ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

भेड़िये

  वे भेड़िये हैं भोले भाले भालू नहीं हैं कि मेरे शांत, स्पंदनहीन, सर्द शरीर को देख कर आगे बढ़...

कहीं से लाओ वह दिमाग़ जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता : रघुवीर सहाय से पहली और आखिरी मुलाकात

कहीं से लाओ वह दिमाग़ जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता : रघुवीर सहाय से पहली और आखिरी मुलाकात चन्द्रभूषण अक्टूबर...

नक्सलबाड़ी उभार के दौरान उभरे महत्वपूर्ण जनवादी कवि वेणुगोपाल

सारांश : वेणुगोपाल एक महत्वपूर्ण जनवादी कवि थे, जिन्होंने नक्सलबाड़ी विद्रोह के दौरान अपनी पहचान बनाई. उनकी कविताओं में विद्रोह...

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