Thursday, August 20, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हां मैं अयोध्या जाऊंगा…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 24, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अगर मुझे किसी मंदिर से और किसी वेश्यालय से एक साथ निमंत्रण मिले तो मैं वेश्यालय जाना पसंद करूंगा, क्योंकि वहां पर मुझे हाड़ मांस का एक पुतला तो मिलेगा, कोई पत्थर का बुत नहीं. मैं उस समय सबसे ज़्यादा संतुष्ट महसूस करता हूं जब मैं समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति या समूह के संसर्ग में रहता हूं –

  • हो सकता है कि उसका बदन पसीने की दुर्गंध में डूबा हुआ हो !
  • हो सकता है कि उसकी ज़ुबान मेरी जैसी नहीं हो !
  • हो सकता है कि उसके पास घर जैसी कोई चीज़ नहीं हो !
  • हो सकता है कि उसके पास कोई ज़रिया ए माश नहीं हो !
  • हो सकता है कि वह जीने के लिए महज़ इत्तेफाक या कुदरत के रहमोकरम पर निर्भर हो !
  • हो सकता है कि वह सांस लेने भर को ज़िंदा रहना समझता हो !

क्या वह आदमी की हमारी परिभाषा में फ़िट नहीं बैठता है ? अब तुम ख़ुद को एक परिस्थिति में सोच कर देखो. फ़र्ज़ करो कि तुम एक सर्द, अंधेरी रात में एक छोटे से स्टेशन पर उतर आए हो. वहां से तुम्हें एक शहर जाना है नई नौकरी ज्वॉयन करने के लिए, लेकिन पहली बस सुबह को मिलेगी.

You might also like

भागलपुर, विशेष केन्द्रीय कारा (तृतीय खण्ड) में बंद एक प्रशासनिक बन्दी प्रमोद मिश्रा का पत्र

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

तुम स्टेशन से बाहर आते हो और बाहर तुम्हें कुछ लोग अलाव को घेर कर बैठे हुए दिख जाते हैं. कड़ाके की ठंड है और तुम्हारे पास इंतज़ार करने के सिवा और कोई चारा नहीं है. अलाव को घेरे हुए लोगों को देख कर तुम्हें एक प्रागैतिहासिक युग याद आता है, जब आग का आविष्कार हुआ था.

तुम्हें याद आता है किस तरह से प्रागैतिहासिक काल का मानव जंगली जानवरों और ठंढ से बचने के लिए आग या अलाव के इर्द-गिर्द गोल घेरा बनाकर रात गुज़ार देते थे. इस रात तुम्हारे लिए बस दो ही रास्ते हैं – या तो तुम उन जंगली जानवरों में से एक जैसा दूर, अलग थलग खड़े हो कर आग के बुझने का इंतज़ार करो आदमी पर हमला करने के लिए, या अलाव के चारों तरफ़ बैठे लोगों में शामिल हो जाओ.

तुम्हारी इगो तुम्हें जानवर बना देगी और तुम्हारी मानवता तुम्हें उस भीड़ में शामिल कर देगी जो, छोटी ही सही, लेकिन आग के इर्द-गिर्द इकट्ठी हुई है. बस यही एक पल निर्णय का है ! यही एक पल है अपनी संवेदनाओं के सामने समर्पण का या अपने अहंकार के हाथों क़ैद होने का.

तुम्हें फ़ैसला करना है कि तुम्हें कुली कबाड़ियों के साथ जाकर बैठना है या अपने सूट की गर्मी में खुद को समेट लेना है ? यही एक पल तुम्हें आदमी से जानवर बना सकता है और उसके उलट भी. सोचो कि मेरे पहले वाक्य का अर्थ क्या है. जीवन हर हाल में मृत्यु से बेहतर है, बशर्ते कि तुम जीवन का सही अर्थ समझते हो.

