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संयुक्त किसान मोर्चा : जीत से कम कुछ भी नहीं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 27, 2021
in ब्लॉग
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संयुक्त किसान मोर्चा हर रोज अपने लड़ाई की धार को मजबूती दे रही है. इसी क्रम में वह हर रोज अपनी ओर से प्रेस ब्यान भी जारी करता है. यहां हम संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी प्रेस नोट को यहां दे रहे हैं, जो बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा (कक्का जी), युद्धवीर सिंह के हस्ताक्षर से जारी किया गया है.

लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में सरकार द्वारा लीपापोती की कोशिश

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड की जांच कर रहे विशेष जांच दल का नेतृत्व कर रहे डीआईजी उपेंद्र कुमार अग्रवाल का तबादला कर दिया गया है. कथित तौर पर यूपी सरकार ने यह स्पष्टीकरण दिया है कि स्थानांतरण के बावजूद वह एसआईटी के प्रमुख बने रहेंगे, भले ही पिछले सुनवाई में ‘अपने पैर खींचने’ के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई थी, यूपी सरकार द्वारा यह असामान्य और अप्रत्याशित कदम उठाया गया है.

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संयुक्त किसान मोर्चा एक बार फिर मांग करता है कि न्याय से पूरी तरह समझौता होने से पहले जांच की निगरानी सीधे सुप्रीम कोर्ट द्वारा की जानी चाहिए. अस्वीकार्य हितों का टकराव बिल्कुल स्पष्ट है और संयुक्त किसान मोर्चा राज्य मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी के लिए अपने विरोध को तेज करना जारी रखेगा.

तेज होता आन्दोलन

मध्य प्रदेश के सतना जिले में रैगांव विधानसभा उपचुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दो दिवसीय प्रचार यात्रा पर गए थे. गुस्साए किसान सिविल लाइंस जंकशन पर काले झंडों के साथ जमा हो गए और नारे लगाने लगे और उन्हें वापस जाने के लिए कहा. तोमर को पहले भी अपने गृह राज्य और अपने निर्वाचन क्षेत्र में किसान आंदोलन से जुड़े किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा था.

इस बीच हरियाणा के फतेहाबाद में रतिया रोड स्थित टोहाना में जजपा नेता निशान सिंह के खिलाफ काले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन किया गया. किसानों ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला और विधायक देवेंद्र बबली के खिलाफ भी नारेबाजी की. इस घटना में जजपा नेता को बिना अपनी कार के ही कार्यक्रम से लौटना पड़ा.

25 अक्टूबर 2021 को रेवाड़ी जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने अपने कटे हुए बाजरा को कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के आवास पर ले जाने और उसके लिए एमएसपी की मांग करने की योजना बनाई है जबकि सरकार ने ₹2250 रुपये के एमएसपी की घोषणा की है, खुले बाजार में किसानों को अधिकतम लगभग ₹1300 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल पा रहा है. किसानों ने कहा है कि भाजपा सरकार के बार-बार यह दावा करने के बावजूद कि ‘एमएसपी थी, है और रहेगी’, रेवाड़ी मंडी में, उन्हें एमएसपी नहीं मिल रहा है और इसलिए, वे इस उपाय का सहारा लेंगे.

ऐतिहासिक किसान आंदोलन 26 अक्टूबर को श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एक लापरवाह, कॉर्पोरेट-समर्थक सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के ग्यारह महीने पूरे करने जा रहा है. संघर्ष को तेज करने और अधिक से अधिक किसानों को लामबंद करने के लिए पूरे देश में विभिन्न प्रकार के विरोध और प्रतिरोध अपनाए जा रहे हैं.

नागराज का असाधारण पदयात्रा

कर्नाटक का एक असाधारण 39 वर्षीय नागरिक नागराज कलकुटागर, पूर्व तकनीकी विशेषज्ञ युवा ने 11 फरवरी 2021 को कर्नाटक के एमएम हिल्स से दिल्ली के मोर्चों के लिए पदयात्रा शुरु की थी. 4350 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद आज अपने पदयात्रा के 163वें दिन में है. वह मांग कर रहे हैं कि भारत सरकार किसान आंदोलन की मांगों को पूरा करे. आज वह मध्य प्रदेश के धार जिले के खलघाट पहुंचे है.

