Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

आतंकी हमलों का राजनीतिक परिपेक्ष्य

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 18, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
प्रभात कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ता
मेरे इस आलेख का उदेश्य सिर्फ लोगों को उन्मादी होने के वजाय संयमित रहकर पड़ताल करने की सलाह देना भर है. वरना अपने शहीद जवानों के लिए सोशल मीडिया पर दहाड़ रहे बांकुरों से कम गम-ओ-गुस्सा मुझे नहीं है. बदला मैं भी चाहता हूं, पर इसके असली गुनाहगारों से !!

14 फ़रवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले के बाद पूरा देश हतप्रभ-गमजदा होने के साथ ही गुस्से से उबल रहा है. हर तरफ से पाकिस्तान पर हमले की मांग उठ रही है. अचानक से हम देशभक्त से राष्ट्रवादी हो गए हैं. ऐसा पहली बार नहीं है. जब भी ऐसे हमले हुए हैं, देश इसी मानसिक दशा से गुजरा है. यह लाजिमी भी है क्योंकि हम न सिर्फ अपने देश से प्यार करते हैं बल्कि इन घटनाओं में हताहत होने वाले अधिकांश लोग आम परिवेश के होते हैं, जो हमें अपने करीबी या सगे से लगते हैं. कुछ दिनों के बाद धीरे-धीरे सबकुछ सामान्य होने लगता है, जैसे हम अपने सगों को खोने के बाद भी हो जाते हैं लेकिन देशहित के इन मामलों में यही सामान्य हो जाना खतरनाक है क्योंकि इस बीच कई लोग हमारी आहत भावनाओं का सौदा कर अपना मतलब साध चुके होते हैं. गम और गुस्से के इसी माहौल में हमें इसके राजनीतिक परिपेक्ष्य की पड़ताल जरूर करनी चाहिए.

मेरा ये अनुभव है कि देश की संप्रभुता को चुनौती देने वाले इस तरह के बड़े आतंकी हमले जैसे कारगिल, संसद भवन, मुम्बई, उरी, पठानकोट और अब ये पुलवामा तभी हुए हैं जब देश की सरकार राजनीतिक संकट में घिरी रही है या चुनाव करीब रहे हैं. क्या यह महज संयोग है या ऐसे वक्त में दुश्मन सरकार को कमजोर समझ लेता है, या फिर इसमें कोई बड़ी साजिश होती है, इसकी पड़ताल इसलिए आवश्यक है क्योंकि जब हमारी देशभक्ति राष्ट्रवाद का रूप लेने लगे, तब हमें सचेत हो जाना चाहिए कि हमें उकसाया जा रहा है (देशभक्ति राष्ट्रप्रेम है जबकि राष्ट्रवाद दूसरी राष्ट्रीयताओं से घृणा). उकसावे से हम अपना धैर्य खोकर उन्मादी हो जाते हैं. ऐसे में हम सही फैसले लेने की क्षमता खो देते हैं.




आज भी देश की सरकार अपने नकारेपन और भ्रष्टाचार के कई मामलों में घिरी है, जिसमें राफेल मुद्दा गंभीर है. पूरे देश की निगाहें इस तरफ लगी हैं. प्रधानमंत्री भ्रष्ट्राचार पर गढ़े अपनी ही कसौटी में फंसे हैं, साथ ही आम चुनाव सर पे है. ऐसे वक्त पर हुये आतंकी हमले से लोगों का ध्यान सरकार से हटकर एकाएक देशभक्ति पर लग गई है और इस परिवर्तन में भाजयुमो, एबीवीपी, बजरंग दल जैसे भाजपाई संगठन इनकी जिस प्रकार से मदद कर रहे हैं, यह कई सवाल खड़े करता है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

पठानकोट हमले के वक्त भी यूपी समेत कई राज्यों में असेम्बली के चुनाव होने थे. इस तरह इसे संयोग नहीं कह सकते. यह कोई बहुत बड़ी मिलीभगत है. इस बार भी सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कोई झूठी कहानी गढ़ी जाएगी ताकि देश में उपजे जनूनी राष्ट्रवाद को ठंढक मिल सके और भाजपा को आने वाले चुनाव में वोट. अगर सच में ऐसा है तो यह गद्दारी है देश के साथ, देश के जवानों की शहादत के साथ.

मेरे इस आलेख का उदेश्य सिर्फ लोगों को उन्मादी होने के वजाय संयमित रहकर पड़ताल करने की सलाह देना भर है. वरना अपने शहीद जवानों के लिए सोशल मीडिया पर दहाड़ रहे बांकुरों से कम गम-ओ-गुस्सा मुझे नहीं है. बदला मैं भी चाहता हूं, पर इसके असली गुनाहगारों से !!




Read Also –

अखण्ड भारत का सपना दिखाने वालों अखण्ड कश्मीर ही बना के दिख दो ! मौका भी हाथ में आ गया है !
संविधान में आस्था बनाम हिन्दू आस्था की चुनावी जंग 




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



Previous Post

अखण्ड भारत का सपना दिखाने वालों अखण्ड कश्मीर ही बना के दिखा दो ! मौका भी हाथ में आ गया है !

Next Post

आक्रोशित चीखें ऐसा कोलाहल उत्पन्न करती हैं, जिसमें सत्य गुम होने लगता है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

आक्रोशित चीखें ऐसा कोलाहल उत्पन्न करती हैं, जिसमें सत्य गुम होने लगता है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कहीं से लाओ वह दिमाग़ जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता : रघुवीर सहाय से पहली और आखिरी मुलाकात

December 10, 2024

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

April 2, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.