो क्या मैं भी बेच दूं

August 17, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.