Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कोविड महामारी: माफियाओं तुम्हें कभी माफ नहीं किया जाएगा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 13, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कोविड महामारी: माफियाओं तुम्हें कभी माफ नहीं किया जाएगा

Sanjay Mehtaसंजय मेहता

कोविड की साजिश के खिलाफ एक साल पहले यह लिखा था. मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं, फिर भी मेरी हर बात क्यों सही साबित हो रही है ? क्योंकि यह सब स्क्रिप्टेड है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

हम सबों को कोविड साजिश के खिलाफ अब बोलना चाहिए. अब चूंकि संभवतः लगभग लोगों को यह पता चल चुका है कि यह बीमारी के नाम पर कुछ बड़ा खेल हो रहा है. कोरोना से अधिक मौत लॉकडाउन से उत्पन्न स्थितियों के कारण हो चुकी है. सच सबके सामने है.

लगातार खबरें पढ़ने-सुनने को मिल रही है कि लोग लापरवाही बरत रहे हैं. बाजारों में खुलेआम निकल रहे हैं, मास्क नहीं लगा रहे हैं, सोशल.डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं. असल में यह कोई लापरवाही नहीं है.

100 दिनों से त्रस्त आदमी अपने रोजी-रोजगार के लिए बाहर निकलेगा ही. यह उसके जिंदा रहने और पेट का सवाल है. आत्महत्या के केस बहुत अधिक बढ़ गए हैं. लोग अपनी जीविका को लेकर सोचेंगे ही.

एक अंतराष्ट्रीय साजिश और सरकारों और व्यापारियों के बीच खेल में आम आदमी आखिर क्यों और कब तक पीसे ? अवसाद से आदमी क्यों मरता रहे ? अब तो हर तरफ लोग मिल जा रहे हैं और कह रहे हैं कोविड एक साजिश है. इसकी भयावहता को जान बूझकर व्यापक दिखाया जा रहा है.

जिसे लापरवाही बताया जा रहा है उसी में कोरोना के साजिश का जवाब भी है. मान लिया कि लाखों-करोड़ों लोगों ने लापरवाही कर दी. फिर वह बीमारी कहां है जो हज़ारों लोगों को उस भीड़ की वजह से हो जानी चाहिए थी ? आप कहोगे टेस्टिंग नहीं पायी है. इसका जवाब है कोई बीमारी टेस्टिंग का इंतजार नहीं करती.

अगर इस खेल को समझना है तो अपने घर में जितने भी सदस्य हैं, कल घर के सभी सदस्य जाकर टेस्ट करवा लीजिए. अगर 10 लोग टेस्ट कराएंगे मेरा दावा है एक-दो लोगों का रिपोर्ट पॉजिटिव दे दिया जाएगा.

आप कहोगे इतनी मौत कैसे हो रही है ? इसका जवाब है कि डेथ की ऑडिट रिपोर्ट हमें नहीं बतायी जाती है. cause of death में कैसे Covid-19 लिखा जा रहा है इसे ICMR के गाईडलाईन से समझा जा सकता है.

देखिये यह साजिश इतनी गहरी है जिसे आम आदमी को समझना मुश्किल है. सभी लोग अपने-अपने रोजी-रोजगार पर ध्यान दीजिए. सरकार पूरी तरह से साजिशकर्ताओं के गोद में खेल रही है. नौकरशाहों को भी सच का पता है लेकिन वे नौकरी की वजह से कुछ बोल नहीं सकते.

अपनी जीविका पर फोकस कीजिए. कई बार कहता रहा हूं फिर कह रहा हूं यह खेल अभी नवंबर तक चलेगा. वैक्सीन का ड्रामा शुरू होगा. 2021 के मई-जून तक यह खेल अपने पूरे रफ्तार पर रहेगा.

तुर्कमेनिस्तान ने अपने देश में मास्क पहनने और Coronavirus शब्द के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है. वहां कोविड-19 का कोई मामला नहीं है. सब अच्छे से हैं, कहीं कोई दिक्कत नहीं है.

बीमारी का सीधा और साफ फंडा है, बीमारी होनी होगी तो हो जाएगी, उसे खोजकर, टेस्ट कर निकालना नहीं पड़ता. कोविड को जबरदस्ती ढूंढा जा रहा है. जो टेस्टिंग किट इस्तेमाल किये जा रहे हैं उसमें भी गड़बड़ी है. किट्स भी गलत परिणाम दे रहे हैं.

तंजानिया में पपीता को भी covid19 positive बता दिया गया. कुल मिलाकर Coronavirus, Covid-19, Mask, Social Distancing, Sanitizer, Quarantine, Isolation जैसे शब्दों से नाता तोड़ लें, आप अच्छा फील करेंगे.

धूल-गर्दा के क्षेत्र में जा रहे हैं तब मास्क पहनिए लेकिन हर वक्त पहनने में कैसा महसूस हो रहा है, आपको पता ही है. दुनिया में हर जीव जंतु का नाक, मुंह खुला है और हम मास्क पहन के घुट रहे हैं. उससे सांस लेने में भी दिक्कत, नाक-कान भी लाल हो जा रहे हैं.

WHO ने खुद कहा है स्वस्थ्य आदमी को मास्क नहीं पहनना है. हम सब पूरी तरह से साजिश के गिरफ्त में हैं. हम सबों को अपने काम-धाम पर ध्यान देना चाहिए. जो दुकान को खोलने की अनुमति अब तक नहीं दी गयी है उसे खोलने की पुरजोर मांग करनी चाहिए.

