Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कामगारों की हर उम्मीद मोदी सरकार से टूट चुकी है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 29, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कामगारों की हर उम्मीद मोदी सरकार से टूट चुकी है

गिरीश मालवीय

दिल्ली के आनंद विहार बस स्टैण्ड पर जमा होती 25-50 हजार लोगों की भीड़ को देखकर अब मोदी सरकार के हाथ-पांव फूल रहे हैं. क्या इस सरकार को यह अंदाजा नहीं था कि यदि 21 दिन का लॉक डाउन आप कर देंगे तो सारे कामकाज बंद हो जाएंगे ? और ये लोग जो दिहाड़ी मजदुर है, जो दिन में कमाते हैं, उसी से रात में खाते हैं, ऐसे लोगों का क्या होगा ? ये क्या करेंगे ? क्या खाएंगे ? कैसे रहेंगे ? आखिर इन 4 दिनों में क्या हुआ है, वह भी जान लीजिए.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

लोग बस ट्रेन बंद होने की वजह से पैदल ही 500-800 किलोमीटर दूर अपने घरों की और निकल लिए और मोदी सरकार राज्य सरकारों के साथ चिठ्ठी-पतरी खेलती रही. राज्य सरकारें भी अपनी बस सेवाएं चलाने के लिए केन्द्र से मंजूरी का इंतजार करती रही, मंगलवार को उत्तराखंड सरकार ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा कि वह दिल्ली में फंसे प्रवासी उत्तराखंडियों को लाने की व्यवस्था करने के लिए तैयार है लेकिन बुधवार रात को देशव्यापी लॉकडाऊन लागू होने के कारण राज्य सरकार ऐसा नहीं कर पाई क्योंकि उसे बस सेवा संचालित करने की अनुमति नहीं मिली.

जबकि लॉकडाऊन की स्थिति में भी 25 फीसदी बसे आवश्यक सेवा के लिए चालू रहती है. देश की निजी विमानन कंपनियों स्पाइसजेट, इंडिगो और गोएयर ने भी प्रवासी कामगारों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अपनी सेवाएं देने की पेशकश की, गो-एयर और इंडिगो ने सरकार से कहा कि वह कामगारों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाने के लिए अपने विमानों का इस्तेमाल करने को तैयार है. इंडिगो के सीईओ धनंजय दत्ता ने नगर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को बताया, ‘देश में संकट की इस घड़ी में इंडिगो लोगों की जान बचाने में सहयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन सरकार मूक दर्शक बन कर बैठी रही उसने ऐसी उड़ानों की अनुमति देने की कोई मंशा जाहिर नहीं की.

इस बीच यात्रियों की बढ़ती हुई संख्या देख राज्य सरकारो ने जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान की सरकारों ने इन लोगों को अपने घर पहुंचाने का फैसला लिया. योगी सरकार ने एक हजार रोडवेज बसों की व्यवस्था की, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलों के डीएम, एसपी और एसएसपी को इन बसों को न रोके जाने का निर्देश दिया. गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने शुक्रवार को राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में कहा, ‘मैं इस बात से वाकिफ हूं कि राज्य इस बारे में कई कदम उठा रहे हैं लेकिन असंगठित क्षेत्र के कामगारों खासकर प्रवासी मजदूरों में बेचैनी है. इस स्थिति पर तुरंत काम करने की जरूरत है.’

http://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2020/03/8oL5PB0EhZ9LKzLT.mp4

अभी भी केंद्र सरकार को समझ नहीं आ रहा है कि इन लोगों का क्या करें. गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की है और उनसे इस वक्त मजदूरों का पलायन रोकने को कहा है. गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश जारी किया है, जिसके तहत राज्यों से कहा गया है कि मजदूरों के लिए SDRF फंड से राहत शिविरों की व्यवस्था की जाए लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है. यह मजदूर अब शायद इन राहत शिविरों में रहने को तैयार नही होंगे और यदि मोदी सरकार यह कदम 3 दिन पहले उठा लेती तो शायद इन्हें कुछ उम्मीद बंधती. अब कामगारों की हर उम्मीद मोदी सरकार से टूट चुकी है.

कल रात लिस्ट में छिप कर बैठे हुए बहुत से बीजेपी के आईटी सेल के कार्यकर्ताओं के चेहरे से नकाब खिंच गया. कल शाम से दिल्ली के आनंद विहार बस अड्डे पर भीड़ बढ़ती ही जा रही थी. रात होते-होते प्रवासी कामगारों का सैलाब बस अड्डे से लगी सड़क पर था. इस घटना को देशी क्या, विदेशी मीडिया भी दिखाने लगा. हम जैसे लोग जो प्रवासी कामगारों के पलायन पर पिछले तीन-चार दिनों से लगातार लिख रहे थे, उनकी पोस्ट पर आकर भी यही लोग अफसोस प्रकट कर रहे थे, कि इनकी मदद की जानी चाहिए. लेकिन रात को एक ट्वीट आया और सारा माहौल एक सेकंड में बदल गया. ट्वीट था बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय का.