वे अपनी पदयात्रा महाराष्ट्र में धुले और शिरपुर को कवर करने के बाद मध्य प्रदेश में प्रवेश किया और सेंधवा, जुलवानिया और ठिकरी पहुंचे. वह राजस्थान में प्रवेश करने से पहले इंदौर, देवास, सारंगपुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर और मुरैना से गुजरेंगे और फिर अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश और हरियाणा जाएंगे. संयुक्त किसान मोर्चा नागराज की बहादुरी और समर्पण की भावना को सलाम करता है.

बिहार में किसान संगठनों और समर्थकों ने रोहतास से खेती बचाओ किसान स्वाभिमान यात्रा शुरू की. यात्रा का ‘रथ’ बिहार के विभिन्न जिलों जैसे बक्सर, जहानाबाद, आरा, अरवल, गया, नवादा, नालंदा आदि से होकर गुजरेगा और तीन किसान विरोधी कानूनों, एमएसपी कानूनी गारंटी की आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करेगा. इस तरह वर्तमान आंदोलन को मजबूत करने के लिए अधिक से अधिक किसानों को लामबंद करेगी.

देश भर में शहीद किसान अस्थि कलश यात्रा

शहीद किसान अस्थि कलश यात्रा कई स्थानों पर जारी है, और आंदोलन को और अधिक ताकत और यह सुनिश्चित करने का संकल्प दे रही है कि किसान-शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. ऐसी ही एक यात्रा आज चेन्नई में शुरू हुई, जो चेन्नई से पून्नामल्ले और कांचीपुरम जाएगी.

अपने 4 दिवसीय कार्यक्रम में, यह यात्रा तमिलनाडु के डिंडीवनम, विल्लुपुरम, सलेम, नमक्कल, करूर, डिंडीगुल, विरुधुनगर, शिवगंगई, मदुरै, तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, तिरुवरूर और नागापट्टिनम जिलों को कवर करेगी, जिसके बाद अस्थियों को वेदारण्यम में बंगाल की खाड़ी में विसर्जित किया जाएगा.

ओडिशा में भी ऐसी कलश यात्रा शुरू हुई. एक और अस्थि कलश यात्रा आज हरियाणा के ऐलनाबाद के 16 गांवों से होकर गुजर रही है. एक अन्य यात्रा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से होकर जा रही है और 25 तारीख को समाप्त होगी. यूपी के संत कबीर नगर जिले और देवरिया जिले में भी यात्राएं चल रही हैं.

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से अस्थि कलश यात्रा निकाली गई, जो 18 अक्टूबर को मझोला से शुरू हुई थी. यह यात्रा उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर की खटीमा और नानकमत्ता से होकर जा रही है, इनमें से एक यात्रा चंडीगढ़ के आसपास के गांवों से होकर जा रही है. एक यात्रा पंजाब के हुसैनीवाला पहुंची जिसके बाद अस्थियों को सतलुज नहर में विसर्जित कर दिया गया.

इन यात्राओं ने, वे जहां भी गए हैं, शहरी नागरिकों को भी श्रद्धापूर्वक आकर्षित किया है, और लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में न्याय की मांग और मजबूत होती जा रही है. इस बीच, पंजाब सरकार ने लखीमपुर खीरी नरसंहार के पांच शहीदों के परिजनों को पचास लाख रुपये के चेक जारी कर दिए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है. COP26 जलवायु सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री के ग्लासगो यात्रा के दौरान भारतीय प्रवासी और अन्य किसान आंदोलन के समर्थन और एकजुटता में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए एक साथ आ रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में एक 58 वर्षीय किसान की खाद की दुकान के बाहर कतार में खड़े-खड़े मृत्यु हो जाने खबर आ रही है, जहां वह पिछले दो दिनों से कुछ उर्वरक खरीदने की कोशिश कर रहा था. देश भर में विरोध, पुलिस लाठीचार्ज और उर्वरक की कमी की रिपोर्ट जारी है, और एसकेएम की मांग है कि आपूर्ति को तुरंत सुचारू और विनियमित किया जाए.

तोमर की नीचता पर संयुक्त किसान मोर्चा की चेतावनी

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने मध्य प्रदेश के सतना में, जहां उन्हें स्थानीय किसानों द्वारा काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा, कहा कि किसान आंदोलन को कुछ संगठनो द्वारा छोड़ दिया गया है और यह जल्द ही समाप्त हो जाएगा. मंत्री की यह इच्छा ठीक उसी रणनीति का हिस्सा है जो मोदी सरकार द्वारा आंदोलन के संबंध में अपनाई जा रही है, जब 22 जनवरी 2021 के बाद से औपचारिक वार्ता बंद की गई थी.