हां मैं अयोध्या जाऊंगा
पहले भी गया था और
सैकड़ों मंदिरों
तंग गलियों
सूने मस्जिद
और सरयू के तट को
छू कर लौट आया था

हां मैं अयोध्या जाऊँगा
जैसे मैंने देखा है मीनाक्षी मंदिर
विश्वनाथ मंदिर
पुरी मंदिर
सूर्य मंदिर
और सैकड़ों ऐसे मंदिर
जिनके दरों दीवारों पर
लिखी हुई है
चोल, विजयनगर और उत्कल
सरीखे अनगिनत साम्राज्यों की
अमिट कहानी

मैं भारत के सबसे पुराने गिर्जा घरों में भी गया हूं
और सबसे पुरानी मस्जिदों में भी गया हूं

मैंने धनपशुओं द्वारा बनाए गए
बिड़ला मंदिर और स्वामीनारायण के
लोटस मंदिर भी देखा है

चारों धाम देखा है

लेकिन जो शांति मुझे
बचपन में देखे गए
उस खंडहर नुमा शिवाले में मिली
सच कहूं तो
और कहीं आज तक नहीं मिली

मैं अक्सर उसकी टूटी फूटी
सीढ़ियों पर बैठ कर
गांव की किसी महिला को
घी का दीपक जलाते हुए
पुजारी की भूमिका में
ढलते हुए चुपचाप देखता था

मुझे शिवलिंग में तो एक
तराशे हुए पत्थर से ज़्यादा
कुछ नहीं दिखता था लेकिन
उस स्त्री के चेहरे को
उस छोटे से दीपक की लौ
एक अद्भुत आवेग पूर्ण सौंदर्य से
भर देती थी
और मैं अवाक हो कर देखता था
एक स्वच्छ नदी को
रोशनी में नहाए हुए

हां मैं अयोध्या जाऊंगा
और इस बार
ज़मींदोज़ मस्जिद में जाऊंगा

मैं उन खूंरेज़ हाथों को याद करूंगा
और खंडहर में बैठे सोचूंगा कि
क्या फ़र्क़ है मीर बकी में और उन लोगों में
अगर ये सच भी है कि मीर बकी ने
एक मंदिर की क़ीमत पर
एक मस्जिद बनाई थी

मैं पांच सौ साठ साल पीछे चला जाऊंगा
और इक्कीस वीं सदी और
सोलहवीं सदी के बीच के
पुल को ढूंढ लूंगा

अपने सुनहरे वर्क को पलटते हुए
सरयू जब रात के अंधेरे में खो जाएगी
तब भी मैं उसके किनारे खड़े हो कर
दृश्य तीत ध्वनि के माध्यम से
इतिहास की करवटों को
लिपि बद्ध करने की कोशिश करूंगा

हां मैं अयोध्या जाऊंगा
किसी इतिहास को बनते हुए देखने के लिए नहीं
वरन मिटते हुए देखने जाऊंगा

हां मैं अयोध्या जाऊंगा
और आदमी के शरीर पर
फिर से उग आए पूंछ की
तस्वीर ले कर लौटूंगा

हां मैं अयोध्या जाऊंगा

Read Also –
[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

बिहार की शान पटना संग्रहालय (म्यूजियम) तथा अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए आगे आएं !

Next Post

जवाहर का खून, उनकी रगों में अपना रंग दिखा रहा है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

भागलपुर, विशेष केन्द्रीय कारा (तृतीय खण्ड) में बंद एक प्रशासनिक बन्दी प्रमोद मिश्रा का पत्र

by ROHIT SHARMA
August 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

by ROHIT SHARMA
July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

by ROHIT SHARMA
August 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
Next Post

जवाहर का खून, उनकी रगों में अपना रंग दिखा रहा है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मासूमों की हिफाजत के लिए

October 27, 2020

भारत का वैज्ञानिक और दार्शनिक इतिहास : उत्थान और विनाश

September 22, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

भागलपुर, विशेष केन्द्रीय कारा (तृतीय खण्ड) में बंद एक प्रशासनिक बन्दी प्रमोद मिश्रा का पत्र

August 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

August 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भागलपुर, विशेष केन्द्रीय कारा (तृतीय खण्ड) में बंद एक प्रशासनिक बन्दी प्रमोद मिश्रा का पत्र

August 7, 2026

विश्व सर्वहारा क्रांति के दो नये गद्दार : विश्व विजय और सीमा

July 27, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.