Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अस्थाई गौशालाओं की स्थाई समस्या, कैसे हो समाधान ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 2, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अस्थाई गौशालाओं की स्थाई समस्या, कैसे हो समाधान ?

 Vinay Oswal विनय ओसवाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
 
अस्थाई गौशालाओं की यह स्थाई समस्या है. यानी अनुपयोगी गौ-वंश का संरक्षण घोर आर्थिक संकट के भंवर में फंस गया है. विश्व हिंदू परिषद से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी आये दिन गौवंश के प्रति अपनी आस्था के ढोल पीटते हुए सड़कों पर सक्रिय  जरुर दिखते हैं. ढोंग से राजनैतिक लाभ तो उठाये जा सकते हैं, पर वास्तविक उद्देश्यों को हासिल नहीं किया जा सकता.

लावारिश गौ-वंश किसानों के लिए ही नहीं, उनलोगों के लिए भी बहुत बड़ा सिर दर्द बन चुका है, जो शहरों में रहते हैं, खास कर उन प्रदेशों में जिनमें गौ-वध पर प्रतिबंध है.

राजस्थान देश का एकमात्र राज्य था जहां गौ-कल्याण मंत्रालय है. और उसी राज्य में 2 वर्ष पूर्व गायों की दुर्दशा को लेकर इस कदर कोहराम मचा था कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की थी. देश ही नहीं विदेशी मीडिया ने भी इस मुद्दे को जमकर उछाला था. हिंगोनिया गौ-पुनर्वास केंद्र जयपुर में भूख से तपड़कर गायों की मौत का मामला सामने आया था. चारा नहीं मिलने की वजह से 10 दिनों के भीतर हजारों गायों की मौत हो गई थी. जो स्टॉक में चारा था, वह पांच दिनों के भीतर खत्म हो गया. यहां करीब 23 छोटे बड़े बाड़े हैं, जिसमें रोजाना 100 गायों की मौत हो रही है. आम दिनों में 20 से 22 गायों की औसत मौत होती रही है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

यह तो मात्र एक गौशाला की स्थिति है जो राजस्थान की राजधानी में स्थित है, जिसे करोड़ों रुपये की आर्थिक मदद सरकार से मिलती है. ऐसी छोटी-बड़ी हजारों गौ-शालाओं के संचालक बताते हैं कि यह गौ-संरक्षण संस्थाएं युवाओं को रोजगार भी मोहैय्‍या कराती है. गौ-संरक्षण एक अनुत्पादक उद्योग बन चुका है, जो युवाओं की बेरोजगारी से सम्बन्धित आंकड़ों को राहत प्रदान करता है.




काश, उत्तर प्रदेश की गौ-भक्त सरकार भी गौ-वध पर प्रतिबंध लगाने से पूर्व ऐसे स्वयंसेवी संस्थाओं का जाल बिछाने और बजट में मोटी रकम देने के बाद गौ-वध पर प्रतिबंध लगाती, तो कम से कम गौ-सम्‍बर्धन में लगी संस्थाओं जिनमें विश्व हिंदू परिषद प्रमुख है, के गौ-संरक्षण और सम्‍बर्धन कार्यक्रमों से जुड़े बेरोजगार युवकों को रोजगार तो मिलता. वे खुलेआम गौ-शालाओं में गौवंश की मौतों की पुष्टि करते हुए सारी तोहमत अपनी ही सरकार के जिला प्रशासन के सर तो नहीं मढ़ते !  ऐसा ही एक मामला हाथरस जिले में स्थित एक अस्थायी गौशाला का सामने आया है. देखे नीचे रिपोर्ट –

पांच माह पूर्व कड़कड़ाती ठण्ड में जब सब अपने घरों में सुरक्षित चैन से सो रहे होते हैं, उन्होंने टाॅर्च हाथ में थाम और रजाई में दुबक कर जाने कितनी रातें घरों से बाहर खेतों में बिताई है. खून जमा देने वाली ठण्डी हवाओं के थपेडों से उपजी शारीरिक और जंगली जानवरों का शिकार बन जाने के खतरों के भय की मानसिक पीड़ा जिसने भोगी है, वही जानता है.