संयुक्त किसान मोर्चा सरकार को चेतावनी देना चाहता है कि वह खुद जोखिम उठाकर इस सोच पर विश्वास करे. दिल्ली की सरहदों पर 11 महीने पूरे करने के कगार पर किसानों का आंदोलन पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और व्यापक हुआ है. संयुक्त किसान मोर्चा ने मंत्री और मोदी सरकार के अन्य नेताओं को चेतावनी दी है कि उनका आत्मसंतोष उन्हें ही नुकसान करेगा. लोकतंत्र में कोई भी चुनी हुई सरकार सबसे अधिक संख्या वाले किसानों- श्रमिकों और नागरिकों की एकजुट आवाज और मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकती है, खासकर तब जबकि मांगें सही हों और आजीविका को हो रही अपूर्णीय क्षति के सबूत पर आधारित हों.

करनाल हिंसा के अभियुक्त आयुष सिन्हा को बचाने की कोशिश में आयोग

हरियाणा के अधिकारी आयुष सिन्हा का वायरल वीडियो, जिसमें उन्हें मुख्यमंत्री की करनाल यात्रा के विरोध कर रहे किसानों के सिर तोड़ने के लिए पुलिस को निर्देश देते हुए सुना गया था, ने पूरे देश को शर्मसार और झकझोर कर रख दिया था. उस दिन बस्तर टोल प्लाजा पर पुलिस द्वारा किए गए क्रूर लाठीचार्ज के बाद एक किसान सुशील काजल बुरी तरह घायल हो गए और बाद में शहीद हो गए.

राज्य सरकार द्वारा की गई करनाल हिंसा में, न्याय के लिए, और आयुष सिन्हा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए, किसानों द्वारा शुरू किए गए तीव्र आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन अग्रवाल की अध्यक्षता में एक व्यक्ति न्यायिक आयोग का गठन किया था. आयोग ने अब 3 महीने और समय सीमा बढ़ाने की मांग की है.

आयोग ने गवाहों को सुनना भी शुरू नहीं किया है, और तो और, उसने आयुष सिन्हा के पुलिस को हिंसक निर्देशों का वीडियो भी नहीं देखा है, जो राज्य सरकार के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के समर्थन के साथ दिया गया था. हिंसक लाठीचार्ज, आयुष सिन्हा के बयानों और पुलिस हिंसा की जांच के लिए किसानों द्वारा मांगे गए न्याय की प्रतिक्रिया के रूप में जो शुरू हुआ था, उसे अब बदल दिया गया है, जहां आयोग अब अन्य मुद्दों पर विचार कर रहा है जैसे कि किसानों का विरोध कैसे शुरू हुआ आदि.

यह स्पष्ट है कि हरियाणा सरकार न्यायमूर्ति एसएन अग्रवाल आयोग को करनाल कांड में किसानों को न्याय दिलाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी हेराफेरी का हथियार बनाने की इच्छुक है. संयुक्त किसान मोर्चा इसकी निंदा करता है और मांग करता है कि आयोग इस बात पर ध्यान केंद्रित करे कि पुलिस हिंसा और तत्कालीन एसडीएम के निर्देशों पर ध्यान देने के लिए क्या सहमति हुई थी ? आयोग निर्धारित समय में अपना काम पूरा करे और आयुष सिन्हा निलंबित रहें.

हरियाणा के भिवानी में राज्य मंत्री जेपी दलाल को किसानों के आक्रोश और काले झंडे के विरोध का सामना करना पड़ा. 50 से अधिक किसानों को हिरासत में लिया गया है. संयुक्त किसान मोर्चा उनकी तत्काल बिना शर्त रिहाई की मांग करता है.

इस बीच, हरियाणा प्रशासन ने ऐलनाबाद में दो अलग-अलग प्राथमिकी में 200 से अधिक किसानों पर मामले दर्ज किए हैं, जब किसान हरियाणा भाजपा और जजपा के मंत्रियों और नेताओं, जो अपने उम्मीदवारों का प्रचार कर रहे थे, का खिलाफ विरोध किया था. इन भाजपा और जजपा नेताओं को प्रचार के लिए निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान किसानों द्वारा काले झंडे दिखाए गए.

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