Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

धुंध बहुत गहरी है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 10, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना

धुंध बहुत गहरी है. समझ में नहीं आ रहा कि नरेंद्र मोदी को तीसरी बार सत्ता में पहुंचने देने का विरोध कौन कर रहा और समर्थन कौन कर रहा. प्रत्यक्ष में बड़ी बड़ी बातें बोलेंगे, संविधान पर खतरे की संभावनाएं गिनाएंगे, डिक्टेटर राज आने का डर दिखाएंगे, उखाड़ फेंकने की मुनादी करेंगे, लेकिन भीतर ही भीतर करतब ऐसी करेंगे कि मोदी की राह आसान हो जाए.

अब, यह डर के कारण से हो, लोभ के कारण से हो या जिस भी कारण से हो, ऐसे नेता और ऐसे राजनीतिक दल जनता के लिए किसी डिक्टेटर या किसी विभाजक राजनीतिज्ञ से भी अधिक खतरनाक हैं. इन्होंने राजनीति के नैतिक पतन का नया आख्यान रचा है और आम मेहनतकश जनता की पीठ में छुरा भोंकने के बराबर का अपराध किया है.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

आम मेहनतकश जनता, नरेंद्र मोदी के अब तक का दस वर्षीय राज जनता के इस वर्ग के लिए अभिशाप के समान रहा है और आगे भी अगर मोदी राज कायम रहा तो इस वर्ग की और अधिक दुर्दशा ही होनी है. लेकिन, तब भी मोदी इस मेहनतकश अवाम की दुर्दशा के उतने जिम्मेवार नहीं होंगे जितने जिम्मेवार मोदी को परोक्ष और छद्म तरीके से समर्थन देने वाले होंगे.

एक दौर था, जब इंदिरा गांधी के खिलाफ विपक्ष के नेताओं का गठजोड़ सामने आया था. भले ही यह एकता सत्ता में आने के बाद जल्दी ही बिखर गई लेकिन इसने यह साबित किया कि अगर कोई शक्तिशाली सत्ताधीश लोगों के संवैधानिक अधिकारों से खिलवाड़ करेगा, राजनीतिक विरोधियों के दमन के लिए सत्ता का अनुचित प्रयोग करेगा तो भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में अंतर्निहित चेतना उसे उखाड़ फेंकने की शक्ति रखती है.

‘इंदिरा इज इंडिया एंड इंडिया इज इंदिरा’ राजनीतिक चारणों और चेले चपाटों के ऐसे बोल किस बियाबान में लुप्त हो गए, खुद मैडम भी समझ नहीं पाई और जैसा कि कई इतिहासकार बताते हैं, वे इतनी बड़ी चुनावी हार के बाद कुछ दिनों के लिए सदमे में चली गई थी.

तब के नेताओं में नैतिक शक्ति थी. तब मोरारजी थे, अटल थे, चंद्रशेखर थे, चरण सिंह थे, मधु लिमये थे, मधु दंडवते थे, मृणाल गोरे थी, जॉर्ज फर्नांडिस थे, कई अन्य थे…और, सबसे बढ़ कर जयप्रकाश नारायण का करिश्माई और प्रभावी नेतृत्व था. नेतृत्व की नैतिक आभा में जनता की राह आलोकित होती है, उसकी चेतना ज्योतिर्मयी होती है.

जनचेतना में सत्ता विरोध की लहर उठी. दमन को अपना हथियार और मनमानियों को अपना औजार बना चुकी सत्ता की प्राचीरें जन चेतना के प्रतिरोध को झेल नहीं सकी. तब, जबकि दक्षिण भारत में इंदिरा गांधी ने अच्छी खासी सीटें जीती थी, हिन्दी पट्टी के राज्यों ने उनकी नियति का फैसला कर दिया था.

