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लोकतंत्र की नई परिभाषा को गढ़ती भाजपा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 6, 2017
in ब्लॉग
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शहडोल लोकसभा उपचुनाव के प्रचार में मध्यप्रदेश के खाद्यमंत्री ओमप्रकाश पूर्वे ने आदिवासी समुदाय को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘‘तुम शिवराज सिंह का नमक खाते हो, भाजपा को ही वोट करना. जो नमक का हक नहीं चुकाता, जानते हो उसे नमक हराम कहते हैं.’’ जिस सभा में राज्य खाद्य मंत्री ओम प्रकाश पूर्वे अपनी बेशर्म मूढ़ता का परिचय दे रहे थे, उस सभा में मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे. पूर्वे के इस बयान को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का स्पष्ट समर्थन हासिल था, क्योंकि मूर्खतापूर्ण और अपमानजनक बयान जारी करना शिवराज सिंह चौहान सहित पूरे भाजपा-आर एस एस की भी विशेषता है.

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व ही शिवराज सिंह चौहान ने अपनी मूढ़ता का शानदार उदारहण देश की जनता को देते हुए मध्यप्रदेश की सड़कों को अमेरिका की सड़कों के तुलना में शानदार बताया था.’’ अपनी मूढ़ता पर बजाय किसी लज्जा या शर्म के, अमेरिका से लौटकर आने के बाद अपने बयान की एक बार फिर तस्दीक कर दी और दुनिया भर में नाम कमाया. खून से लथपथ ब्यापम घोटाले के सूत्रधार शिवराज सिंह चैहान अपनी मूर्खता से देश भर को परिचित करते ही रहते हैं, जिसे भाजपा सहित देश के प्रधानमंत्री मोदी का भी समर्थन रहता है.

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विमर्श का महत्वपूर्ण सवाल शिवराज सिंह चौहान की मूर्खता पर विस्मय करना नहीं है, वरन् देश और दुनिया के इतिहास को उलटने और विज्ञान को सर के बल खड़ा करने का है. सत्ता पर जब मूर्खों और अपराधियों का आधिपत्य हो जाता है तो वह न केवल निर्लज्ज ही होता है वरन् वह खुद को ईश्वर से भी बड़ा मानने लगता है. उसे यूं लगता है मानो सारी दुनिया का निर्माण उसी ने और उसी के लिए हुआ है. यही कारण है कि देश में भाजपा के मूल एजेंडा राम मंदिर के निर्माण के बजाय मोदी का मंदिर बनाया जा रहा है. लोकतंत्र का मायने और मतलब बदला जा रहा है, जिसमें लोकतंत्र केवल उसके निजी स्वार्थ की सिद्धि और जनता पैर की जूती बन जाती है.

भरी सभा में आदिवासी समुदाय को सम्बोधित करते हुए पूर्वे का यह कहना कि ‘‘तुम’’ – आदिवासी जनता को यह भाजपाई मंत्री इसी तरह अपमानित शब्दों से सम्बोधित करते हैं – ‘‘शिवराज सिंह का नमक खाते हो’’, यह लोकतंत्र और खुद विज्ञान की भाजपाई समझ को ही दर्शाता है.

पूर्वे का निम्नस्तरीय अवैज्ञानिक समझ लोकतंत्र की बुनियादी अवधारणा को खण्डित करता है, जिसमें जनता को सर्वोपरि माना जाता है और शासन का अर्थ ‘‘जनता के द्वारा, जनता के लिए’’ निर्धारित किया जाता है. शासन के इस वास्तविक अर्थ को हासिल करने के लिए दुनिया भर में आम जनता के नेतृत्व में लड़ाईयां लड़ी गई. लाखों लोगों ने अपनी शहादतें दी और लोकतंत्र को स्थापित किया.

आज जब भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश माना जाता है तब शासन का अर्थ विशुद्ध सामंती मिजाज बल्कि दास-मालिक प्रथा की तरह मानना देश और दुनिया के शहीदों का अपमान करना है. यह हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानी के संघर्ष का मजाक उड़ाना है, और यह साबित करता है कि हमारा देश और इसके वासी आज एक बार फिर पश्चगमन करते हुए गुलामी के दौर में पहुंच गये हैं.

ये नये शासक भाजपा-आरएसएस की खाल मेें अंग्रेजी शासन के सबसे बड़े हितैषी बनकर उभरे हैं, जिसके खिलाफ सवाल खड़ा करना आज देश की बुनियादी लोकतांत्रिक आजादी को बचाना के लिए सबसे जरूरी है, वरना वक्त की आहट देश के इस संविधान को ही उलट देने और बुनियादी आजादी के भी छीन जाने का खतरा दिखा रहा है.

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Comments 3

  1. S. Chatterjee says:
    8 years ago

    यूं ही नहीं बनता है कोई शवराज.

    Reply
  2. Tejpratap Pandey says:
    8 years ago

    बेशर्म जालिमों की यही असली भाषा हैं।इन्हे मिटाना ही हमारी देशभक्ति और समाजिक जिम्मेदारी हैं।

    Reply
  3. Ratan Basu Mazumdar says:
    8 years ago

    That is dangerous for the citizens of this country. Sad

    Reply

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