गौ-सेवा और संरक्षण की नीति और नियत का प्रतिनिधि मंच विश्व हिंदू परिषद है. वह इस हेतु विभिन्न नामों से पूरे देश में तरह-तरह के प्रकल्प और हर प्रकल्प तरह-तरह के कार्यक्रम समय-समय पर चलाता है. हाथरस जिले में भी इस मंच से जुड़े कई पदाधिकारी और गौ-भक्तों की बहुत बड़ी संख्या है.

किसानों का कहना है कि वर्तमान योगी जी की सरकार के आने से पूर्व वे अनुपयोगी गौ-वंश को बेच दिया करते थे, अब कोई खरीदता नहीं है. इसलिए अब अनुपयोगी गौ-वंश को लोग लावारिश छोड़ देते हैं. यही गौ-वंश अपने भोजन की तलाश में खेतों में खड़ी फसल को खाते और पेट भरते हैं. पर किसानों की समस्या है कि वे अपने और परिजनों के पेट कैसे भरें ?




योगी सरकार के आने के बाद गौ-भक्तों के सर पर किसान परिवारों और अनुपयोगी गौ-वंश दोनों के पेट भरने के साथ-साथ गौ-संरक्षण की समस्या से निपटने की समस्या सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है. योगी सरकार ने इस समस्या के समाधान हेतु गांव-गांव में अस्थाई गौशालाएं बनाने की योजना बनाकर उसको हर जिले में जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन के कंधों पर डाल दी. यही नहीं प्रति पशु प्रतिदिन अनुमानित खुराक पर होने वाले खर्च का आंकलन किया, जो 30 रुपया बताया गया है. व्यवस्था है कि इस धन का 70 प्रतिशत सरकार उठाएगी और 30 प्रतिशत स्थानीय ग्रामसभा स्तर पर गौ-भक्तों की सम्मितियां/सङ्गठन उठाएं.

इस 30 प्रतिशत धन को इकठ्ठा करना और इन गौ-शालाओं का प्रबंधन जिला पशुधन अधिकारी के साथ मिलकर करना गौ-भक्तों और उनके मातृ सङ्गठन विश्व हिंदू परिषद के लिए ऐसी चुनौती बन गया, जिसे वे न तो निभा पा रही हैं और न निभाने से पीछे ही हटती दिखना चाह रही है.

मैंने भूसे के व्यापारियों से भाव पता किया तो मालूम पड़ा कि भूसा 6 से 10 रुपये किलो है. यानी सरकार से मिलने वाले 21 रुपये से सिर्फ दो किलो भूसा ही खरीदा जा सकता है. एक पशु को जिंदा रहने के लिए, उसके वजन का 2.5 प्रतिशत यानी औसतन कम से कम पांच किलो भूसे (रफेज) के अतिरिक्त दाना जैसे दलिया, नमक, गुड़ आदि कंसन्ट्रेट भी चाहिए. चारा-दाना-पानी के अलावा देख रेख के लिए प्रति सौ गाय एक मजदूर भी चाहिए.  यानी इन सब व्यवस्थाओं की लागत के सामने सरकार से मिलने वाली राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान ही बैठती है.

कैसे हो इस धन का इंतजाम ? वो भी एक दो दिनों के लिए नहीं, अस्थाई गौशालाओं की यह स्थाई समस्या है. यानी अनुपयोगी गौ-वंश का संरक्षण घोर आर्थिक संकट के भंवर में फंस गया है.

इसी अप्रैल माह की 23 तारीख को जिलाधिकारी ने अपने कार्यालय में इन गौशालाओं की दुर्व्यवस्था की ओर ध्यान दिलाये जाने से सम्बंधित प्राप्त पत्रों पर संज्ञान लेते हुए सासनी स्थित वर्षों से बंद पडी पराग डेयरी के विशाल परिसर में बनी गौशाला का निरीक्षण जिम्मेदार अधिकारियों के साथ किया. कई अव्यवस्थाएं उनके सामने आई, जिन्हें उन्होंने तुरन्त दुरुस्त करने अथवा गम्भीर परिणाम भुगतने के कड़े निर्देश दिए. इसके बाद भी मुझे नहीं लगता कि गौ-भक्त समाज के बड़े सहयोग के बिना व्यवस्थाएं पटरी पर आ पाएंगी.




