Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मोदी जी का विकल्प कौन है ? – विष्णु नागर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 2, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

मोदी जी का विकल्प कौन है ? – विष्णु नागर

कई पूछते हैं कि आप ही बताइए कि मोदी जी का विकल्प कौन है ? मैं कहता हूं भैया, मोदी जी का विकल्प मोदी जी ही हो सकते हैं. जो प्रधानमंत्री हर साल दो करोड़ रोजगार पैदा करने का वायदा करके सत्ता में आए और जो 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी पैदा करके बाई- बाई करके चला जाए और इसे छुपाने में अपना पूरा दम लगा दे, उसका विकल्प ही चाहिए, वह नहीं. वैसे विकल्प तो जवाहरलाल नेहरू के भी मिल गये थे, शास्त्री जी, ये तो महज मोदी है. इसके तो विकल्प ही विकल्प हैं ! जो रोजगार दफ्तरों को बंद करवा दे, जो नोटबंदी करके लोगों की रोजी-रोटी छीन ले, उसके बारे में यह सवाल ही क्यों कि उसका विकल्प कौन है ?

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

जिसकी सरकार मई तक की मेहमान है और जो अंतरिम बजट में 15 लाख टाइप झुनझुना थमाकर चला जाएगा, उसका विकल्प तो कोई चुन्नीलाल भी हो सकता है. जो इतना उथला हो कि अपने पुराने राजनीतिक आका तक को इतना फालतू समझता हो कि बेचारा बूढ़ा हाथ जोड़कर इसके सम्मान में खड़ा रहे और यह पहचानने से इनकार करे, जो उसकी तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखे, उसके विकल्पों की कोई कमी हो सकती है क्या ? जो इतना ’वीर’ हो कि प्रेस का सामना न कर सकता हो, जो अपने विरोधियों से मुंहजबानी नहीं, सीबीआई आदि एजेंसियों के जरिए, वह भी आखिर में आकर निबटता हो, जिसे अपने विरोधियों का हर जुर्म अब याद आ रहे हों, उसका विकल्प तो अंधेरे में भी मिल सकता है-बिना टार्च की रोशनी क. ऐसे ’महान’ मोदी जी का विकल्प भी जिन्हें नहीं नजर आ रहा है, उन्हें शत- शत नमन ही कर सकता हूं.




वैसे मोदी जी को शायद मालूम नहीं कि उनके विकल्प तो उनकी मेहरबानी से पार्टी में ही कई-कई पैदा हो चुके हैं, जो उन्हें आडवाणी बनाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं. उनके सबसे ’योग्य’ विकल्प तो आदित्यनाथ हैं. जितना सर्वनाश करने में मोदी जी को पूरे पांच साल लग गए, मौका मिले तो यह बंदा इतना ’फास्ट’ है कि चुटकी बजाते ही इतना सबकुछ करके दिखा सकता है. यूपी में खम ठोंककर यही तो यह कर रहा है. अमित शाह इस काम में ज्यादा से ज्यादा छह महीने लगाएंगे और मुकाबला आदित्यनाथ से हो तो वह भी मिनटों में शत-प्रतिशत रिजल्ट दे सकते हैं.

जेटली साहब को भी ’अयोग्य’ समझने की गलती नहीं करनी चाहिए. उनकी ’विशेषता’ यह है कि वह चिकने-चुपड़े हैं और फटाफट अंग्रेजी भी बोलते हैं, जो ये बेचारे इस जन्म में तो नहीं बोल सकते. सालभर में देश का सवा सत्यानाश करवाने की नागपुर की इच्छा हो तो वह सबसे उपयुक्त विकल्प हैं. वह अपनी त्वरित सेवाएं बीमार होने के बावजूद दे सकते हैं और इस हेतु स्वस्थ होकर दिखा सकते हैं. वह बड़ी बेचैन आत्मा के स्वामी हैं. विदेश में बिस्तर में पड़े -पड़े भी देश की बर्बादी के नये- नये उपाय ढूंढते रहते हैं. सुब्रमण्यम स्वामी भी कब से बेकार बैठे हैं और ’देशसेवा’ करने के लिए वह भी बेकल हैं, क्योंकि मोदी जी ने उन्हें अवसर नहीं दिया. वह जेटली जी से तो खैर कंपीट कर ही सकते हैं, अगर जरूरत पड़े तो वह आदित्यनाथ और अमित शाह को भी कड़ी टक्कर दे सकते हैं. और भी बहुत से मोदी जी के कंपीटिटर हैं, उनके अनेक विकल्प हैं- भाजपा में. वह आराम से अपना फकीरी झोला उठाकर अहमदाबाद या हिमालय प्रस्थान कर सकते हैं.




और यह मत समझिएगा कि मोदी जी के सिर्फ इतने ही विकल्प हैं. राष्ट्रीय स्तर पर व्यापम ही क्या राफेल का बाप भी करवाना हो तो शिवराज सिंह चौहान मौजूद हैं. रमन सिंह भी खाली हो चुके हैं. आदिवासियों को बर्बाद करने और उनसे सहानुभूति रखनेवालों को ठिकाने लगाने का उनका रिकार्ड भी मोदी जी से बुरा नहीं है. घोटाला वगैरह करना तो खैर इन सबके लिए हाथ का मैल है, जब कहो, तब करके दिखा दें. यहां तक कि विपक्ष में रहकर कर दें !

