नामांकन पॉलिसी में बदलाव लाने के खिलाफ और साथ ही गत 14 मार्च को सोशल मीडिया में एक प्रोस्पेकटस के...
Read moreDetailsजिस इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली पत्रिका ने सन् 1949 में सचिन चौधरी की देखरेख में निकलना शुरू किया था, उसी...
Read moreDetailsरविश कुमार भाषणों के अलावा आज भारत में कुछ नहीं हुआ. भाषणों में हवाबाज़ी ख़ूब है मगर हवा को लेकर...
Read moreDetailsहालिया वर्षों में दुनिया में तीन ऐसी घटनाएं हुईं जिन्हें 'पोस्ट-ट्रूथ पॉलिटिक्स' से जोड़ कर देखा गया. पहला, अमेरिका में...
Read moreDetailsबहुजन समाज के एक ग्रुप में चर्चा करते हुए किसी ने पूछा कि '2019 के संसदीय चुनाव में कौन जीतना...
Read moreDetailsअब भी लोगों की आंखें नहीं खुल रही है तो इस देश का अब भगवान ही मालिक है ... !...
Read moreDetailsदेशद्रोह और राजद्रोह का फ़र्क समझना ज़रूरी है. गुर्जर आरक्षण आन्दोलन में भाग लेने वालों के विरुद्ध धारा 124-A के...
Read moreDetailsआज एक लेख पढ़ रहा था जो अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प की जीत की संभावनाओं के विषय...
Read moreDetailsमैं जानता हूं आपको बहुत बुरा लगता है, जब कोई आपसे कहता है कि इस देश में रहने वाला कोई...
Read moreDetailsबीएसएनएल के बारे में आपको इतना तो पता है न कि लगभग 55 हज़ार कर्मचारी कभी भी घर पर बिठाए...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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