Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

घृणा के सौदागर मोदी-महबूबा ने बुरहान वानी की हत्या कर कश्मीर को एक ही झटके में आतंकी-पृथकतावादी माहौल में तब्दील कर दिया

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 31, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
घृणा के सौदागर मोदी-महबूबा ने बुरहान वानी की हत्या कर कश्मीर को एक ही झटके में आतंकी-पृथकतावादी माहौल में तब्दील कर दिया
घृणा के सौदागर मोदी-महबूबा ने बुरहान वानी की हत्या कर कश्मीर को एक ही झटके में आतंकी-पृथकतावादी माहौल में तब्दील कर दिया
जगदीश्वर चतुर्वेदी

मैं अगस्त 2016 में जब कश्मीर में घूम रहा था, लोगों से मिल रहा था, बातें कर रहा था, तो एक बात साफ नजर आ रही थी कि कश्मीर तेजी से बदल रहा है. इस बदले हुए कश्मीर से कश्मीरी पृथकतावादी और हिन्दू फंडामेंटलिस्ट बेहद परेशान थे. मैं पुराने श्रीनगर इलाके में कई बार गया. वहां विभिन्न किस्म के लोगों से मिला, उनसे लंबी बातचीत की, खासकर युवाओं का बदलता हुआ रूप करीब से देखने के लिए कश्मीर विश्वविद्यालय में भी गया.

वहां युवाओं की आपसी बातचीत के मसले देखे, उनके चेहरे पर एक खास किस्म का चैन देखा. युवाओं में पैदा हुए लिबरल भावों और उनकी आपसी संगतों में उठने वाले सवालों और विचार-विमर्श के विषयों को सुनकर लगा कि कश्मीर के युवाओं में पृथकतावाद-आतंकवाद या धार्मिक फंडामेंटलिज्म को लेकर एक सिरे से घृणा का भाव है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

कश्मीर विश्वविद्यालय में एक जगह दीवार पर पृथकतावादी नारा भी लिखा देखा, जिसमें लिखा था – ‘भारत कश्मीर छोड़ो.’ मेरी आंखों के सामने एक घटना घटी जिसने मुझे यह समझने में मदद की कि आखिर युवाओं में क्या चल रहा है. हुआ यह कि मैं जब साढ़े तीन बजे के करीब हजरतबल मस्जिद से घूमते हुए कश्मीर विश्वविद्यालय पहुंचा तो देखा दो लड़कियां एक बैनर लिए कैंपस में प्रचार कर रही हैं. वे विभिन्न छात्र-छात्राओं के बीच में जाकर बता रही थीं कि एक जगह बलात्कार की घटना घटी है और उसमें कौन लोग शामिल हैं.

मैं उनका बैनर नहीं पढ़ पाया क्योंकि वह कश्मीरी में लिखा था लेकिन बैनर लेकर प्रचार कर रही दोनों लड़कियों की बात को कैंपस में विभिन्न स्थानों पर बैठे नौजवान सुनने को राजी नहीं थे. वे बिना सुने ही मुंह फेर ले रहे थे. इस घटना से मुझे आश्चर्य लगा. मैंने एक छात्र से पूछा कि बैनर लेकर चल रही लड़कियां किस संगठन की हैं तो वो बोला – मैं सही-सही नहीं कह सकता लेकिन ये पृथकतावादी संगठनों के लोग हैं और आए दिन इसी तरह बैनर ले कैम्पस में घूमते रहते हैं. कोई इन संगठनों की बातें नहीं सुनता क्योंकि कश्मीरी छात्र अमन-चैन से रहना चाहते हैं.

दिलचस्प बात यह थी मेरी आंखों के सामने तकरीबन 30 मिनट तक वे बैनर लेकर घूम-घूमकर छात्रों को बताने की कोशिश करते रहे लेकिन हर बार उनको छात्रों के छोटे-छोटे समूहों में निराशा हाथ लग रही थी. कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था. अंत में बैनर लिए युवाओं ने निराशा भरे शब्दों में अंग्रेजी में धिक्कारभरी भाषा में अपने गुस्से का इजहार किया, इस पर कुछ लड़कियों ने मुंह बनाकर उनको चिढ़ाने की कोशिश की.

थोड़ी दूर चला तो देखा लड़के-लड़कियां बड़े आनंद से एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए टहल रहे हैं. बाहर निकलकर मुख्य सड़क से जब कार से घूमते हुए मैं पुराने शहर की ओर आया तो देखा कई युवा युगल मोटर साइकिल पर एक-दूसरे से चिपके हुए दौड़े चले जा रहे हैं. यह भी देखा कि बड़ी संख्या में मुसलिम लड़कियां और लड़के आधुनिक सामान्य सुंदर ड्रेस पहने हुए घूम रहे हैं, बाजार में खरीददारी कर रहे हैं.

