Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भारत में सरकारी तंत्र और आम आदमी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 30, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत में सरकारी तंत्र और आम आदमी

जब मैंने अपनी एक पोस्ट में लिखा कि भारत में लाखों करोड़ों लोग ऐसे हैं जिनका मासिक वेतन 3000 रुपए महीना है, इसलिए सरकारी तंत्र के लोगों का वेतन व सुविधाएं कम की जानी चाहिए तो बहुत लोग ज्ञान व तथ्यों का कटोरा लेकर आ गए तर्क-वितर्क-कुतर्क करने. बहुत तकलीफ हुई लोगों की संवेदनशीलता, विचारशीलता व सोच का छिछला स्तर देखकर.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

बहुत लोगों ने यह भी बताया कि ईंटा ढोने वाला मजदूर भी 12,000 से 15,000 रुपया महीना कमाता है. शायद इन लोगों की नजर में शारीरिक परिश्रम करना सबसे घटिया होना है, सबसे निम्न होना है. तभी इन लोगों को यह लगता है कि यदि शारीरिक परिश्रम करने वाला मजदूर इतना कमाता है तो बाकी लोग तो अधिक ही कमाते होंगे. अजीब मानसिकता से ग्रस्त हैं लोग. इन लोगों को यह भी लगता है कि एक मजदूर पूरे साल हर रोज काम पाता ही है. इन लोगों को अपना खून जलाकर रिक्शा चलाने वाले मजदूर से भी तकलीफ होगी क्योंकि कुछ रिक्शे वाले बड़े शहरों में 30,000 रुपए महीना या अधिक भी कमा लेते हैं.




मैं सन् 2016 तक स्वयं अपने जीवन में ऐसे बहुत लोगों से मिला हूं जिनकी मासिक आय 3000 रुपए से कम थी.

यदि पिछले तीन सालों में भारत के करोड़ों लोगों की आय अचानक कई गुना बढ़ गई है तो इसके लिए मोदी जी को सलाम किया जाना चाहिए तथा उन लोगों को धिक्कारा जाना चाहिए जो मोदी जी व उनकी सरकार को गालियां देते हैं, आलोचनाएं करते हैं.

भारत के लोगों की औसत मासिक आय लगभग 3500 रुपया महीना है.

यह मेरा बनाया आकड़ा नहीं है. यह सरकारी व अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के आकड़े हैं.

मासिक आय का औसत 3500 रुपए महीना इसलिए है, क्योंकि कुछ करोड़ सरकारी लोग अनाप शनाप वेतन व सुविधाएं पाते हैं. इसका मतलब सिर्फ यह है कि भारत में बहुत करोड़ लोगों की मासिक आय 3000 रुपए भी नहीं है, 3000 रुपए से भी बहुत बहुत कम है.




इससे यह भी दीखता है कि भारत में सरकारी तंत्र में सबसे कम वेतन पाने वाला भी भारत के लोगों की औसत मासिक आय से कम-अधिक लगभग 10 गुना अधिक वेतन पाता है. सबसे अधिक वेतन पाने वाले सरकारी आदमी की बात ही छोड़ दी जाए. भारत में एक बेहद घटिया परंपरा है कि लोग सरकारी तंत्र के लोगों का वेतन देखते हैं, उनको मिलने वाली सुविधाओं को वेतन में नहीं जोड़ा जाता है. यह भी एक बेहद घटिया कुचक्र है.

आस्ट्रेलिया के लोगों की औसत मासिक आय लगभग 400,000 (चार लाख) रुपए महीना है. सरकारी तंत्र का एक बड़ा तबका इस औसत मासिक आय से बहुत कम वेतन पाता है. आस्ट्रेलिया के सबसे ताकतवर नौकरशाह का वेतन भी लोगों की औसत मासिक आय का 10 गुना भी नहीं है.




कमोवेश यही स्थिति दुनिया के सभी विकसित देशों की है. यही कारण है कि विकसित देश, विकसित हैं. आम लोगों का जीवन बहुत-बहुत बेहतर है. सरकारी तंत्र आम लोगों को जानवर नहीं समझ पाता, अलोकतांत्रिक व अय्याश नहीं हो पाता. भ्रष्टाचार में बेशर्मी व धूर्तता के साथ लिप्त नहीं होा पाता.

ऐसा सरकारी तंत्र को अनाप शनाप वेतन, अनाप शनाप सुविधाएं व सामंती अधिकार क्यों, जब वे आम लोगों का जीवन बेहतर बना पाने में पूरी तरह से असफल हैं, गैर-जवाबदेह हैं, क्रूर हैं, बेशर्म हैं ? जबकि सरकारी तंत्र का काम ही है आम लोगों का जीवन बेहतर बनाना.

भारत में सरकारी तंत्र के लोगों व आम आदमी में इतना अधिक अंतर है कि आम आदमी की स्थिति एक निरीह व लिजलिजे कीड़े से इतर कुछ भी नहीं या तो वह भी भ्रष्टाचार के नेक्सस का हिस्सा बने या अपना जीवन पीढ़ी दर पीढ़ी लिजलिजे कीड़े की तरह घिसटता हुआ गुजारे. यही अंतर सरकारी तंत्र को भ्रष्ट, गैरजवाबदेह, बेशर्म, धूर्त, क्रूर व हिंसक बनाता है.




भारत का सरकारी तंत्र अपने आपमें दुनिया का सबसे धूर्त, पाखंडी व क्रूर मैनीपुलेटर संस्थान है.

मेरी बात से हर वह व्यक्ति असहमत होगा जो या तो सरकारी वेतन पाता है या मन में सरकारी वेतन पाने की चाहत रखता है या सरकारी वेतन पाने वालों पर निर्भर है.

मैं ऐसे लोगों से सूक्ष्म सामाजिक ईमानदारी व संवेदनशीलता की अपेक्षा करता भी नहीं हूं.

(अपवाद लोग हमेशा होते हैं, अपवाद लोगों से समाज व देश के नियम व चरित्र नहीं बदला करते हैं). यहां मैं असल अपवादों की बात कर रहा हूँ, जो अपवाद होने का जीवंत अभिनय के साथ ढोंग रचते हैं, उनकी बात बिलकुल भी नहीं कर रहा हूं.

  • सामाजिक यायावर




Read Also –

अरुंधति भट्टाचार्य का अंबानी के यहां नौकरी, यह खुलेआम भ्रष्टाचार है
CMIE रिपोर्ट : नौकरी छीनने में नम्बर 1 बने मोदी
ग्लोबल हंगरी इंडेक्स : मोदी सरकार की नीति से भूखमरी की कगार पर पहुंचा भारत
द ग्रेट बनाना रिपब्लिक ऑफ इंडिया





[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




[ लगातार आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रतिभा एक डायरी को जन-सहयोग की आवश्यकता है. अपने शुभचिंतकों से अनुरोध है कि वे यथासंभव आर्थिक सहयोग हेतु कदम बढ़ायें. ]
Previous Post

CBI मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला : जनतंत्र का अर्थ है तानाशाही का प्रतिरोध

Next Post

दांव पर सीबीआई की साख – ये तो होना ही था

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

दांव पर सीबीआई की साख - ये तो होना ही था

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आरक्षण पर चन्द्रचूड़ : ब्राह्मणवाद जब जब संकटग्रस्त होता है, कोई बाभन अवतारी भेष में आता है

August 3, 2024

तहजीब मर जाने की कहानी है अयोध्या

August 8, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.