आज वही हिंदी पट्टी मोदी की विभाजनकारी राजनीति का पैरोकार बना है. दो वक्त की रोटी के लिए और बच्चों की स्कूल फीस के लिए खून सुखाते मेहनतकश लोगों की चेतना ‘मोदी मोदी’ के प्रायोजित शोर में कहीं लुप्त सी हो गई लगती है और उनकी मुक्ति की बातें करने वाले विपक्ष के कई नेता, कई राजनीतिक दल अपने ही करतबों में लिप्त हैं. वे मोदी से अधिक जनविरोधी हैं.

भारतीय राजनीति का वर्तमान उनके नैतिक पतन का बोझ उठाते उठाते थक चुका है और भविष्य में इस बात का खतरा चारों ओर मंडराता दिख रहा है कि इनमें से कई लोग, कई दल चुनावी भाषणों में मोदी विरोध, संविधान की रक्षा, डिक्टेटर शिप के खतरे आदि की बातें करेंगे और अपनी मानसिक और राजनीतिक ऊर्जा मोदी को ही पुनः सत्तासीन करने में जाया करेंगे.

सब कुछ धुंधला धुंधला सा है. मीडिया जिम्मेवारी ले चुका है कि वह जनता तक सत्य को पहुंचने नहीं देगा. महज ऐसा ही होता तो गनीमत थी. बड़े बड़े चैनल, बड़े बड़े एंकर, एंकरानियां सुपारी लेकर तैयार हैं कि वे झूठ को इतना महिमा मंडित करेंगे कि वह सत्य की जगह लेकर आम लोगों का दिमाग खराब कर दे.

आज से कुछ दशकों के बाद जब भारत के आज के दौर की विसंगतियों को विश्लेषित किया जाएगा तो तीन अध्याय मुख्य होंगे, पहला, भारतीय शहरी मध्य वर्ग का मानसिक और नैतिक अंधकार, दूसरा, विपक्ष की राजनीति का नैतिक पतन और तीसरा, मीडिया की मुख्यधारा का जनता का शत्रु बन जाना.

नरेंद्र मोदी तो प्रतीक मात्र हैं. नवउदारवाद का भारतीय संस्करण अपनी ढाई तीन दशकों की यात्रा के बाद ऐसा ही राजनीतिक मंजर लाने वाला था. इस संस्करण ने राजनीति से उसकी नैतिकता को सोखना शुरू किया जिसका एक परिणाम कार्पोरेटशक्तियों की उंगलियों में राजनीति और आर्थिकी की डोर आने के रूप में सामने आया. सामूहिक हितों की जगह स्वार्थ और लोलुपता की दूषित मानसिकता में डूबता उतराता मध्यवर्गीय जनमानस बहुत कुछ खो और झेल कर भी मोदी मोदी की रट यूं ही नहीं लगाता. कॉर्पोरेट मीडिया यूं ही विध्वंसक और जहरीली भूमिका में नहीं आता.

जिसे ‘नियो लिबरल इकोनॉमी’ और इससे उत्पन्न ‘नियो लिबरल पॉलिटिक्स’ कहते हैं, वह यूरोप और अमेरिका जैसे संपन्न और पढ़े लिखे समाज में अपनी जो छाप छोड़ता रहा, भारत में उसके बहुत आगे जाकर अपने अमानुषिक रूप में सामने आया. इस रूप को भारतीय राजनीतिक फलक पर ऐसे ही सामने आना था.

Read Also –

आरएसएस-मोदी की महानतम उपलब्धि है – अविवेकवाद
2002 के नरसंहार के दोषियों को फांसी पर नहीं चढ़ा पाने की कांग्रेस की व्यर्थता का ख़ामियाज़ा देश दशकों तक भोगेगा 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

अंबानी के कलर्स पर कांग्रेस के विज्ञापनों की बाढ़ आई है, क्यों ?

Next Post

प्रेम, भाईचारे और समानता vs नल्लों की फ़ौज…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

प्रेम, भाईचारे और समानता vs नल्लों की फ़ौज...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

चुनाव नतीजों ने तानाशाही की ओर प्रवृत्त मोदी के चेहरे पर एक झन्नाटेदार तमाचा जड़ा है

December 4, 2024
“बिन ईवीएम सब सून !”

“बिन ईवीएम सब सून !”

May 23, 2017

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.