Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कश्मीर पर मोदी गैंग की नीति

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 26, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत को किसी भी सूरत में पाकिस्तान से अमन-चैन बनाकर रखना ही होगा, वरना तालिबान के ट्रम्प कार्ड का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ भी हो सकता है. कौन नहीं जानता कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम अमेरिका ने करवाया था. अमेरिका ने भारत से जल्द कश्मीर में हालात सुधारने को कहा है. अब मोदी सरकार को यह काम वाकई करना होगा. कल तक बागी कहे गए गुपकार गैंग से मोदी की मुलाकात ने यह साफ़ कर दिया है.

कश्मीर पर मोदी गैंग की नीति

ये दो तस्वीरें बताती हैं कि नरेंद्र मोदी कश्मीर को लेकर किस कदर दबाव में हैं. इनमें से बहुत से नेता महीनों तक नज़रबंद रहे, आज मोदी इनसे आंख मिला रहे, यह कोई रातों-रात हुआ चमत्कार नहीं है. बीच में गवर्नर मनोज सिन्हा हैं, जो केंद्र के इशारे पर बाबुओं से राज चला रहे हैं. अमित शाह का सिर झुका हुआ है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

दक्षिण एशिया मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश सचिन डीन थॉम्पसन ने इसी महीने अमेरिकी संसद को बताया था कि अमेरिका ने भारत से जल्द कश्मीर में हालात सुधारने को कहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन कश्मीर में मानवाधिकारों की बहाली को लेकर बहुत गंभीर हैं. अमेरिका खुद अफ़ग़ानिस्तान से लौट रहा है और इसीलिए वह भारत और पाकिस्तान के बीच अमन-चैन चाहता है. याद रखें अनुच्छेद 370 और 35A का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में है.

महबूबा मुफ़्ती ने कुछ दिनों पहले जब कहा था कि भारत अगर तालिबान से बात कर सकता है तो कश्मीर पर पाकिस्तान से क्यों नहीं ? उनके बयान के बाद महबूबा को गोदी मीडिया और गोबरपट्टी के दलाल पत्रकारों, भक्तों ने जमकर ट्रोल किया था. अब मोदी सरकार को यह काम वाकई करना होगा. कल तक बागी कहे गए गुपकार गैंग से मोदी की मुलाकात ने यह साफ़ कर दिया है.

लेकिन यही दलाल पत्रकार यह भूल जाते हैं कि अमित शाह ने 5 अगस्त को कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाने की घोषणा करते समय POK और अक्साई चिन को भारत में मिलाने का संकल्प जताया था. क्या हुआ ? क्या कश्मीर में आतंकवाद ख़त्म हो गया ? क्या क्वाड में भारत के शामिल होने से चीन को कोई फ़र्क़ पड़ा ?

आज अमेरिका उसी तालिबान से हारकर वापस लौट रहा है, जिसके ख़िलाफ़ उसने सबसे लंबी लड़ाई लड़ी. ये वही मुजाहिदीन हैं, जिन्होंने रूस को मार भगाया था. अफ़ग़ानिस्तान को अभी किसके हवाले किया जाएगा ? वहां की कमज़ोर सरकार के हवाले ?

नहीं. अगर अमेरिका को हार मिली है तो पाकिस्तान को जीत हासिल हुई है. तालिबान को पाकिस्तान, चीन, सऊदी अरब और पहले अमेरिका से भी मदद मिली. पाकिस्तान लगातार अमेरिका को तालिबान के मामले में डबल क्रॉस करता रहा और कोई कुछ नहीं कर पाया.

अभी बाइडेन को यह दिखाना है कि वे अफ़ग़ानिस्तान को महफूज़ हाथों में सौंपकर जा रहे हैं लेकिन सत्ता परोक्ष रूप से पाकिस्तान के हाथ रहेगी. अफ़ग़ान शांति वार्ता में दिलचस्पी न दिखाकर मोदी सरकार ने बड़ी भूल की है. इस बारे में मैंने पहले ही आगाह किया था.

हालात यह हैं कि भारत को किसी भी सूरत में पाकिस्तान से अमन-चैन बनाकर रखना ही होगा, वरना तालिबान के ट्रम्प कार्ड का इस्तेमाल भारत के ख़िलाफ़ भी हो सकता है. फिर अमित शाह के अखंड भारत के संकल्प का क्या होगा ? दलाल मीडिया इस पर अब बात नहीं कर रहा है.

क्वाड में घुसकर भारत ने अपनी संप्रभुता को कम किया है. उसके हाथ बंधे हैं और पकड़ कसती जा रही है. उसे पूर्व ही नहीं, पश्चिम को भी संभालना ही होगा, जहां तालिबान भी है और पाकिस्तान भी. कौन नहीं जानता कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम अमेरिका ने करवाया था. मोदी को तो सिर हिलाना था.

अब कश्मीर में परिसीमन तलवार की धार पर चलने जैसा है. यह भी न भूलें कि यह जबरदस्ती हो रहा है. कश्मीर की अवाम पर इसे थोपा गया है. ईरान में इब्राहिम रईसी को खुमैनी का उत्तराधिकारी माना जा रहा है. अगर ईरान-अमेरिका का परमाणु समझौता हुआ तो पश्चिम एशिया में तनाव घटेगा, तेल बहेगा.

गलवान के बाद मोदी के लिए भी चीन और पाकिस्तान के दो मोर्चों पर लड़ना मुनासिब नहीं है इसलिए पिछली बातों, जुमलों, बयानों और दलाल मीडिया के पत्तलकारों की ज़ुबां को भूल जाएं. फिर भी, ग़लतियों की कीमत तो चुकानी ही पड़ती है. देखना है कि एक मजबूर देश इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकाता है ?

  • सौमित्र राय

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

युगांडा में ‘नरबली’ प्रथा के खिलाफ कानून पारित

Next Post

कांग्रेस की गलती और भाजपा का सुधार

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

कांग्रेस की गलती और भाजपा का सुधार

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आखिरी वजूद पर सिमटता यूक्रेन : यूक्रेनी सेना का रूसी क्षेत्र कुर्स्क पर कब्जे का सच और जेलेंस्की का युद्ध बिजनेस

August 29, 2024

राजनीति और पत्रकारिता में भाषा की नैतिकता के सारे नियम ध्वस्त

February 19, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.