Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

विज्ञान के टॉपर बच्चे और बारिश के लिए हवन करता देश

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 3, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

पिछले साल की बात है, एक मित्र के घर बारहवीं क्लास में टॉप किये एक बच्चे से बात हो रही थी. वो अपना कुत्ता लेकर उसके साथ खेल रहा था. अचानक उसका पैर एक किताब पर लगा और उसने ‘किताब के पैर छुए’ कान भी पकड़े. खेलते हुए उसका पैर कुत्ते को भी लगा, उसने फिर कुत्ते के प्रति भी क्षमा व्यक्त की. मैंने पूछा कि ये क्यों ? उसने कहा कि ‘ये कुत्ता नहीं भेरू महाराज है. मैंने एक टीवी सीरियल में देखा था, एक देवता की तस्वीर में भी मैंने कुत्ते देखें हैं.’

मैंने उसकी किताब को गौर से देखा. उसकी किताब पर नेम चिट में एक हवा में उड़ने वाले देवता की तस्वीर के बगल से उसका नाम लिखा हुआ था. मैंने पूछा – ‘ये किस तरह का जीव है ?’ उसने कहा – ‘ये जीव नहीं भगवान हैं, जो हवा में उड़ सकते हैं.’

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

मैंने इस बात को इग्नोर करके उससे गुरुत्वाकर्षण के बारे में पूछा. उसने गुरुत्वाकर्षण का पूरा नियम एक सांस में बोलकर सुना दिया. फिर मैंने उससे पलायन वेग (एस्केप वेलोसिटी) और प्लेनेटरी मोशन पर कुछ पूछा, उसने तुरंत दुसरी सांस में इनसे संबंधित सिद्धांत सुना दिए. ये सुनाते हुए वह बहुत प्रसन्न था.

मैंने फिर पूछा कि – ‘एक राकेट को उड़ने और जमीन के गुरुत्व क्षेत्र से बाहर जाने में कितना समय और ऊर्जा लगती है ? क्या यह ऊर्जा एक इंसान या जानवर में हो सकती है ?’ उसने कहा – ‘नहीं इतनी ऊर्जा एक बड़ी मशीन में ही हो सकती है, जैसे कि हवाई जहाज या राकेट.’

मैंने उससे फिर पूछा कि – ‘ये उड़ने वाले देवता कैसे उड़ते होंगे ?’ उसे ये प्रश्न सुनकर बिलकुल आश्चर्य नहीं हुआ. उसने बड़ी सहजता से उत्तर दिया कि – ‘वे भगवान हैं और भगवान कुछ भी कर सकते हैं.’

मैंने फिर आखिर में पूछा कि – ‘क्या भगवान प्रकृति के नियम से भी बड़ा होता है ?’ उसने कहा – ‘मुझे ये सब नहीं पता लेकिन भगवान जो चाहे वो कर सकते हैं.’

 

अभी देश भर में परीक्षा में टॉप कर रहे बच्चों की खबरें आ रही हैं और हर शहर में जश्न हो रहा है. जिन बच्चों ने टॉप किया है निश्चित ही वे बधाई के पात्र हैं. उन्होंने वास्तव में कड़ी मेहनत की है और जैसी भी शिक्षा उन्हें दी गयी, उसमें वे ज्यादा अंक लाकर सफल हुए.

लेकिन इन बच्चों की सफलता का वास्तविक मूल्य क्या है ? क्या ये वास्तव में अच्छे इंसान और अच्छे नागरिक बन पाते हैं ? क्या इनकी शिक्षा – जो अधिकांश अवसर पर विज्ञान विषयों के साथ होती है – इन्हें वैज्ञानिक चित्त और सोचने समझने की ताकत देती है ?

ये टॉपर बच्चे अक्सर ही रट्टू तोते होते हैं, जिन्हें मौलिक चिंतन और विचार नहीं बल्कि विश्वास सिखाये जाते हैं. ये पश्चिमी बॉसेस के लिए अच्छे बाबू, टेक्नीशियन और मैनेजर साबित होते हैं. ये खुद कुछ मौलिक नहीं कर पाते.

परीक्षा परिणामों का यह जश्न मैं 20 सालों से देख रहा हूं और दावे से कह सकता हूं कि इन टॉपर्स में से अधिकांश बच्चों को IIT, JEE, AIIMS इत्यादि की स्पेशल कोचिंग वाले भयानक दबाव वाले रट्टू और प्रतियोगी वातावरण में तैयार किया जाता है.

ये बच्चे किसी ख़ास परीक्षा में पास होने के लिए तैयार किये जाते हैं, इनमें ज्ञान के प्रति, सीखने और समझने के प्रति कितना लगाव है, ये एक अन्य तथ्य है जिसका कोई सीधा संबंध इन बच्चों की उपलब्धियों से नहीं है. ऐसे अधिकांश बच्चे धर्मभीरु, विचार की क्षमता से हीन, आलोचनात्मक चिंतन से अनजान और समाज, संस्कृति और धर्म के ज्ञान से शून्य होते हैं.

