ROHIT SHARMA

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'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

‘शांति संभव है, अगर भारत 1962 के युद्ध की सच्चाई स्वीकार कर ले तो…’ : ब्रिगेडियर बीएल पूनिया (सेवानिवृत्त)

सारांश : ब्रिगेडियर बीएल पूनिया, सेवानिवृत्त, ने अपने एक लेख में 1962 के भारत-चीन युद्ध की सच्चाई को स्वीकार करने...

गोडसे ने गांधी जी को क्यों मारा ? सरदार वल्लभ भाई पटेल स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सके ?

गोडसे ने गांधी जी को क्यों मारा ? सरदार वल्लभ भाई पटेल स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन...

आमरण अनशन

अन्न पाणी त्याग थोड़ा-थोड़ा मरने से हुक्मरान की संवेदनाएं लौट आएंगी मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है मैं हवा में बातें...

भेड़िये

  वे भेड़िये हैं भोले भाले भालू नहीं हैं कि मेरे शांत, स्पंदनहीन, सर्द शरीर को देख कर आगे बढ़...

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