Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कॉमरेड जी. एन. साईबाबा की शहादत, भाजपा सत्ता द्वारा की गई संस्थानिक हत्या है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 13, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कॉमरेड जी. एन. साईबाबा की शहादत, भाजपा सत्ता द्वारा की गई संस्थानिक हत्या है
कॉमरेड जी. एन. साईबाबा की शहादत, भाजपा सत्ता द्वारा की गई संस्थानिक हत्या है
रितेश विद्यार्थी

पहली बार 2010 में प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा से बीबीसी के माध्यम से परिचय हुआ था, व्हील चेयर से चलने वाले एक बेबाक माओवादी बुद्धिजीवी के रूप में. जिसने अपने विचारों और सरोकारों की कीमत लगभग 10 वर्षों तक यातना गृह में रहकर चुकाया या यूं कहें कि अंततः अपनी जान देकर चुकाया. एक 90% विकलांग व्यक्ति जिसके दोनों पैर काम नहीं करते, एक हाथ भी काम करना बंद कर दिया हो, अंडा सेल की तन्हाई में अपना नित्य क्रिया कैसे करते होंगे, यह सोच कर भी शरीर में सिहरन हो जाता है.

गढ़चिरौली सेशन कोर्ट के जज ने प्रोफेसर साईबाबा व उनके सह अभियुक्तों को उम्र कैद की सजा सुनाते हुए कहा था कि ‘इनके विचारों से देश में विदेशी निवेश प्रभावित हो रहा है, वो तो कानून से मेरे हाथ बंधे हुए हैं वरना मैं इन्हें फांसी की सजा देता.’ आगे हाई कोर्ट में अपील हुई और सालों तक बिना जमानत दिए हाई कोर्ट में इनका ट्रायल चलता रहा. बाकी बंदी एक बार बरी होने के बाद छूट जाते हैं लेकिन साईबाबा व उनके सहाभियुक्तों को महाराष्ट्र हाईकोर्ट को दो-दो बार बरी करना पड़ा.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

पहली बार हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के 24 घंटे के भीतर सरकार सुप्रीम कोर्ट में पहुंच जाती है और सुप्रीम कोर्ट यह कहकर इनकी रिहाई पर रोक लगा देता है कि ‘इनका शरीर भले ही काम न कर रहा हो मगर दिमाग खतरनाक है. इनपे लगाए गए आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हुए हैं इसलिए इन्हें रिहा नहीं किया जा सकता. इनके मुकदमे का नए सिरे से सुनवाई हो.’

दूसरी बार फिर हाई कोर्ट यह कहते हुए कि सिर्फ विचारधारा मात्र रखने से कोई दोषी नहीं हो जाता, प्रोफेसर साईबाबा और अन्य सह अभियुक्तों को रिहा कर देता है. जहां राम रहीम जैसे अपराधियों को दर्जनों बार पैरोल मिल जाता है, वहीं साईबाबा को उनके मृत मां के विदाई कार्यक्रम में शामिल होने तक की अनुमति नहीं दी जाती है.

साईबाबा एक भूमिहीन दलित परिवार में पैदा हुए थे. उन्होंने अपनी रिहाई के बाद प्रेस वार्ता में बहुत ही भावुक होकर यह बताया कि उनकी मां की एक मात्र इच्छा थी कि उनका बेटा पढ़ लिख जाए. बचपन से पोलियो होने की वजह से उनकी मां उन्हें गोद में उठाकर स्कूल पहुंचाया करती थी. विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनने का सपना भी उनके मां का ही था. ऐसी मां के विदाई कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति भी दुनिया का सबसे बड़ा ‘लोकतंत्र’ उन्हें नहीं देता है.

जेल में उनको व्हील चेयर से नीचे गिराकर घसीटा जाता है. उन्हें आवश्यक इलाज तक मुहैया नहीं कराया जाता. साईबाबा प्रेस वार्ता में बताते हैं कि जब वो जेल गए तो बचपन से मिले पोलियो के अलावा उन्हें और कोई बीमारी नहीं थी. लेकिन जेल जीवन ने उनके शरीर के तमाम अंगों को निष्क्रिय कर दिया है. जेल में उनके साथ जो क्रूर व्यवहार किया गया, उसकी खबरें उनकी पत्नी के द्वारा लगातार बाहर आती रहीं लेकिन सिस्टम को उससे कोई फर्क नहीं पड़ा. उनके एक आदिवासी सह अभियुक्त पांडू नरोटे की भी जेल में ही मृत्यु हो गई.

कांग्रेस सरकार ने 90% विकलांग प्रोफेसर साईबाबा को जेल में ठूंसा, फर्जी मुकदमे बनाए और भाजपा सरकार ने उनसे उनका जीवन ही छीन लिया. साईबाबा की मौत दरअसल राज्य और उसके तमाम संस्थाओं द्वारा सुनियोजित ढंग से की गई उनकी हत्या है, ठीक वैसे ही जैसे फादर स्टेन स्वामी और पांडू नरोटे की संस्थानिक हत्या की गई.

साईबाबा के साथ इतनी क्रूरता क्यों की गई ? उनका अपराध क्या था ? उनका एक मात्र अपराध था शोषण-उत्पीड़न विहीन समतामूलक समाज का सपना देखने और उस सपने को पूरा करने के लिए वैज्ञानिक व क्रांतिकारी रास्ता बताने का अपराध. देश के विभिन्न आंदोलनों के बीच समन्वय व एकजुटता कायम करने का अपराध.

प्रो. साईबाबा की मौत कोई सामान्य मौत नहीं है, वो शहीद हुए हैं. ठीक वैसे ही जैसे देश के अन्य हिस्सों में क्रांतिकारी एक शोषण-उत्पीड़न विहीन समाज के निर्माण के लिए और जल-जंगल-जमीन की लूट के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो रहे हैं. शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाता. शहीद कभी नहीं मरते. वो जिंदा रहते हैं जनता के हृदय में, ठीक वैसे ही जैसे आज भगत सिंह जिंदा हैं. कॉमरेड जी. एन. साईबाबा को लाल सलाम !

Read Also –

गृहमंत्री अमित शाह के नाम साथी रितेश विद्यार्थी का खुला खत : ‘दमन की इन्तहां, प्रतिरोध की धार को और पैना कर देती है !’
जी. एन. साईंबाबा की रिहाई मसले पर हत्यारों-बलात्कारियों के संरक्षक सुप्रीम कोर्ट की साख दांव पर
जी. एन. साईंबाबा : गोलियथ के खिलाफ संघर्षरत डेविड
भारतीय जेल एक हत्या घर : पांडु नरेटी की संस्थानिक हत्या के खिलाफ एकजुट हो !
भाजपा अकेली इस देश की राजनीति तय कर रही है और लोगों को जेलों में डाल रही है 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

रतन टाटा के निधन पर दो शब्द

Next Post

देखिये इस जिद्दी शख्स को…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

देखिये इस जिद्दी शख्स को...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मूल्यों के मरने पर जनमती हैं मूर्तियां

April 13, 2022

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के प्रति बाइडेन प्रशासन की नीति – एंटनी जे. ब्लिंकन, विदेश मंत्री, अमेरिका

March 5, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.