सरकार चाहती है लॉक डाउन का खेल जितना लंबा खींचे उतना बेहतर है. लाखों के केस पर अनलॉक का ड्रामा और हज़ार से कम केस पर लॉक डाउन की नौटंकी ने ही सारा खेल बेनकाब कर दिया है.

नोट-आपको मेरी किसी भी बात पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए. जितनी बातें लिखी गयी है आप सबकी सत्यता जांच लीजिए, रोंगटे खड़े हो जाएंगे.

एक साल पहले लिखी गया यह आलेख अगर आपके रोंगटे खड़ा नहीं करता है तो आप इन तथ्यों पर गौर कीजिए. क्या अब सामान्य रोगों के मरीज इस धरती पर नहीं हैं ? क्या सभी रोग खत्म हो गए ? इस देश में कब अस्पताल खाली रहा है ? क्या सामान्य मरीजों को इलाज की जरूरत नहीं है ? शरीर के जरूरतों के अनुसार इलाज क्यों नहीं किया जा रहा है ? हर इलाज में कथित महामारी का टेस्ट अनिवार्य क्यों कर दिया गया है ? protocol के लाग लपेट में लोगों को क्यों फंसा दिया जा रहा है ? सामान्य रोगों का इलाज क्यों नहीं किया जा रहा है ?

अस्पताल पहुंचों नहीं कि मुंह में ऑक्सीजन सपोर्ट ठूंस दिया जा रहा है ! क्यों पूरे देश के श्मशान की तस्वीरें एक साथ दिखाई जा रही है ? क्या इससे पहले श्मशान सुनसान थे ? क्या इससे पहले कोई नहीं मरता था ? क्यों आंकड़ों को स्कोर कार्ड की तरह दिखाया जा रहा है ? क्यों लोगों को डराया जा रहा है ? संबल न देकर maas hysteria क्यों पैदा किया जा रहा है ? क्यों मानसिक रूप से बीमार किया जा रहा है ? क्यों मनोवैज्ञानिक युद्ध का सहारा लिया जा रहा है ?

क्यों experimental drugs का इस्तेमाल हो रहा है ? क्यों वैक्सीन लेने पर मौत हो रही है ? क्या इस देश का आदमी इतना कमजोर है कि एक साथ पूरी आबादी चुटकी में बीमार हो जाएगी ? क्यों सामान्य स्थिति को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा है ? क्या वायरस राज्यों की सीमा पहचानता है ? अगर फैल रहा है तो झारखंड से बगल में बंगाल में क्यों नहीं फैलता ? टेस्ट इतना फर्जी रिपोर्ट क्यों देता है ? हर मौत को महामारी से हुई मौत बताने की आपाधापी क्यों है ? अगर सच में महामारी है तो शीर्ष सत्ता क्यों इतना गैरजिम्मेदार है ? क्यों राज्यों के मुख्यमंत्री गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं ? जब सरकार चाहती है तभी क्यों बढ़ता है ? ऐसा क्यों हो रहा है ?

मैं इस बात की भविष्यवाणी 100 प्रतिशत दावे के साथ कर रहा हूं. 9 मई 2021 के बाद बंगाल में और केस बढ़ेंगे. वहां टेस्टिंग बढ़ा दी जाएगी. जैसी स्थिति अन्य राज्यों में पैदा की गई है वह बंगाल में पैदा की जाएगी ! अपनी ही जनता के साथ ऐसा क्रूर व्यवहार क्यों किया जा रहा है ? geopolitics की मजबूरी में क्या अपनी जनता को मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा ? यह अत्यंत गलत हो रहा है ? यह अन्याय की पराकष्ठा है ! माफियाओं तुम्हे कभी माफ नहीं किया जाएगा.

यह हो रहा है. आगे भी होगा. बिल्कुल बिंदास रहिए. डरना बिल्कुल नहीं है. आपको डराया जा रहा है. बात समझिए. New World Order की स्क्रिप्ट है. इस वक्त आप मॉक ड्रिल में जी रहे हैं.

Read Also –

कोरोनावायरस की महामारी : लोगों को भयग्रस्त कर श्रम का मनमाना दोहन और शोषण
कोरोना महामारी, जिसको महामारी साबित करने के लिए प्रमाण नहीं, प्रचार की ज़रूरत
वैक्सीन लगवाना ऐच्छिक नहीं अनिवार्य ही बनाया जा रहा है
किसान आंदोलन खत्म करने के लिए कोरोना का झूठ फैलाया जा रहा है
कोरोना : संघी फासीवाद को स्थापित करने वाला एक काल्पनिक महामारी
वैक्सीन की विश्वसनीयता पर सवाल और सरकार की रहस्यमय चुप्पी
गोबर चेतना का विकास
कोरोना वेक्सीन ‘कोवेक्सीन कोविशील्ड’ : स्वास्थ्य मंत्रालय का गजब का मजाक
कोरोना महामारी से लड़ने का बिहारी मॉडल – ‘हकूना मटाटा’
कोरोना एक बीमारी होगी, पर महामारी राजनीतिक है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

प्रधानमंत्री पद पर बैठा टपोरी छाप गली के गुंडे

Next Post

पं. बंगाल में नरेन्द्र मोदी के लोकप्रियता की त्रासदी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

पं. बंगाल में नरेन्द्र मोदी के लोकप्रियता की त्रासदी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा – परिवारवाद या पैसावाद ?

February 12, 2022

उन्नाव-कठुआ बलात्कार कांडः क्या नये कानून बनाने की जरूरत है ?

April 17, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.