Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अखण्ड भारत का सपना दिखाने वालों अखण्ड कश्मीर ही बना के दिखा दो ! मौका भी हाथ में आ गया है !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 18, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
Vinay Oswalविनय ओसवाल, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक
चुनाव रैलियों में शहीदों की शहादत पर खूब आंसू बहा रहे हैंं और उपस्थित भीड़ को बता रहे हैंं कि “जो आग उनके दिलों में है, वही आपके दिल मे भी है,” ठीक है, होनी भी चाहिए, परन्तु मोदी जी, आपकी पार्टी की पिछली सरकार (2004) के निर्णय, जिसके बाद CISF, BSF, ITPB, और CRPF के जवानों को पेंशन से वंचित कर दिया गया था, को लेकर लोगों के दिलों में आग जल रही है. कृपया देश को बताइए कि क्या वही आग आपके दिल में भी जल रही है या कोई दूसरी ?

कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ने जो जाहिलाना हरकत की है उसका जबाब 2016 जैसी सर्जिकल स्ट्राइक तो नही है, कुछ गम्भीर, बड़ी और फिर पीछे न हटने वाली कार्यवाही से ही दिया जाना जरूरी है. मोदी जी ने कहा है कि स्थान दिन और समय सेना तय करे, उसे पूरी छूट है. खुली छूट देने की बात तो आप पिछले दो सालों में कम से कम दो बार 4/10/16, 2/5/17 में भी कर चुके हैं.

देश को सम्बोधित प्राधानमन्त्री का यह संदेश लोगो का जोश तो बढ़ाता है, पर अधूरा है. अधूरा इस मायने में है कि आज सेना सिर्फ सरहदों पर लड़ती है परन्तु राजनैतिक नेतृत्व पूरे विश्व के प्रति जबाब देह हो जाता है. मोदी जी देश को बताइए कि क्या आपने सेना को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को उससे छीनने के स्पष्ट निर्देश दिए हैंं ?

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

“भारत की छाती 56 इंच की है”, इस का एहसास तो इंदिरा गांधी ने पूरे विश्व को आज से 48 साल पहले ही 1971 में करा दिया था. भारत का सीना आज भी 56 इंच का ही है, यह आपको सिद्ध करके दिखाना है. चुनाव जीत कर सिर्फ अपने देश के लोगों को दिखाना चाहें, विश्व को न दिखाना चाहें, ये आपकी मर्जी.”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यह स्पष्ट कर चुका है कि अलकायदा, तालिबान और अन्य आतंकवादी संगठन मौलाना अज़हर मसूद को आर्थिक मदद, हथियार आदि-आदि मोहैय्या कराते हैं. इसी मदद से वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठन चलाता है, अपने चेलों को आधुनिक घातक हथियार खरीद कर देता है, या खरीदने के लिए पैसे देता है और अन्य प्रकार से उनकी मदद करता है. अफगानिस्तान के प्रथम युद्ध में हरकत-उल-मुझाहिदीन के सदस्य के रूप में अज़हर भाग ले चुका है और जैश-ए-मोहम्मद तालिबान के साथ अमेरिकी सेना से युद्ध भी लड़ चुकी है.




हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबानों का अमेरिकी सेना के साथ सुलह और अमरीका के उसे सत्ता की कुर्सियों पर बिठाने को तैयार हो जाने से जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों के हौंसले बढ़ गए है. उन्हें लगता है कि वह अमेरिकी सेना को बातचीत की टेबल पर लाने के मजबूर कर सकते हैं तो हिंदुस्तानी सेना को क्यों नही ? माना जा सकता है कि कश्मीरी युवकों का दुस्साहस बढ़ने का एक कारण यह भी है इसीलिए जैश-ए-मोहम्मद को पुलवामा में दुस्साहस करने के लिए स्थानीय कश्मीरी युवक का कंधा आसानी से मिल गया.

विश्व राजनीति के विस्तार में जा कर उसका विश्लेषण करना मेरा उद्देश्य नही है न इस विषय पर मेरी गहरी पकड़ है, मैं तो पाठकों को प्राधानमन्त्री का वक्तव्य क्यों अधूरा है, बस इतना स्पष्ट करना चाहता हूंं इसलिए प्रधानमन्त्री के इस संदेश को देश के लोगों के मनोबल को बढ़ाने वाला तो माना जा सकता है, उससे ज्यादा तवज्जो नहींं दी जा सकती.




मोदी जी के सामने विकल्प एक ही है, देश में आपात काल घोषित करें, चुनाव कम से कम छः माह या साल भर के लिए टालें और पहले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों से निबटने की रणनीति बनाये, पूरा देश उनके साथ खड़ा है. आतंकवादियों को पछाड़े फिर चुनाव कराने की सोचे. पर क्या यह इतना आसान होगा उनके लिए ? न आसान है न तत्काल सम्भव.

2001 में कश्मीर विधानसभा पर पुलवामा जैसे आत्मघाती विस्फोट की तरह हमला करने के बाद से जैश कश्मीर में फिर से सक्रिय होने की बाट बेसबरी से जो रहा था. 2015 से ध्यान करें पठानकोट एयर बेस हमला, उरी में सेना की बिग्रेड पर हमला, 2016 में हिजबुल मुजाहीदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत से शुरू हुआ यह सिल-सिला रुका नहींं है.

