विकीपीडिया लिखता है कि मानव समाज में जितनी भी संस्थाओं का अस्तित्व रहा है, उनमें सबसे भयावह दासता की प्रथा है. मनुष्य...
Read moreDetailsगुरूचरण सिंह इस जीत ने यह साबित कर ही दिया है कि इच्छाशक्ति हो तो सीमित संसाधनों, सीमित अधिकारों के बावजूद...
Read moreDetailsपुण्य प्रसून वाजपेयी, पत्रकार मोदी ने बटन दबाया लेकिन किसानों तक कुछ नहीं पहुंचा. 68 महिने में 168 योजनाओं का...
Read moreDetailsपुण्य प्रसून वाजपेयी, पत्रकार दिल्ली में केजरीवाल की जीत वैकल्पिक राजनीति से कहीं ज्यादा वैकल्पिक इकोनाॅमी की जीत है. एक...
Read moreDetailsगुरूचरण सिंह आजकल वेलेंटाइन बिरादरी बहुत व्यस्त है. देखते ही बनता है उनका उत्साह ! किसी के भी पास सिर...
Read moreDetailsदिल्ली के नतीजों ने नफ़रत की राजनीति को शिकस्त दी है- यह एक अधूरा वक्तव्य है. पूरी बात यह है...
Read moreDetailsरविश कुमार, मैग्सेस अवार्ड प्राप्त जनपत्रकार जब शहर में एक बार भीड़ बनती है तो वो एक चुनाव से गायब...
Read moreDetailsकल IIMC में 11 छात्रों के 5 दिन के निलंबन के मुद्दे पर, दो एक बात कहनी है - पहली...
Read moreDetailsगुरूचरण सिंह मेरे एक दोस्त ने पूछा था कभी. दोस्त वह था भी खाकी निक्करधारी जिसने मुझे भी अपने सांचे...
Read moreDetailsअत्याधुनिक वोटिंग प्रणाली ईवीएम के बावजूद दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम 11 फरवरी को घोषित किया जायेगा. आखिर इतना अधिक...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.