कार्ल मार्क्स : ‘विद्रोह न्यायसंगत है’ – माओ त्से-तुंग
'मार्क्सवाद के अंदर बहुत से सिद्धांत हैं, लेकिन अंतिम रूप से उन सबको सिर्फ एक पंक्ति में समेटा जा सकता...
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Read moreDetailsसुब्रतो चटर्जी अगर आपको लगता है कि मोदी को केजरीवाल की गिरफ़्तारी से होने वाले चुनावी नुक़सान का पता नहीं...
Read moreDetailsअसगर मेंहदी बीसवीं सदी के शुरुआती दौर में राष्ट्रवाद की जो धारा विकसित हुई थी उसकी तीव्रता में वृद्धि तो...
Read moreDetails'नमस्कार, आज चौथा दिन शुरू हो रहा.है हमारे अनशन का. खुले आसमान के नीचे माइनस 16 डिग्री सेल्सियस तापमान में...
Read moreDetailsजो इतिहास को जानता है, वह भविष्य भी जानता है... इतिहास में मेरी रुचि बचपन से रही. पहला परिचय तो...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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