Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सभ्यताएं आइसोलेशन में विकासोन्मुख नहीं होती

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 28, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
सभ्यताएं आइसोलेशन में विकासोन्मुख नहीं होती
सभ्यताएं आइसोलेशन में विकासोन्मुख नहीं होती

बाबर का जन्म जहां हुआ, वो जगह अब उज्बेकिस्तान में है. वह इलाका, फगराना कहलाता है. बाबर मंगोलों की 11 वी पीढ़ी का था, और मां तैमूर की 9 वीं पीढ़ी से. वे अपनी मंगोल विरासत पसन्द नही करते थे. खुद को तैमूरी कहते. मुगल शब्द उनके लिए गाली था, जो बाद के दौर में चिपक गया.

पिता मारा गया, तब बाबर महज 10 साल का था. दुश्मन उसे खोजते रहे. बचते बचाते, वह फगराना का राजा बनता है और वक्त आने पर समरकंद पर धावा बोलता है. समरकंद- मध्य एशिया की गोल्डन सिटी. बल्ख, बुखारा, समरकंद सिल्क रुट के शहर थे. मिक्स कल्चर, मिक्स आर्किटेक्चर, मिक्स्ड फ़ूड- सभ्यताओं के बीच आदान प्रदान से समृद्ध

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

कभी, इन शहरों के नाम गूगल करें. मस्जिदों, बाजारों के वीडियो देखें. 13-14वी शताब्दी से बने ये भवन, शानदार, भव्य. ताजमहल से कम नहीं. आज ताशकंद बुखारा, समरकंद, एक प्रमुख टूरिज्म सर्किट है.

बाबर ने दो बार समरकंद जीता और हारा. फिर दक्षिण की ओर रुख किया. अफगनिस्तान जीता. फिर उसे भारत पर आक्रमण का आमंत्रण मिला. यह आमंत्रण किसका था- खोजना आपका काम. भारत में वह महज 4 साल जिया. इन चार साल उसने ब्रिलिएंट मिलिट्री जीतें हासिल की.

हर दिन का रिकार्ड रखता. लिखता, पढ़ता, कवितायें करता. उज्बेकिस्तान में उसकी मूर्ति लगी है. हाथ में किताब है, धनुष बाण नहीं. उसका बेटा, हुमायूं लाइब्रेरी की सीढ़ियों से गिरकर मरा. भारतीय इतिहास में कोई और राजा बताइये, जिसके महल में लाइब्रेरी थी ? रनिवास थे, हरम थे, बाग थे, शीशे के कमरे थे- लाइब्रेरी न थी.

अकबर अनपढ़ था पर ज्ञान की प्यास थी. उसने जो प्रशासनिक सुधार किए, वह ज्ञान और ज्ञानियों के सम्मान के कारण हुए. सुलहकुल, इबादतखाना, दीन ए इलाही. अकबर के स्प्रिचुअल साइड के लक्षण है. इस दौर में मुगलिया सल्तनत बनती है.

पर जहांगीर अय्याश है, शाहजहां नालायक. औरंगजेब की धर्मांधता उसके अच्छे गुणों पर हावी है. सल्तनत इतनी व्यक्ति केंद्रित कर देता है, की उसके बाद साम्राज्य बिखरता है. जो परवर्ती मुगल- जो नालायक, डरपोक, अय्याश, मूर्ख औऱ अक्षम थे, सम्हाल नहीं पाते. क्षत्रप उन पर हावी हो जाते हैं. मराठे जैसी ब्रोकन फोर्स भी उन्हें काबू कर लेती है.

लब्बोलुआब यह कि अकबर के बाद ज्ञान विज्ञान, शिक्षा में कोई नयापन नहीं होना, मुगलों को हर स्किल में पीछे कर देता है. पराभव की नींव रखता है. दसवीं सदी में ठीक यही हिन्दुओं के पराभव का कारण था. शिक्षा, विज्ञान सिर्फ हवाई थे.