सेना और नागरिकों की मौतों की खबरें रोज टीवी और अखबारों में सुर्खियां निरन्तर बनी ही रही हैं. इसी बीच भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में सरकार बना कर इस आग में घी ही डाला पानी नही. स्थानीय स्तर पर अराजकता के बढ़ने से जैश को अपने पाऊंं फिर से पसारने का मौका दे दिया.

सर्जिकल स्ट्राइक से भाजपा की राजनीति को उस समय फायदा हुआ, इससे इंंकार नहींं किया जा सकता, पर देश को क्या हांसिल हुआ ? सरकार आज तक इसे देश को बता नहींं पाई है. स्थिति आज  भयावह हो चुकी है. मैं नहींं समझता इन परिस्थितियों में सरकार जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठा पायेगी.




हाल में जारी प्रधानमन्त्री का उक्त बयान सिर्फ देश के लोगों का मनोबल बढाने के लिए और इसका चुनावी लाभ उठाने के लिए दिया गया है, यही माना जायेगा. पाकिस्तान से उसके कब्जे वाले कश्मीर को अगर नहीं छीन पाए तो विश्व राजनीति को साधने के कौशल के आपके बयान और प्रचार खोखले ही साबित होंगे.

देश के भीतर भी चुनावी समर में भाजपा सरकार की,/आपकी सरकार की छवि मतदाताओं को कायराना ही नजर आएगी. चुनाव रैलियों में शहीदों की शहादत पर खूब आंसू बहा रहे हैंं और उपस्थित भीड़ को बता रहे हैंं कि “जो आग उनके दिलों में है, वही आपके दिल मे भी है,” ठीक है, होनी भी चाहिए, परन्तु मोदी जी, आपकी पार्टी की पिछली सरकार (2004) के निर्णय, जिसके बाद CISF, BSF, ITPB, और CRPF के जवानों को पेंशन से वंचित कर दिया गया था, को लेकर लोगों के दिलों में आग जल रही है. कृपया देश को बताइए कि क्या वही आग आपके दिल में भी जल रही है या कोई दूसरी ?

क्या आपको पता है?

पुलवामा हमले के शहीदों में से 75% जवानों के परिवार को पेंशन नही मिलेगी!

क्योंकि 2004 के बाद भर्ती हुए जवान(CRPF/BSF/ITBP/SSB/CISF)पेंशन के हकदार नही है।

सरकार अगर 2004 के बाद भर्ती जवानों को पेंशन लागू कर दे तो शहीद के परिवारों को बहुत बड़ी मदद हो जाएगी🙏🙏 https://t.co/0Vn8fcOgo5

— Sharad Sharma (@sharadsharma1) February 17, 2019

इस सब के बावजूद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी ने कुम्भ में आयोजित धर्म संसद में इस आशय का बयान दिया कि पाकिस्तान सहित पड़ोसी देशों से दोस्ताना ताल्लुक बनाने की मोदी सरकार की नीति सही है. आखिर पाकिस्तान भी इसी देश का एक हिस्सा रहा है. नीति के सही ठहराए जाने को अभी 15 दिन भी नहींं गुजरे, पाकिस्तान की यह हरकत सामने आ गई. लोग उसी पाकिस्तान के झण्डे पूरे देश मे जला रहे हैंं और आरएसएस भी यह कहने का साहस नहींं रखती कि उसके मुखिया ने पाकिस्तान के प्रति भारत सरकार की दोस्ताना नीति को सही ठहराया था, उस दोस्त देश के झण्डे मत जलाओ.

सम्पर्क नं. +91  7017339966




Read Also –

पुलवामा में 44 जवानों की हत्या के पीछे कहीं केन्द्र की मोदी सरकार और आरएसएस का हाथ तो नहीं ?44 जवानों की हत्या के आड़ में फर्जी राष्ट्रवादियों की गुण्डागर्दी
पुलवामा : घात-प्रतिघात में जा रही इंसानी जानें
संविधान जलाने और विक्टोरिया की पुण्यतिथि मानने वाले देशभक्त हैं, तो रोजी, रोटी, रोजगार मांगने वाले देशद्रोही कैसे ?
सवालों से भागना और ‘जय हिन्द’ कहना ही बना सत्ता का शगल
70 साल के इतिहास में पहली बार झूठा और मक्कार प्रधानमंत्री







[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Tags: अज़हर मसूदआरएसएसजैश-ए-मोहम्मदपुलवामाभाजपा सरकार
Previous Post

पुलवामा में 44 जवानों की हत्या के पीछे कहीं केन्द्र की मोदी सरकार और आरएसएस का हाथ तो नहीं ?

Next Post

आतंकी हमलों का राजनीतिक परिपेक्ष्य

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

आतंकी हमलों का राजनीतिक परिपेक्ष्य

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

तिरंगा को आतंक बना कर गद्दार सावरकर को स्थापित करने का कुचक्र रचा मोदी ने

August 16, 2022

द कश्मीर फाईल्स : देश में नफरत का कारोबार कर करोड़ों की कमाई करता मक्कार अग्निहोत्री

March 26, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.