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मुफ्तखोर-अय्यास पूर्व-जनप्रतिनिधियों से कराहता भारत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 8, 2019
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मुफ्तखोर-अय्यास पूर्व-जनप्रतिनिधियों से कराहता भारत

पेंशन की राशि बढ़ाने के लिए धरने पर बैठे पूर्व जनप्रतिनिधि (ऊपर)

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रेस्ट्रां में अपनी बेटी संग खाना परोसते अमरीकी पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा

उपरोक्त तस्वीर को गौर से देखिये. अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति की जिन्दगी की एक झलक आपको दीख जायेगी. इस बहस में बिल्कुल मत जाईये कि यह तस्वीर फेक है या कब की है ? फेक तस्वीर तो यह कतई नहीं है. यह तस्वीर दिखाती है कि एक अमरीकी मरते दम तक मेहनत करता है. जीवन के हर क्षण को अपने देश के लिए समर्पित करता है. उत्पादन कार्य में लगा रहता है, जीविकापार्जन के लिए हर काम करता है, भले ही वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति ही क्यों न हो. उनके लिए मेहनत करना, किसी भी काम को छोटा या अपमानित नजर से न देखना अमरीकियों की एक विशेषता में शुमार है, जिसका हमारे देश से न कोई नाता-रिश्ता है और न ही किसी को सीखने या सीखाने की तमन्ना.

सामंती मिजाज वाले भारत देश में जनप्रतिनिधि बन जाना मनुष्यता से अलग हो जाना होता है. शायद भगवान हो जाने के बराबर है. प्रधानमंत्री मोदी तो इस देश के भगवान बन गये हैं, जिससे कोई सवाल-जवाब करना तो दूर, उसके विरोध में कुछ बोलना भी मौत को दावत देने जैसा होता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस देश में सामंती मिजाज वाले भगवान का सबसे बेहतरीन उदाहरण है. इन्होंने खुद को अनन्त काल तक जीवित रखने के लिए जमीन के नीचे एक कालातीत को स्थापित कर लिया है, ताकि अनन्त काल बाद जब कभी पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा खुदाई हो तो उसे जमीन के नीचे से नरेन्द्र मोदी की जीवनी मिल सके और उसे वही दर्जा हासिल हो जाये जो आज प्रचीन शिलालेखों को पढ़ने से पुरातत्ववेत्ताओं के द्वारा अतीत के राजाओं को याद किया जाता है.

खैर, इस चक्र में जाने के बजाय हम अमरीकी राष्ट्रपति के जीवन शैली को ध्यान से दखते हैं कि किस तरह वह अपनी बेटी के साथ एक रेस्त्रां में खाना परोस रहे हैं, जो हमारे देश में बने जनप्रतिनिधियों से उम्मीद करना भी, मौत के दावत देने से कम नहीं है. आईये, एक नजर हम सेवानिवृत हो चुके जनप्रतिनिधियों को मुफ्त में परोसे जा रहे हजारों करोड़ रूपये को लुटाये जाने को जानते हैं, जिसे एक आरटीआई कार्यकत्र्ता ने केवल हरियाणा विधानसभा से आरटीआई के माध्यम से हासिल किया है, परन्तु देश के दर्जनों राज्यों के हजारों पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों वगैरह का लेखाजोखा हासिल किया जाये तो इन मुफ्तखोरों के द्वारा हर माह हड़पे जा रहे हजारों करोड़ रूपये जगजाहिर हो जयेगा, जिसके चेहरे पर अमरीकी राष्ट्रपति का उपरोक्त तस्वीर एक तमाचा जड़ता है.

आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने गत 8 अक्टूबर को पूर्व विधायकों की पेंशन की राशि जानने के लिए हरियाणा विधानसभा में आरटीआई लगाई थी. इस संबंध में विधानसभा सचिवालय के राज्य जन सूचना अधिकारी एवं सीनियर लॉ-ऑफिसर शोभित शर्मा ने 30 अक्टूबर को पत्र द्वारा सूचनाएं भेजी, जिससे खुलासा हुआ कि हरियाणा के कुल 262 पूर्व विधायकों की मासिक पेंशन पर प्रति वर्ष 22.93 करोड़ रूपये खर्च किए जा रहे हैं. कपूर ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में पूर्व विधायकों की मासिक पेंशन में 200% से ज्यादा तक की वृद्धि की गई है.