आप ज्योतिष देखते रहे, गोबर में साइंस खोजते रहे. दुनिया कम्पोजिट बो बना रही थी. कैटपुल्ट, स्लिंग, मजबूत जिरहबख्तर, तलवारें बना रही थी. यह मेटलर्जी का विकास था. तो जब दुनिया बारूद, तोप, बंदूक यूज कर रही थी, हम हजार साल पुरानी तीर भाले की तकनीक लेकर लड़ने गए. दोष जयचंद को देते रहे.

आज भी वही हाल है. हर बात हमको वेदों में लिखी मिलती है. एटॉमिक बम से लेकर, इंटरनेट तक. जबकि उसमें फिलॉसफी, देवताओं को प्रसन्न करने के मंत्र, जुआ शराब की बुराई और कुछ क्रूड अपुष्ट हिस्ट्री के सिवा कुछ है नहीं. वीडियो देखिए, दो कौड़ी के पत्रकार डिजिटल दौर में मुगलों को गरिया रहा है.

जिंदगी में अपने शहर के दरोगापारा से आगे नहीं गया. बता रहा है कि बाबर आदिम युग से आया था. अरे, खाने को नहीं था उसके पास…अपनी लंच डिनर की टेबल देखिए. तुअर की दाल, चावल, गेहूं की रोटी, आलू की सब्जी, समोसा, जलेबी…कौन सी इंडियन है. जौ-तिल से आप पितृ तर्पण इसलिए कर रहे हैं, कि मन्त्र लिखे जाने के समय चावल-दाल का पता नहीं था किसी को.

प्रभु श्रीराम या पांडवों ने आलू भुजिया नहीं चखी थी क्योंकि वह तो यहां पुर्तगाली 16वीं सदी में लाये थे. जलेबी, समोसा ईरानी डिश है. देवी देवता, माइथोलॉजिकल स्टोरीज ग्रीक हैं, ईरानी हैं. ऋग्वेद के पहला श्लोक अग्नि को समर्पित है. ईरानी पारसियों वाली पवित्र अग्नि…

मुझे अपने धर्म को नीचा नहीं दिखाना. फारस, मध्य एशिया, मुगलों को ऊंचा नहीं दिखाना. गयी बीती बातें, इसमें शर्म क्या- गर्व क्या ? सभ्यताएं आइसोलेशन में विकासोन्मुख नहीं होती. कल्चरल लेन देन से समृद्ध होती है. हमारी हिस्ट्री, कल्चर अगर इतनी डाइवर्स है, तो मिक्सिंग की वजह से. तो इसे जबरन एकरूप बनाने की हनक क्यों ? इस डाइवर्सिटी को सेलिब्रेट करें. हमने दुनिया से सीखा, और दुनिया को सिखाया है, इसी से समृद्ध हुए. इस समृद्धि पर थूकना बन्द हो.

दिमाग में बिठा लें. हम सबसे बेहतर नहीं. कई मामलों में दूसरे और कुछ मामलों में हम उनसे बेहतर थे. सत्य यही है. जीवन स्वीकारने, और सहेजने से सुंदर बनता है. स्क्रीन पर कब्जा करके बैठे कूपमण्डूको से बचें. सरेआम लानत दें औऱ अपनी बहुआयामी सभ्यता का जश्न मनायें.

  • मनीष सिंह

Read Also –

जाति और धर्म के समाज में प्रगतिशीलता एक गहरी सुरंग में फंसा है
आस्था नंगी होकर सड़कों पर क्यूं घूम रही है ?
ऐतिहासिक ‘सभ्यताएं’ हिंसा, जोर-जबर और औरतों के दमन पर टिकी थी

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

तर्क

Next Post

जन्मदिन पर विशेष : लाहौर नेशनल कॉलेज में भगत सिंह

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

जन्मदिन पर विशेष : लाहौर नेशनल कॉलेज में भगत सिंह

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

साहित्यकार बनने चला मैं…

February 2, 2023

कोरोना संकट : लॉकडाउन और इंतजार के अलावा कोई ठोस नीति नहीं है सरकार के पास

April 21, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.