मुख्य बाजार में अधिकतर मुसलिम औरतें बिना बुर्के के जमकर खरीददारी कर रही हैं. रात को 11 बजे एक रेस्तरां में डिनर करने गया तो वहां पर पाया कि कश्मीरी प्रेमी युगल और युवाजन आराम से प्रेमभरी बातें कर रहे हैं, कहीं पर कोई आतंक का माहौल नहीं, किसी की भाषा में घृणा के शब्द नहीं. मैंने अपने टैक्सी ड्राइवर और होटल के मालिक से पूछा इस समय कश्मीर में लड़कियां किस तरह शादी कर रही हैं ॽ सभी ने एकस्वर में कहा इस समय कश्मीरी लड़कियां गैर-परंपरागत ढ़ंग से प्रेम विवाह कर रही हैं. वे स्वयं तय कर रही हैं. यह 1990-91 के बाद पैदा हुआ एकदम नया फिनोमिना है.

कश्मीरी युवाओं में उदातावादी रूझानों को देखकर मन को भय भी लग रहा था कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि कश्मीर में फिर से अशांति लौट आए ॽ क्योंकि फंडामेंटलिस्ट ताकतें नहीं चाहतीं कि कश्मीर में उदारतावादी भावनाएं लौटें. मुझे यह भी लग रहा था कि जल्द ही टकराव हो सकता है. मैंने इस तनाव को बार-बार वहां महसूस किया. मुझे लगा वहां आम जनता में उदारतावादी राजनीति और जीवन मूल्यों के प्रति जबर्दस्त आग्रह है और आतंकी-पृथकतावादी और हिन्दू फंडामेंटलिस्ट नहीं चाहते कि कश्मीर में उदारतावाद की बयार बहे. वे हर हालत में आम जनता के मन में से उदारतावाद के मनोभावों को मिटाने की कोशिश करेंगे.

मैंने कश्मीर से लौटकर वहां के उदार माहौल पर सोशल मीडिया पर लिखा भी था. दुर्भाग्यजनक है कि मेरे लिखे जाने के कुछ दिन बाद ही बुरहान वानी की हत्या होती है और अचानक कश्मीर में उदारतावादी माहौल एक ही झटके में आतंकी-पृथकतावादी माहौल में तब्दील कर दिया गया.

जिसने भी बुरहान वानी की हत्या का फैसला लिया, वह एकदम बहुत ही सुलझा दिमाग था. उसके मन में बुरहान वानी नहीं बल्कि कश्मीर का यह उदार माहौल था जिसकी उसने हत्या की है. ये वे लाखों कश्मीरी युवा हैं जिनके उदार मूल्यों में जीने की आकांक्षाओं को एक ही झटके में रौंद दिया गया.मैं इस तरह की आशंकाओं को लेकर लगातार सोच रहा था कि मोदी-महबूबा के सरकार में रहते कश्मीर में शांति का बने रहना संभव नहीं है.

मैं जब सोच रहा था तो उस समय सतह पर शांति थी लेकिन मैं आने वाले संकट को महसूस कर रहा था. अफसोस की बात है कि मोदी-महबूबा की मिलीभगत ने कश्मीर की जनता के अमन-चैन में खलल डाला, शांति से जी रहे कश्मीर को फिर से अशांत कर दिया, नए सिरे से आतंकियों और सेना की गिरफ्त में कश्मीर के युवाओं को कैद कर दिया.

Read Also –

पुलवामा : घात-प्रतिघात में जा रही इंसानी जानें
वोटों की खातिर कब तक कश्मीरियों से खेलते रहोगे साहेब ?
यसीन मलिक : कश्मीरी राष्ट्रीयता के संघर्ष का लोकप्रिय चेहरा
हैदरपोरा एनकाउंटर : …तो ऐसे हासिल करेंगे कश्मीरियों का विश्वास ?
कश्मीर : समानता के अधिकार की ज़मीनी सच्चाई
नेहरु के बनाये कश्मीर को भाजपा ने आग के हवाले कर दिया

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

गांधी से मोदी की तुलना हास्यास्पद ही नहीं, गांधी के लिए अपमानजनक भी है

Next Post

बहुजन कीर्तन

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

बहुजन कीर्तन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी-शाह के दरवाजे पर बंधा कुत्ता बन गई हैं अदालतें

April 7, 2022

फेसबुक और व्हाट्सएप को बनाएं क्रांतिकारी परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम

June 20, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

March 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

March 7, 2026

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.