Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

माओवादियों के खिलाफ भाजपा का नया नौटंकी – ‘केंजा नक्सली-मनवा माटा’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 21, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
माओवादियों के खिलाफ भाजपा का नया नौटंकी - 'केंजा नक्सली-मनवा माटा'
माओवादियों के खिलाफ भाजपा का नया नौटंकी – ‘केंजा नक्सली-मनवा माटा’

भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया था कि वह ’31 मार्च, 2026 तक देश से माओवादी खत्म कर देंगे.’ उसने यह घोषणा छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित इलाकों में 1 लाख सैन्य बलों को झोंक कर आदिवासियों की हत्या और उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार करने के बाद अब एक नया नौटंकी शुरु कर दिया है. वह है – ‘केंजा नक्सली-मनवा माटा’ यानी, नक्सली हमारी बात सुनो.

तो आईये, समझते हैं छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार का यह नया शिगुफा है क्या. छत्तीसगढ़ के माओवादियों के जनताना सरकार के इलाके में मौजूद लगभग तमाम लोग शांतिपूर्वक रहते हैं और अपनी जिन्दगी की बेहतरी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, रोजगार हेतु जनताना सरकार की मदद से रहते हैं. जनताना सरकार के अधिकारी जनता के लिए बकायदा सड़कें, घर, स्कूलों, तलाबों आदि का निर्माण करती है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

वहीं, दूसरी ओर उसी समाज में कुछ ऐसे बदमाश तत्व भी होते हैं जो जनता के बीच तोड़फोड़ की कार्रवाई को अंजाम देते हैं. उनके द्वारा बनाये गये तंत्रों को भारतीय पुलिस की मदद से तहस-नहस करने की कोशिश करते हैं और मुखबिरी करते हैं. ऐसे तत्व महिलाओं के बलात्कार, सूदखोरी, धोखाधड़ी का अभियान चलाते हैं. यही कारण है कि ऐसे तत्वों के खिलाफ माओवादियों की जनताना सरकार का  ‘न्याय विभाग’ दंडात्मक कार्रवाई करती है.

ऐसे दंडित बदमाश तत्व अपना भेद खुलने या दंड मिलने के बाद प्रतिशोध में या पुलिसिया लालच में आकर जनताना सरकार के इलाके से भागकर पुलिस के संरक्षण में आ जाते हैं और फिर वह दो तरीकों से काम करते हैं. पहला तरीका वह यह अपनाता है कि वह पुलिस के साथ मिलकर हथियार लेकर माओवादियों की सैन्य टुकड़ियों (पीएलजीए) पर हमला करना शुरु करते हैं और भारत सरकार के सहयोग से हत्या, बलात्कार, फर्जी मुठभेड़, लुटपाट आदि जैसे घृणास्पद कार्य में जुट जाते हैं.

भारत सरकार ऐसे बदमाश तत्वों को खूब प्रोत्साहन देते हैं. अथाह दौलत और प्रतिष्ठा देते हैं. लंबे लंबे वायदे करते हैं. इन्हें कभी ‘सलवा जुडूम’ तो कभी ‘डीआरजी’ कहते हैं. लेकिन माओवादियों ने सलवा जुडूम को तो जड़ से ही साफ कर दिया और फिर अपनी इज्ज़त बचाने के लिए भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से उसे (सलवा जुडूम को) ‘प्रतिबंधित’ करने का नाटक किया. फिर उसने ‘डीआरजी’ का गठन किया. अब लगता है शुरुआती सफलता के बाद अब यह भी कारगर नहीं रहा.

ऐसे में, मोदी-शाह जैसे कपटियों ने एक नया तरीका निकाला, वह है माओवादियों के खिलाफ ऐसे बदमाश तत्वों को इकट्ठा कर माओवादियों और उसकी जनताना सरकार के खिलाफ दुश्प्रचार संगठित करना. ऐसे बदमाश तत्वों को भारत सरकार ‘नक्सल पीड़ित’ कहती है. ऐसे ही बदमाशों तत्वों को एकजुट कर छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिल्ली के जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन करवाया – ‘केंजा नक्सली-मनवा माटा’ यानी, नक्सली हमारी बात सुनो.

सवाल है नक्सली उनकी बात क्यों सुनेगा ? वह और वहां की रहने वाली जनता इनके काले कारतूतों से रग-रग परिचित है. भारत सरकार भी उसको अच्छी तरह जानती है. उसके अपराधों का पूरा लेखा-जोखा उसके पास होता है. चूंकि भारत सरकार खुद ही कॉरपोरेट घरानों और अपराधियों की सरकार है, जिसका एकमात्र काम जनता का शोषण कर कॉरपोरेट घरानों की सेवा करना है, इसलिए इन तत्वों की इनसे अच्छी जमती है और परस्पर सहयोग में रहता है.

चूंकि भाजपा की सरकार भले ही 31 मार्च, 2026 तक देश से माओवादियों को खत्म करने का दंभ भरती है, लेकिन भाजपा के मुख्यमंत्री ने जिस तरह दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘केंजा नक्सली-मनवा माटा’ का आयोजन किया है, वह साफ दिखाता है कि भाजपा समझ चुकी है कि वह हथियार के बल पर माओवादियों को खत्म नहीं कर सकती है, भले ही कुछ छिटपुट लोगों की हत्या कर लें.

माओवादियों से मार खाये इन बदमाशों ने जंतर-मंतर पर नक्सलवाद के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग की है. माओवादी हिंसा के कारण झेले गए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कष्टों को व्यक्त किया. उसने मगरमच्छी विलाप किया कि कैसे नक्सलियों की हिंसा ने उनके जीवन को प्रभावित किया और उनके गांवों में विकास की प्रक्रिया को बाधित कर दिया. ग्रामीणों ने सरकार से नक्सलवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और अपने क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की अपील की. साथ ही बस्तर में शांति बहाली, विकास कार्यों में तेजी लाने और सुरक्षा बलों की उचित तैनाती की मांग की.

इन प्रदर्शनकारी बदमाशों को अभी भी शोषण-दमनकारी इन भारत सरकार से ही उम्मीद है कि वह उसे संरक्षण और फौज दे ताकि वह अपनी बदमाशी फिर से जारी कर सके. जबकि इन्हें अपने अपराधों के लिए, बदमाशियों के लिए लोगों से माफी मांगना चाहिए और आइंदा से न करने का प्रण लेना चाहिए और सम्मान सहित अपने अपने घरों में लौट जाना चाहिए, न कि इस शोषण-दमनकारी भारत सरकार के तलबे चाटना चाहिए और अपने ही भाईयों का खून बहाने के मंसूबों को पालना चाहिए.

  • महेश सिंह

Read Also –

छत्तीसगढ़ में माओवाद : लोगों के न्याय के बिना शांति नहीं
छत्तीसगढ़ : आदिवासी क्षेत्र को बूटों से रौंदा जा रहा
छत्तीसगढ़ : पोटाली गांव में सुरक्षा बलों का आदिवासियों के खिलाफ तांडव
छत्तीसगढ़ः आदिवासियों के साथ फर्जी मुठभेड़ और बलात्कार का सरकारी अभियान

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

कामरेडस जोसेफ (दर्शन पाल) एवं संजीत (अर्जुन प्रसाद सिंह) भाकपा (माओवादी) से बर्खास्त

Next Post

काजल लता

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

काजल लता

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारत में क्यों असंभव है फ्रांस जैसी क्रांति ?

April 29, 2019

ऑपरेशन कगार : दंडकारण्य में क्रूर युद्ध का सबसे क्रूर चरण – क्रांतिकारी लेखक संघ

September 18, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.