और अगर नागपुर का इरादा इस बार कनिष्ठों को मौका देने का हो तो स्मृति ईरानी भी बुरी नहींं हैं और निर्मला सीतारमन भी कम अच्छी नहीं हैं. और हां, गिरिराज सिंह का नाम तो भूलने का पाप होने ही जा रहा था कि मैं बच गया. मुझे आशा ही नहीं, पूरा विश्वास है कि भाजपा में भाषण देने और झूठ बोलने में सक्षम संबित पात्रा टाइप असंख्य युवा प्रतिभाएं हैं इसलिए विकल्प तो भाजपा में ही कम नहीं हैं और किसी भाजपाई सज्जन या दुर्जन या अभिजन का नाम गलती से यहां छूट गया हो तो वह क्षमा कर दे. सुषमा जी और उमा भारती जी आदि भाजपा की महिला शक्ति बुरा न मानें. वे या कोई और चाहें तो सर्वनाशियों की सूची में अपना नाम स्वयं दर्ज कर सकते हैं. उन्हें इसकी पूरी छूट है और यह बारह महीने चलनेवाली सेल टाइप नकली नहीं, असली छूट है.

वैसे अपने विकल्प के रूप में मोदी जी भी खास बुरे नहीं हैं बल्कि अच्छे हैं. झूठ बोलने के मामले में डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल विश्वगुरु भले नजर आ रहे हों मगर शर्तिया तौर पर वह हैं नहीं. हमारी कमी यह है कि अमेरिकी पत्रकार आदि, ट्रंप के झूठों का रिकॉर्ड रखते हैं, हमारे लिए मोदी जी का झूठ पर्यावरण प्रदूषण की तरह ही इतना नेचुरल है कि खयाल ही नहीं आता कि इसका रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए. रिकॉर्ड रखते तो ट्रंप जी के बुरा मानने का खतरा भी था कि मोदी जी से उन्हें कमतर दिखाने का षड़यंत्र भारतवासी कर रहे हैं. इससे द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता था. इस संकट से हमने देश को बचाया है. इसके लिए जोरदार तालियां तो बनती ही हैं. बनती हैं कि नहीं बनती हैं ? बनती हैं.




मोदी जी इसलिए भी अपना विकल्प स्वयं हैं कि यह बंदा है तो अद्भुत. नोटबंदी जैसे अपने सबसे भयानक कदम की तारीफ भी राष्ट्रपति के मुंह में घुसेड़ सकता है. भारत में सर्जिकल स्ट्राइक का तो जैसे यह पुरोधा ही बना हुआ है. खुदा के (सारी भगवान के) इस बंदे को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि चले थे पाकिस्तान को सबक सिखाने और नतीजा यह है कि हम अपने ज्यादा से ज्यादा सैनिकों और साधारण लोगों की जानें गंवाकर खुद ही सबक सीख रहे हैं.

56 इंच के इस सीने में अपनों के मरने का दर्द नहीं उठता, दूसरों को मारने की खुशी से सीना फूला- फूला रहता है. नहीं फूले तो पंप से हवा भरकर उसे यह फुला लेता है. हजारों करोड़ का घोटाला करवाकर भी बंदे के चेहरे पर एक शिकन तक नहीं दीखती और खुद को चौकीदार कहने से जरा नहीं शरमाता. अब बताइए लोग हैं कि ऐसे मोदी जी का विकल्प बाहर ढूंढते हैं, जबकि अंदर ही असंख्य विकल्प हैं इसीलिए मुझसे वह नारा भूला नहीं जाता, मेरा देश महान और उससे ज्यादा हमारा मोदी महान, ट्रंप से भी ज्यादा महान.

  • विष्णु नागर




मोदी द्वारा 5 साल में सरकारी खजाने की लूट का एक ब्यौरा
मोदी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान से खिलवाड़ को चौकीदारी बता रहे हैं
अब भी आप चाहते हो कि ऐसा तानाशाह ही दुबारा चुन कर आए !
सवालों से भागना और ‘जय हिन्द’ कहना ही बना सत्ता का शगल
मौत के भय से कांपते मोदी को आत्महत्या कर लेना चाहिए ?

हरिशंकर परसाई की निगाह में भाजपा




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Previous Post

उड़ीसा : कॉरपोरेट लुट के लिए राज्य और वेदांता द्वारा नियामगीरी के आदिवासियों की हत्याएं और प्रताड़ना; जांच दल की रिपोर्ट

Next Post

पत्रकारिता की पहली शर्त है तलवार की धार पर चलना

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

पत्रकारिता की पहली शर्त है तलवार की धार पर चलना

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

21वीं सदी के षड्यंत्रकारी अपराधिक तुग़लक़

May 2, 2020

पुचेट : आत्महत्या के बारे में

September 11, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.