ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

शब्द भेदी सन्नाटा

शब्द भेदी सन्नाटा समय के घुंघराले बालों में जूंएं बीनते हुए कभी कांपीं नहीं उंगलियां मेरी वीभत्स का उपचार क्षणिक...

रामायण की ‘आदर्श स्त्री’ : अग्निपरीक्षा, परित्याग और भूमिप्रवेश

रामायण के आलोक में 'आदर्श स्त्री' : अग्निपरीक्षा, परित्याग और भूमिप्रवेश चन्द्रभूषण राम-रावण युद्ध समाप्त होने के बाद, जब पूरी...

मानसून

मानसून नज़दीक है छत में रिसाव दीवार में दरार है लाचारी अकेली इस साल की नहीं हर साल की है...

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