अधिकतर इन्हें प्रतियोगिता परीक्षाओं की स्पेशल कोचिंग में उच्चतर विज्ञान और गणित इत्यादि घोट घोटकर पिलाये जाते हैं और घर लौटते ही इन्हें मिथकशास्त्र और महाकाव्यों की तोता मैना की कहानियां पिलाई जाती हैं.

न केवल ये मिथकों और महाकाव्यों में श्रद्धा रखते हैं बल्कि स्कूल कालेज या परिक्षा के लिए जाते समय प्रसाद चढाकर या मन्नत मांगकर भी जाते हैं. ये बच्चे एक तरफ ग्रेविटी, एस्केप वेलोसिटी इत्यादि रटते हैं और दुसरीं तरफ आसमान में पहाड़ लेकर उड़ जाने वाले देवताओं की पूजा भी करते हैं.

ये एक भयानक किस्म का सामूहिक स्कीजोफेनिया है जिसमें एक ही तथ्य के प्रति कई विरोधाभासी जानकारियां और विश्वास लेकर बच्चे जी रहे हैं, वे ज्ञान के किसी भी आयाम में कुछ मौलिक नहीं खोज पाते. वे सिर्फ पहले से ही खोज ली गयी चीजों के अच्छे प्रबंधक या तकनीशियन या बाबू हो सकते हैं लेकिन विज्ञान, कला, साहित्य, दर्शन इत्यादि में कुछ नया नहीं दे पाते हैं.

इन बच्चों का एक ही लक्ष्य होता है कि किस तरह से कोई परिक्षा पास करके जीवन भर के लिए कोई बड़ी डिग्री हासिल कर ली जाए और एक बड़ी कमाई तय कर ली जाए. इसके आगे पीछे जो कुछ है उससे उन्हें कोई मतलब नहीं होता. अधिकांश बच्चों में आरंभ में इस तरह की जिज्ञासा होती है लेकिन हमारी शिक्षा व्यवस्था, हमारे परिवारों के अंधविश्वास पूजा पाठ और कर्मकांड इन जिज्ञासाओं को मार डालते हैं.

आप कल्पना कीजिये जिस परिवार में पहाड़ लेकर उड़ जाने वाले देवता की पूजा होती है, उस घर का कोई बच्चा गुरुत्वाकर्षण के वर्तमान सिद्धांत में कोई कमी निकालकर उसे कभी चुनौती दे सकेगा ? जो बच्चा मन्त्र की शक्ति से विराट रूप धर लिए किसी अवतार की पूजा करता आया है, क्या वह जेनेटिक्स या जीव विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों के कमियां खोजकर कुछ नया और मौलिक प्रपोज कर सकता है ?

निश्चित ही ऐसे बच्चे इस दिशा में अधिक सफल नहीं हो सकते. यह संभव भी नहीं है. जो मन आलोचनात्मक चिंतन कर सकता है वह परीलोक की कहानी को जीवन भर धोकर उसकी पूजा नहीं कर सकता. ये दो विपरीत बातें हैं.

इसीलिये भारत के करोड़ों करोड़ बच्चे, जो किसी न किसी परिक्षा में पास होकर या टॉप करके निकलते रहे हैं, उन्होंने ही मिलकर उस भारत को बनाया है जिसमें मंत्री, नेता और अधिकारी लोग बारिश लाने के लिए हवन कर रहे हैं.

उन्हीं बच्चों ने ये भारत बनाया है जिसमें आज सीमाओं की रक्षा के लिए राष्ट्र रक्षा महायज्ञ हो रहा है और डिफेंस की टेक्नोलोजी फ्रांस और इजराइल से खरीदी जा रही है. उन्हीं बच्चों के बावजूद आज वह भारत सामने है जिसमें गाय के नाम पर या लव जिहाद के नाम पर सरेआम लिंचिंग हो रही है. टॉपर बच्चों के जश्न के बीच इन बातों पर एक बार जरुर गौर कीजियेगा.

  • संजय श्रमण

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

पृथ्वीराज चौहान : एक व्यभिचारी के ‘वीरता’ की कहानी

Next Post

बहादुर शासक जयचंद्र (जयचंद) की मृत्यु कैसे हुई ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

बहादुर शासक जयचंद्र (जयचंद) की मृत्यु कैसे हुई ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हथियारबंद समाज की स्थापना ही एक आखिरी रास्ता है

October 19, 2018

मोदी, भक्त बुद्धिजीवी और भीड़ संस्कृति

June 26, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.