ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

हिसाब

उधर से इधर कोई नहीं आया इधर से उधर कोई नहीं गया हम वहीं हैं जहां कल थे वो वहीं...

कोरोना एक राजनीतिक महामारी है, जिसका खेल एक बार फिर से शुरू हो गया

कोरोना एक राजनीतिक महामारी है. जिसका सबसे ज्यादा फायदा तानाशाही चलाने वाली सरकारों ने उठाया है. चुनावी रैलियों में हजारों की...

प्रलाप

किशोरी तुम्हारी गाल पर उगे मुंंहासे नव ग्रह हैं या अंधकार की असीम कोख में पलते सितारे तुम्हें कभी नहीं...

19 नवम्बर : तुम्हारा नाम क्षितिज पर टंका है

कनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ सवाल फुफकार रहा है. देश केवल मुट्ठी भर नेताओं, उद्योगपतियों, न्यायाधीशों, नौकरशाहों और...

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