हाथरस में विश्व हिंदू परिषद से जुड़े गौ भक्त समाज के तमाम लोगों को फोन कर मैंने जिलाधिकारी द्वारा किये गए उक्त निरीक्षण के हवाला दे यह जानने का प्रयास किया कि अकेले पराग डेयरी में लगभग पांच माह पूर्व 2500 लावारिश पशुओं संख्या थी, जो घट कर मात्र 725 रह गयी है, के कारणों पर वे कुछ प्रकाश डालेंगे. लेकिन मुझे निराशा ही हाथ लगी. अलबत्ता कैलाश कूलवाल जी ने अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी, जो इस प्रकार है –

“हाथरस सासनी क्षेत्र में स्थित पराग डेरी पर अस्थाई गौशाला के अंदर वर्तमान में लगभग 725 गोवंश हैं परंतु पूर्व में लगभग 3000 गोवंश था. अन्य गोवंश को प्रशासन ने क्या बेच दिया, या तस्करी कर दी ? क्या मर गई या मार दी गई ? इसका क्या कारण रहा ? गोवंश की ऐसी दुर्दशा किसी भी शासन में नहीं देखी गई. प्रशासन मौन और उदासीन बन गया है. इसके पीछे बहुत बड़ा षड्यंत्र प्रतीत हो रहा है. हिंदुओं में गाय को गो-माता माना गया है, जिसे वे पूजा करते हैं. स्थानीय प्रशासन द्वारा ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक अधिकारी गौवंश की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं हैं और गोवंश की रक्षा को लेकर लीपापोती की जा रही है. गतिविधि संदिग्ध लग रही हैं. उच्च स्तरीय जांच की जाए.”

उपरोक्त टिप्पणी जनसत्ता समाचार पत्र के लिए मैंने ली थी यानी सारांश यह है कि पांच माह पूर्व जिन हजारों लावारिश गौ-वंश को जिले के विभिन्न स्थानों पर सरकारी स्कूलों और दफ्तरों की इमारतों में गुस्साए किसानों ने बन्द किया था, वो गौ वंश आज किस हाल में है ? न किसी को इसका अता पता है और न ही विश्व हिंदू परिषद से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी अपनी कोई जिम्मेदारी समझते हैं. वैसे आये दिन गौवंश के प्रति अपनी आस्था के ढोल पीटते हुए सड़कों पर सक्रिय  जरुर दिखते हैं. ढोंग से राजनैतिक लाभ तो उठाये जा सकते हैं, पर वास्तविक उद्देश्यों को हासिल नहीं किया जा सकता.

कैसे हो लावारिश गौ वंश का संरक्षण ? क्यों इन बे-जुबान पशुओं को भूख-प्यास  से तड़प-तड़प, तिल-तिल कर मरने के लिए उन्हें उनकी नियति पर छोड़ दिया गया है ? वगैरह-वगैरह कई प्रश्न जिनके जवाब आज विश्व हिंदू परिषद और बड़ी संख्या में मौजूद गौ-भक्तों से मिलने चाहिए, अगर नहीं मिलते तो कौन देगा ?




Read Also –

कैसा राष्ट्रवाद ? जो अपने देश के युवाओं को आतंकवादी बनने को प्रेरित करे
स्युडो साईंस या छद्म विज्ञान : फासीवाद का एक महत्वपूर्ण मददगार
भारत माता की जय : असली समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए सरकारी चालाकी
किसानों को उल्लू बनाने के लिए बहुत ज़रूरी हैं राष्ट्रवाद के नारे
भारतीय कृषि का अर्द्ध सामन्तवाद से संबंध : एक अध्ययन
सवालों से भागना और ‘जय हिन्द’ कहना ही बना सत्ता का शगल




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]




Tags: गायों की मौतगौ-कल्याण मंत्रालयगौ-भक्तोंगौ-वधगौशालालावारिश गौ-वंशविश्व हिंदू परिषदहिंगोनिया गौ-पुनर्वास केंद्र
Previous Post

भारत में क्यों असंभव है फ्रांस जैसी क्रांति ?

Next Post

पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मोदी के सामने सिर के बल खड़ा है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

पार्टी का संगठनात्मक ढांचा मोदी के सामने सिर के बल खड़ा है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बिकने के लिए तैयार बीएसएनएल

July 2, 2019

‘भारत कैसे बिल गेट्स का गिनी पिग बन गया ?’ – डॉ. नॉर्बर्ट हैरिंग

March 10, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.