Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

44 जवानों की हत्या के आड़ में फर्जी राष्ट्रवादियों की गुण्डागर्दी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 17, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सरकारी रेल, बसे रोकने और तोड़ने, प्राइवेट लोगों की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने और परेशान करने की जगह इनमें से किसी भी ब्रोकली वाले ने अम्बानी-अडानी के पाकिस्तानी व्यवसाय पर प्रश्न खड़ा न किया. एक ने भी एनएसए शौर्य डोभाल के घर में पाकिस्तानी और सऊदी काउंटर इंटेलिजेंस व जासूसों का व्यवसायी के रूप में घुसपैठ होने को प्रश्नगत न किया. इनके मकानों और प्रतिष्ठानों पर एक कंकड़ी तक न फेंकी.

भाजपा के नेताओं और मंत्रियों को जैसे नोटबन्दी का पहले से पता था वैसे ही हमले और शहीदों का भी पता था. नोटबन्दी से पहले रातों रात भाजपा कार्यालय भवन, ज़मीनें, मोटर साइकिलें खरीदी गई, भाजपा के कोषाध्यक्षों ने नोटबन्दी से बिल्कुल पहले रुपया जमा किया या बदलवाया वैसे ही शहीदों से संबंधित पोस्टर्स, बैनर, झंडे, विष्यकस्तु, भाषण, मंच रैलियां पहले से ही तैयार कैसे थे ?

सच्चिदानंद साक्षी किस शहीद की शवयात्रा में शव वाहन पर बैठ कर पोज़ देगा और राज्यवर्धन राठौर किस शव वाहन पर खड़े होकर मीडिया के रूबरू होंगे इसकी फिनिशिंग साबित कर रही है कि कार्यक्रम पहले से तय और स्क्रिप्टेड था, बस गरीब किसानों के निर्दोष बेटों की जान मुफ्त में कुर्बान करा ये ऊनी रोटियां सेंक रहे हैं.




वहीं दूसरी तरफ जो ब्रोकली वाले आज देश के विभिन्न राज्यों के शहरों में कश्मीरी बच्चों, छात्रों और लोगों को मारपीट रहे हैं, उन्हें वहां से भगा रहे हैं, उनसे लूटपाट कर रहे हैं जिसके कारण रक्षा विभाग को उनकी सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है. यही बहन के पकौड़े 1984 ई. में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में सिक्खों को मारने वाले, क़त्लेआम करने वाले, उन्हें लूटने वाले और गद्दार कहने वाले थे. इसी मानसिकता के लोगों ने तब सिक्खों के नरसंहार देशभक्ति की आड़ में ही किया था. सिक्ख इनके हुलिए, कपड़े, टीके, नारे, शारीरिक भाषा अच्छे से अध्ययन कर लें और अपने बुजुर्गों से टैब के हत्यारों के हुलिए पूछे. उन्हें इसमें एक कुटिल प्रकार की साम्यता मिलेगी.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

ये ब्रोकली के संघी मानसिकता वाले तब देश को तोड़ने की ऐसी कोशिश कांग्रेस के झंडे तले कर रहे थे और आज किस झंडे तले कर रहे हैं, आप खुद देख सकते हैं. ये कपड़े की दुकान से कपड़ा खरीद दर्ज़ी से पैसा खर्च कर पाकिस्तान का झंडा बनवाते हैं फिर प्रेस को बुला कर फ़ोटो खिंचवाते हुए उसे जलाते हैं. इनसे पूछा जाना चाहिए कि इससे पाकिस्तान का बाल भी टेढ़ा न होगा. ये इस शोक और गुस्से की घड़ी में भी अपनी राजनीति चमका रहे हैं.




