मोदी सिर्फ अडानी अम्बानी ही नहीं, राजे-रजवाड़ों और उनकी पतित संस्कृति और जीवनशैली तक को पुनर्प्रतिष्ठित कर रहा है
मोदी सिर्फ अडानी अम्बानी ही नहीं, राजे-रजवाड़ों और उनकी पतित संस्कृति और जीवनशैली तक को पुनर्प्रतिष्ठित कर रहा है यूं...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
मोदी सिर्फ अडानी अम्बानी ही नहीं, राजे-रजवाड़ों और उनकी पतित संस्कृति और जीवनशैली तक को पुनर्प्रतिष्ठित कर रहा है यूं...
डेमोक्रेटिक बैकस्लाइडिंग के स्पष्ट संकेत : निर्वाचन प्राधिकारियों यानी चुनावी तंत्र पर नियंत्रण लोकतांत्रिक संविधान आम तौर पर अधिकारियों को...
कहां रुकेगा भारत का पीछे खिसकता लोकतंत्र ? चन्द्रभूषण देश में आम चुनाव की गहमागहमी है लेकिन दुनिया में भारतीय...
हू आर यू राजीव कुमार ?? भारत का सत्तावान नागरिक होने के नाते हमें राजीव कुमार से पूछना चाहिए. चीफ...
पीयूसीएल की प्रेस कॉन्फ्रेंस : चौसा के सैकड़ों किसानों के ऊपर पुलिसिया हिंसा की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच हो ! 'बक्सर...
नीतीश कुमार अपने अतीत की छाया नहीं, वर्तमान की त्रासदी हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना जिस दिन...
इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी जनता पर किये जा रहे हमलों से उत्पन्न मानवीय त्रासदी अर्जुन प्रसाद सिंह इजरायल द्वारा पिछले करीब...
चीन-ताइवान का संभावित सैन्य संघर्ष और भारत को सबक संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त देशों की सूची में ताइवान नाम...
आज सुप्रीम कोर्ट के सामने देश के जनतंत्र को बचाने का आख़िरी मौक़ा सुब्रतो चटर्जी भारत की आज़ादी के बाद...
क्रेमलिन ने कहा है कि यूक्रेन को जिन नाटो देशों ने हथियार दिए वो रूस के वैध शत्रु हैं और...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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