Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सैन्य राष्ट्रवादिता के खिलाफ

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 21, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामीन नेतन्याहू ने 14 जनवरी से 19 जनवरी के बीच भारत की यात्रा की. इस साल भारत और इजरायल के बीच 1992 में शुरू हुए राजननियक संबंध के 25 साल पूरे हुए. इन संबंधों की शुरुआत सोवियत संघ के विघटन के साथ अंत हुए शीत युद्ध के परिप्रेक्ष्य में हुई थी. 2017 में 4 से 6 जुलाई के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इजरायल की यात्रा की थी. 2017 में बालफोर घोषणापत्र के 100 साल पूरे हुए. इस घोषणापत्र में उस समय जीत हासिल करने वाली अंग्रेज सरकार ने यहूदीवादियों के लिए फिलीस्तीन में अलग गृह राष्ट्र बनाने की बात कही थी. 14 मई, 1948 को इजरायल के गठन का 70 साल भी 2018 में पूरा हो रहा है. उस दौर में साम्राज्यवादी ताकतों के खिलाफ लोगों का रुख कड़ा था. नेहरू के दौर में भारत यह मानता रहा कि फिलीस्तीन के लोगों के अधिकारों को बुरी तरह से कुचलकर इजरायल का गठन हुआ है.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

यहूदीवाद को दो चीजों साम्राज्यवाद और नस्लभेद के लिए याद रखना चाहिए. इसने स्थानीय अरब लोगों को वहां से बाहर निकालने और उनके मानवाधिकारों के दमन का काम किया. इजरायल ने यह सब काम यहूदियों के रक्षार्थ करने का दावा किया लेकिन सच्चाई यह है कि यह मानवता के खिलाफ है और इसमें यहूदी भी शामिल हैं. इजरायल ने कभी भी फिलीस्तीन के लोगों को अपने बराबर नहीं माना. फिलीस्तीन का आजादी का संघर्ष इजरायल के साथ-साथ साम्राज्यवादी सोच से भी है. अमेरिका की मदद से और 1948, 1967 और 1973 के तीन युद्धों के जरिए इजरायल ने जाॅर्डन नदी के पश्चिम के पूरे हिस्से पर कब्जा जमा लिया है. इसके अलावा इजरायल ने फिलीस्तीन के लोगों को अपनी ही जमीन पर आने-जाने से रोकने का काम किया है.

नेहरू के बाद के भारतीय राजनीतिज्ञों का असली रंग 1991 में तब दिखा जब संयुक्त राष्ट्र में यहूदीवाद को नस्लवाद मानने वाले प्रस्ताव के खिलाफ भारत हो गया. जबकि 1970 के मध्य में ऐसे ही प्रस्ताव का समर्थन भारत ने किया था. पिछले 25 सालों में भारत का इजरायल से मूलतः सैन्य संबंध रहा है. इसमें हथियार खरीदना और आतंकवाद से बचाव के लिए उनकी सलाहकारी सेवाएं लेना शामिल हैं. भारत इजरायल के हथियारों का सबसे बड़ा बाजार है. आतंकवाद और सुरक्षा क्षेत्र की एक प्रमुख पत्रिका के मुताबिक भारतीय सुरक्षा बल और खुफिया अधिकारियों को कश्मीर में उसी तरह के तौर-तरीके अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है जिस तरह के तौर-तरीके इजरायली सुरक्षा बलों और मोसाद ने फिलीस्तीन के मामले में अपनाया है.

हालांकि, नेतन्याहू के दौरे में किसी नए रक्षा समझौते की घोषणा नहीं हुई लेकिन साझा घोषणापत्र के जरिए भारत ने इजरायली कंपनियों को मेक इन इंडिया के तहत रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए आकर्षित करने की कोशिश की. भारतीय सेना स्वदेशी डिफेंस सिस्टम विकसित करने के बजाए इजरायल की रफैल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए तैयार दिख रही है. ऐसे में इस बारे में दोनों देशों में कोई समझौता शीघ्र ही हो सकता है. केंद्र में हिंदुत्वादी सरकार होने की वजह से दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र के संबंध लगातार बढ़ रहे हैं. दोनों मिलकर मध्यम दूरी के और जमीन से आसमान में हमला करने वाले मिसाइल बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं.

हिंदुत्ववादियों को हमेशा से यहूदीवादियों का सैन्य राष्ट्रवाद अच्छा लगता रहा है. अब दोनों देशों के आतंकवादरोधी व्यापक सहयोग समझौता हो गया है. ऐसे में देखना होगा कि क्या हिंदुत्ववादी सरकार कश्मीर में अधिक आक्रामक होगी? जिस तरह से यहूदी धर्म से यहूदीवाद को अलग करके देखा जाता है उसी तरह से हिंदुत्व को भी हिंदू धर्म से अलग करके देखना होगा. हिंदू धर्म जहां आध्यात्मिक मोक्ष के लिए विभिन्न विश्वासों और विचारों का प्रतीक है तो हिंदूत्ववाद एक फासिस्ट सोच है जिसे नाजीवाद का भारतीय संस्करण कहा जा सकता है. जिस तरह से यहूदियों को यह कहने की जरूरत है कि यहूदीवाद उनकी नुमाइंदगी नहीं करता वैसे ही हिंदुओं को भी यह कहने की जरूरत है कि हिंदुत्ववाद उनका प्रतिनिधित्व नहीं करता. इस मामले में हिंदुओं, यहूदियों और मुस्लमानों सभी को मानवता और फिलीस्तीन के साथ-साथ कश्मीर के लोगों के मानवाधिकारों के साथ खड़ा होना होगा. 

-EPW से साभार

Read More –

आरएसएस का सैनिकद्रोही बयान, देशद्रोही सोच एवं गतिविधियां
सर्वाधिक पिछड़े और प्रतिक्रियावादी विचारों का प्रतिनिधी है भाजपा
क्रूर शासकीय हिंसा और बर्बरता पर माओवादियों का सवाल

Previous Post

संबित पात्रा का सोशल मीडिया पर उड़ा जमकर मजाक

Next Post

दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव का फर्जी आरोप और संजय सिंह का करारा जवाब

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव का फर्जी आरोप और संजय सिंह का करारा जवाब

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

जिन्ना पर विवादः सवालों के घेरे में मोदी सरकार

May 11, 2018

…हमने स्वीकार कर लिया है !

September 2, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.