दिल्ली में कम्युनिस्ट
दिल्ली में कम्युनिस्ट होना सरल है बनिस्बत हमारे शहर के और भी कठिन है, हमारे जिले के किसी गांव के...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
दिल्ली में कम्युनिस्ट होना सरल है बनिस्बत हमारे शहर के और भी कठिन है, हमारे जिले के किसी गांव के...
छत्तीसगढ़ के कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर खूंखार पुलिसियों का बड़ा हमला छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों और माओवादियों...
मज़दूर दिवस पर एक अव्यावहारिक सुझाव सुब्रतो चटर्जी ये तो सर्वविदित है कि कि निजी पूंजी का महल मज़दूरों के...
चार्ली चैपलिन के जन्मदिन (16 अप्रैल) पर...सत्ता और ताक़त का माखौल उड़ाने वाला कलाकार हिटलर, मित्र सेनाओं और समाजवादी सोवियत...
आलोकधन्वा हिन्दी के जनवादी कविताओं की दुनिया में बड़ा नाम है. उनकी कविताओं में प्रेम की एक अजस्त्र धारा बहती...
हिंसक होकर हम हिंसा से मुक्त कैसे हो सकते है ! हिमांशु कुमार मनुष्य हिंसा मुक्त दुनिया बनाना चाहता है....
आवारा और दलाल पूंजी के खतरे के बीच सोनी सोरी के जन्मदिन पर इन्दरा राठौर मोटे तौर पर आवारा और...
धंधेबाज़ रामदेव का धर्म के नाम पर ‘शरबत जिहाद’ हरिशंकर परसाई ने कहा है कि ‘धर्म जब धंधे से जुड़...
'नो अदर लैंड', तब जाएं तो जाएं कहां ? तानाशाहों को हमेशा लगता है कि कला जैसे उनके लिए काल...
औरत महिलाएं चूल्हे पर चावल रख रही हैं जिनके चेहरों की सारी सुन्दरता और आकर्षण गर्म चूल्हे से उठती गर्मी...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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