क्या ट्विन्स टावर पर हमले के बाद अमरिकियों को पाकिस्तान, अफगानिस्तान का झंडा जलाते देखा था क्या ? या फिर अमेरिका ने लादेन का क्या हाल किया ? सरकारी रेल, बसे रोकने और तोड़ने, प्राइवेट लोगों की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने और परेशान करने की जगह इनमें से किसी भी ब्रोकली वाले ने अम्बानी-अडानी के पाकिस्तानी व्यवसाय पर प्रश्न खड़ा न किया. एक ने भी एनएसए शौर्य डोभाल के घर में पाकिस्तानी और सऊदी काउंटर इंटेलिजेंस व जासूसों का व्यवसायी के रूप में घुसपैठ होने को प्रश्नगत न किया. इनके मकानों और प्रतिष्ठानों पर एक कंकड़ी तक न फेंकी.

इन ब्रोकली वालों से ये पूछा जाना चाहिए कि अब सीमा, बीएसएफ, सेना, इंटेलिजेंस, तटरक्षक केंद्र व राज्य की शक्तियां पांच साल से मोदी जी के हाथ में है, तो आतंकी कैसे अंदर घुसे ? रिज़र्व बैंक से लेकर हवाला पर दिल्ली की सरकार का नियंत्रण है, तो उन्हें नोटबन्दी के बाद भी फण्ड कैसे मिला ? इंटरनेट, फोन, तथा मल्टी-कम्युनिकेशन के सभी संसाधनों पर दिल्ली की केन्द्र सरकार का नियंत्रण है तो आतंकी कैसे इन संसाधनों के माध्यम से पाकिस्तान के नियंत्रण में रहे ? कहीं मोदी की कही बात के अनुसार समस्या सीमा में नहीं दिल्ली की केन्द्र सरकार में तो नहीं है मूर्खों ?




इनसे ये भी पूछा जाना चाहिए कि देश की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा, आम जनता को कष्ट में डाल ये उन शहीद जवानों की शहादत को कलंकित करने की जगह उस 56 इंची सरकार से ये क्यों नहीं बोलते कि मसूद अजहर, हाफिज सईद और ज़की उर रहमान लखवी का कटा सिर लाकर दिल्ली में प्रदर्शित करिये ताकि फिर हम सब उसमें सौ जूते मार सके. आखिर व्यापारी सैनिकों से ज़्यादा रिस्क उठाने वाला बन्दा होता है न भाई ! अडानी और अम्बानी व शौर्य डोभाल ही अपने व्यावसायिक रिश्तों की बदौलत तीनो के सिर लेते आएंगे ? आखिर वे क्यों व्यापार कर रहे हैं वहां ?

अगर ये सरकार ऐसा नहीं कर सकती तो इस निकम्मी सरकार की क्या ज़रूरत है देश को ? शहीदों के ताबूतों की संख्या बड़ा कर, उनका ऊंचे से ऊंचा मंच सजाकर, उस पर खड़े होकर चुनावी भाषण देने वाला नेतृत्व हमें नहीं चाहिए, बोल पाओगे ?

  • फरीदी अल हसन तनवीर





Read Also –

पुलवामा : घात-प्रतिघात में जा रही इंसानी जानें
नोटबंदी-जीएसटी-जीएम बीज के आयात में छूट देना-टीएफए, सभी जनसंहार पॉलिसी के अभिन्न अंग
गोड्डा में जमीन की लूट व अडानी का आतंक




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]



 

Previous Post

पुलवामा : घात-प्रतिघात में जा रही इंसानी जानें

Next Post

पुलवामा में 44 जवानों की हत्या के पीछे कहीं केन्द्र की मोदी सरकार और आरएसएस का हाथ तो नहीं ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

पुलवामा में 44 जवानों की हत्या के पीछे कहीं केन्द्र की मोदी सरकार और आरएसएस का हाथ तो नहीं ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

9 मई विजय दिवस : लाल सेना के शहीदों को लाल सलाम !!

May 9, 2024

आर्टिकल 370 का राग फिर से क्यों गाया जा रहा है ?

June 15, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.