जहां पांच वर्ष पहले इनकी न्यूनतम मासिक पेंशन ₹20,250 रूपये प्रति माह थी. वहीं अब यह न्यूनतम मासिक पेंशन ₹51,750 रूपये हो चुकी है. कुल 161 पूर्व विधायकों को ₹51,750 रूपये मासिक पेंशन दी जा रही है जबकि 39 पूर्व विधायकों को ₹90,543 रूपये प्रति माह पेंशन मिल रही है. वहीं जेल में बंद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को हर माह 2.22 लाख रूपये पेंशन बतौर पूर्व विधायक दी जा रही है. जेल बंद अजय चौटाला को ₹51,750 रूपये पैंशन मिल रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की विधवा जसमा देवी को डबल पेंशन मिल रही है. खुद पूर्व विधायक होने के नाते जसमा देवी को ₹51,750 रूपये प्रतिमाह तथा पूर्व मुख्यमंत्री की विधवा होने के नाते ₹99,619 रूपये प्रतिमाह पारिवारिक पैंशन मिल रही है. विश्व के सबसे अधिक धनी उद्योगपतियों की सूची में शामिल व जिन्दल ग्रुप की चेयरमैन सावित्री जिंदल को प्रतिमाह ₹90,563 रूपये पेंशन मिल रही है जबकि वह ₹642 अरब रूपए (8.8 अरब डॉलर) सम्पति की मालिक भी हैं. इसके अलावा सर्वाधिक मासिक पेंशन ₹2.38 लाख रूपए रेवाड़ी के पूर्व विधायक कैप्टन अजय सिंह यादव ले रहे हैं.

पेंशनधारकों में पूर्व विधायक चन्द्रावती ₹2,22525, प्रो सम्पत सिंह ₹2,14, 763, ऐलनाबाद के पूर्व विधायक भागीराम ₹1,91,475, शमशेर सिंह सुरजेवाला ₹1,75,950, अशोक अरोड़ा ₹1,60,425, हरमोहिन्द्र सिंह चट्ठा ₹1,60,425, चन्द्रमोहन बिश्नोई ₹1,52,663, धर्मवीर गाबा ₹1,52, 663, खुर्शीद अहमद ₹1,52,663, फूलचंद मुलाना ₹1,68,188, मांगेराम गुप्ता ₹1,68,188, शकुंतला भगवाडिय़ा ₹1,68,188, बलबीरपाल शाह ₹2,07,000, सतबीर कादियान ₹1,29,375, स्वामी अग्रिवेश ₹51,750, शारदा रानी ₹1,37,138, देवीदास सोनीपत ₹1,21,613, दिल्लू राम कैथल ₹1,13,850, कमला वर्मा ₹1,13,850, कंवल सिंह हिसार ₹1,21,613, निर्मल सिंह अंबाला ₹1,52,663, मोहम्मद इलयास ₹1,37,138 रुपया प्रति माह शामिल है. कुल 262 पूर्व विधायकों को पेंशन दी जा रही है.

कपूर ने बताया कि पारिवारिक पेंशन योजना के तहत कुल दिवंगत 129 पूर्व विधायकों की पत्नियों पर कुल ₹3.15 करोड़ रूपए वार्षिक खर्च किया जा रहा है. पांच वर्षों में इस पारिवारिक पेंशन में 200% वृद्धि की गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की विधवा जसमा देवी ₹99,619, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा की माता हरदेवी विधवा रणवीर हुड्डा ₹23,288, पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा की माता शारदा रानी विधवा पं० चिरंजीलाल ₹34,931, प्रभात शोभा पंडित विधवा प्रभात शेर सिंह ₹51,750, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रवधु किरण चौधरी विधवा सुरेन्द्र सिंह ₹12,937 मासिक पेंशन ले रही है.

पांच वर्ष पूर्व विधायकों की विधवाओं की न्यूनतम मासिक पारिवारिक पेंशन ₹6750 प्रति माह थी. इसे अब न्यूनतम ₹12,937 किया जा चुका है. पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रवधु किरण चौधरी विधवा सुरेन्द्र सिंह ₹12,937 मासिक पेंशन ले रही है. पांच वर्ष पूर्व विधायकों की विधवाओं की न्यूनतम मासिक पारिवारिक पेंशन ₹6750 प्रति माह थी. इसे अब न्यूनतम ₹12,937 किया जा चुका है.

एक ओर जहां आम नागरिकों से सिलेंडर की सब्सिडी ना लेने की सरकार अपील कर रही है वहीं ये पूर्व विधायक इतनी भारी भरकम पेंशन ले रहे हैं. वहीं रोडवेज की बसों के लिए पैसे की कमी का बहाना बताकर रोडवेज का निजीकरण किया जा रहा है लेकिन पूर्व विधायकों की पेंशन के लिए पैसे की कमी नहीं है. कपूर ने कहा कि साधन सम्पन्न पूर्व विधायकों को स्वेच्छा से इन भारी भरकम पेंशनों का परित्याग करके आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए. इन पेंशनों को तत्काल बंद किया जाना चाहिए.

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