Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

गढ़चिरौली मुठभेड़ पर उठते सवाल

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 3, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

गढ़चिरौली मुठभेड़ पर उठते सवाल

गढ़चिरौली मुठभेड़ पर उठते सवालों के बीच खबर आ रही है कि पुलिस ने जिन लोगों को माओवादी बताकर मार गिराने का दावा किया था उनमें से ज्यादातर निहत्थे और निर्दोष ग्रामीण हैं, जो कंससुर गांव के शादी में गए हुए थे, उन्हें सुरक्षा बल के जवानों ने सिर्फ नक्सली होने की आशंका के नाम पर गोलियों से भून डाला.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बोरिया अथवा कंससुर के जंगल में इन्द्रावती नदी के तट पर हुए कथित मुठभेड़ के पास में स्थित गट्टेपल्ली गाँव के 8 नौजवान युवक-युवतियां गाँव से लापता हैं, जिसमें 5 लड़की अथवा 3 लड़के हैं, ग्रामीण सूत्रों की मानें तो ये पास के गांव कंससुर शादी में गए थे. पास में पुलिस की गोली-बारी होने तथा उनके गांव में मौजूद नहीं होने की खबर जब ग्रामीणों को मिली तब वो लोग सक्रिय हो गए. उनका एक समूह मंगलवार को युवक-युवतियों के बारे में पूछताछ करने के लिए थाने पहुंचा, जहां से पुलिस ने उन्हें पुलिस मुख्यालय भेज दिया.

पुलिस के आला अफसरों ने ग्रामीणों अथवा उनके परिजनों से ओरिजनल आधार कार्ड अथवा पासपोर्ट साईंज का फोटो लाने के लिए कहा. ग्रामीणों ने जब आधार कार्ड की मूल प्रति पुलिस को उपलब्ध कराई तो उन्हें कुछ शवों की शिनाख्त करने के लिए कहा गया, लेकिन परिजन शव की शिनाख्त नहीं कर पाए क्योंकि पानी में काफी देर शवों रहने के कारण उनकी त्वचा पूरी तरह निकल चुकी थी. आज ग्रामीण जिला पुलिस मुख्यालय गढ़चिरौली में मौजूद हैं, जहां पुलिस डीएनए परीक्षण के बाद शव सौंपे जाने की बात कह रही है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

ग्रामीण अथवा परिजन मान रहे हैं कि सुबह जब युवक-युवतियां शादी से लौट रहे थे तभी पुलिस ने उन्हें मार दिया है.

गट्टेपल्ली के लोग जो शादी में जाने के बाद घर लौट नहीं पाए उनके नाम हैं:

1. मंगेश बुकलु आत्राम

2. रासो पोछा मंडावी

3. अंकित देवू गावड़े

4. बुज्जी उसेंडी

5. इरपा मंडावी

6. मंगेश चुन्डू मंडावी

7. रासो मंडावी

8. नुसे पेदु मंडावी

आप को बता दें 8 लोगों में से मंगेश चुंडू मंडावी जो कि भामरागढ़ में 11 का छात्र है, वो भी लापता है. बरहाल शव पानी मे रहने के कारण छत-विछत है और इन 8 युवक-युवतियों की पहचान नहीं हो सकी है.

अपना नाम न लिखे जाने की शर्त पर एक शख्स ने बताया कि सुरक्षा बलों का नक्सलियों से जरूर भिड़त हुआ था, नक्सली मारे भी गए हैं, लेकिन जो नक्सली भागने में कामयाब हुए वो सीधे जहां शादी हो रही थी, उधर ही चले गए. सुरक्षा बलों के जवानों ने शादी में शामिल लोगों पर नक्सली होने की आशंका में गोली चलानी शुरू कर दी, जिसमें कई बेगुनाह ग्रामीण भी मारे गए हैं. मीडिया में मुठभेड़ के बाद से ही नक्सलियों के टाप लीडर के मारे जाने की खबर परोस दी गई, जिससे पूरा मीडिया टॉप नक्सली लीडर के नाम जानने की होड़ में लगी रही. किसी ने ये नहीं पूछा कि कोई आदिवासी ग्रामीण भी मारा गया है ? इसी के चलते लाशों के मिलने का सिलसिला तीन दिन तक जारी रहा और पुलिस ने अब तक 39 शव बरामद कर लिए हैं.

सवाल यह है कि जब एक गाँव के 8 नौजवान युवक युवतियां शादी में गये थे और फिर वहीं पुलिस के गोली के शिकार हो गए तो आस-पास के अन्य गांव के लोग भी उस शादी में गए हुए रहे होंगे. इस कथित मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच की मांग क्रांतिकारी कवि वरवर राव समेत विभिन्न जन संगठन कर रहे हैं.

आप को बता दें बीते रविवार को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा में गढ़चिरौली जिले के कंससुर के जंगल में सी-कामंडो ने अपने दो दिन के नक्सल आपरेशन में 39 नक्सलियों को मारने का दावा किया था. खबरें आईं कि नक्सलियों के लगातार शव मिल रहे हैं जिसमें आधे से ज्यादा लाश इन्द्रावती नदी में तैरती मिली.

खबर यह भी है कि आस-पास के गांवों में दहशत का माहौल है, सुरक्षा बल के जवान गांव वालों को कह रहे हैं कि बाहर के व्यक्तियों को कुछ नहीं बताना. आस-पास के गांव वाले काफी डरे-सहमे हुए अपने लोगों की खोजबीन कर रहे हैं. वहीं एक अन्य जानकरी के अनुसार आस-पास के ग्रामीण युवक-युवतियां अब भी लापता हैं. सूत्रों के अनुसार बोरिया से तीन लड़कों को पुलिस उठा कर मुठभेड़ के एक दिन पहले ले गई थी जिसका अब तक पता नहीं है. मन्ने राजाराम गाँव से भी कुछ युवक लापता हैं.

जानकारी हो कि पुलिस जिस मुठभेड़ का दावा कर रही है उसमें मारे गए लोगों मे से किसी का भी माओवादी रिकॉर्ड अभी तक नहीं है. ऐसे में एक गहरी साजिश की बू आ रही है. कहीं पुलिस एक काल्पनिक कहानी गढ़कर उसे नक्सलवाद से जोड़ने में तो नहीं लगी है.

– तामेश्वर सिन्हा युवा और ऊर्जावान पत्रकार हैं और आजकल बस्तर में रहते हैं. तामेश्वर अपनी जमीनी रिपोर्टों के लिए जाने जाते हैं.

Read Also –
सरकारी पुलिसिया हमले का विकल्प ‘आजाद गांव’

Previous Post

नस्लीयराष्ट्रवाद : बहुदलीय संविधानवाद से एकदलीय सर्व-सत्तावाद की ओर

Next Post

सोशल मीडिया की जनवादी व्यापकता मुख्यधारा की मीडिया पर करारा तमाचा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

सोशल मीडिया की जनवादी व्यापकता मुख्यधारा की मीडिया पर करारा तमाचा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी सरकार ने सबसे ज़्यादा महिलाओं का ख़्याल रखा है !

March 11, 2023

खतरे में धर्म की इंडस्ट्री : राहत पैकेज की मांग

May 27, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.