मैंने इसके बाद ऐसे-ऐसे लोगों के चेहरे से नकाब हटते देखा, जिनके बारे में मैं सोचता था कि यह लोग कम से कम स्वतंत्र सोच के मालिक हैं. अचानक जैसे कोई ट्रिगर-सा दबा और दनादन हर तरफ से लिस्ट में मौजूद लोग ठीक उसी आशय की पोस्ट सोशल मीडिया पर करने लगे, जो भाषा इस ट्वीट में थी. आश्चर्यजनक रूप से सब एक ही भाषा बोलने लगे. यह कुछ वैसा ही था जैसे जंगल में एक सियार हुआ हुआ चिल्लाता है तो जंगल के अलग अलग हिस्से में मौजूद सियार भी उसकी आवाज में आवाज मिला कर हुआ-हुआ चिल्लाते हैं. ठीक वैसे ही अलग-अलग शहरों में बैठे आईं टी सेल के सियार अपने चीफ सियार के सुर से सुर मिलाकर हुया-हुआ करने लगे.

देश मे कोरोना बीमारी फैली है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री घर मे लूडो खेलकर लॉकडाउन का पालन कर रहे है, देश धन्य हो गया ऐसा अनुशासित स्वास्थ्य मंत्री पाकर 🙏 pic.twitter.com/9SGnbiUQv5

— Lucky Arora 💙 (@luckkyarora2) March 29, 2020

दिल्ली में प्रवासी कामगारों की बढ़ती भीड़ का जिम्मेदार केजरीवाल को ठहराया जाने लगा. उन पर आरोप लगाया गया कि केजरीवाल दिल्ली से प्रवासी मजदूरों कोे भगा रहे हैं और दिल्ली से उत्तर प्रदेश बॉर्डर की तरफ धकेल रहे हैं, जबकि 26 मार्च को ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ट्वीट कर चुके थे कि यूपी सरकार ने कामगारों की मदद के लिए 1000 बसों का इंतजाम किया हुआ है. इसके अलावा भी प्रवासियों की मदद के लिये एक प्रशासनिक आदेश जारी किया था, जिसमें बिहार उत्तराखंड के प्रवासी कामगारों की हर तरह से मदद की जाएगी.

आप ऐसा आदेश दे और आप बोले कि कोई घर से न निकले, ये दोनों बातें एक साथ कैसे संभव है ? दिल्ली की लगभग 60 फीसदी आबादी पूर्वांचल से आकर बसे कामगारों की है. यहां उन्हें काम नही मिलेगा. लॉकडाऊन लंबा खिंच सकता है, यह कोई भी सहज बुद्धि से अंदाजा लगा सकता है. इसके अलावा गांवों में यह रबी की फसल का सीजन है. वहां एक बार फिर भी रोजगार मिल सकता है, अन्न मिल सकता है, यह बात सभी के जहन में रही होगी इसलिए मजदूर बड़ी संख्या में पलायन कर गए.

बस अड्डे की भीड़ यह बता रही थी कि लोग परेशान हो चुके हैं, सरकारी दावे पर उन्हें अब यकीन नहीं रहा. कल पब्लिक इनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे. राहत शिविर की बात हो या मकान मालिकों द्वारा किराया नहीं लिया जाएगा, इस बात पर कोई यकीन नही कर रहा था. कल यही भीड़ जब थाली बजा रही थी तो बहुत भली लग रही थी, आज उसी भीड़ को दोष दिया जाने लगा.

रात में रिपब्लिक चैनल खोल कर देखा तो बिलकुल वही भाषा बोली जा रही थी जो हमारे तथाकथित मित्र बोल रहे थे. बिल्कुल सेम भाषा और ऐसा भी नहीं है कि भीड़ सिर्फ दिल्ली के आनन्द विहार बस अड्डे पर ही थी, हर वो बड़ा शहर जिसके आसपास ऐसे औद्योगिक क्षेत्र थे, वहां के बस अड्डे पर या शहर से बाहर जाने वाले नाकों पर ऐसी ही भीड़ थी, लेकिन चैनलों पर केवल आनंद विहार की चर्चा थी इसलिए लोगों का ध्यान उसी पर रहा. एक बात तो अच्छी तरह से समझ में आ गयी कि ये लोग रंगे सियार थे और अब इनका रंग उतर चुका है.

Read Also –

उत्तर कोरोना दौर में दुनिया का तमाम राजनीतिक तंत्र इतिहास की कसौटियों पर होगा
वैश्वीकरण-उदारीकरण का लाभ अभिजात तबकों के तिजौरी में और हानियां वंचित तबकों के पीठ पर लाठियां बन बरस रही है
कोरोना वायरस से लड़ने में मोदी सरकार की ‘गंभीरता’
एक मूर्ख दंगाबाज हमें नोटबंदी, जीएसटी और तालबंदी के दौर में ले आया
कोराना संकट कितना प्राकृतिक, कितना मानव निर्मित
कोरोना से लड़ने के दो मॉडल
कोराना संकट : असल में यह हत्यारी सरकार है
कोरोना व जनता कर्फ्यू तथा लॉक डाउन की हकीकत

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

 

Previous Post

उत्तर कोरोना दौर में दुनिया का तमाम राजनीतिक तंत्र इतिहास की कसौटियों पर होगा

Next Post

God is not Great : गॉड इज नॉट ग्रेट

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

God is not Great : गॉड इज नॉट ग्रेट

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जुर्म

September 30, 2023

आदिवासी सुरक्षा बलों के कैम्प का विरोध क्यों करते हैं ?

August 13, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.