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कविताएं

50 लेख मिले
हिंदी साहित्य पर सोवियत साहित्य का प्रभाव - भीष्म साहनी
गेस्ट ब्लॉग07 Jun 2026

हिंदी साहित्य पर सोवियत साहित्य का प्रभाव - भीष्म साहनी

भीष्म साहनी हिंदी साहित्य पर सोवियत लेखन के प्रभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना आसान नहीं है. यह प्रभाव व्यक्तिगत लेखकों द्वारा डाले गए साहित्यिक प्रभाव के रूप में उतना नहीं आया, जितना कि उस व्यापक

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अंजन कुमार की कविता वैचारिक बोध से लैस, व्यवहारिक कविताएं है
गेस्ट ब्लॉग10 Jul 2025

अंजन कुमार की कविता वैचारिक बोध से लैस, व्यवहारिक कविताएं है

इन्दरा राठौर सुअर एक पशु है. बस सिर्फ एक पशु. जीव जगत में अस्तित्व भी उसका, नाम मात्र का है. न कोई कीमियागिरी है और न कोई चालाकी. अपशिष्ट मल खाता है. अपने आसपास के जीव जगत में जब सुअर को देखता हूं, लग

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आज़ादी की लड़ाई में आदिवासियों के संग्राम का इतिहास
गेस्ट ब्लॉग04 Jun 2025

आज़ादी की लड़ाई में आदिवासियों के संग्राम का इतिहास

आज़ादी की लड़ाई में आदिवासियों के संग्राम का इतिहास कुछ लोग 1857 को आजादी की लड़ाई की प्रथम घटना बताते हैं, यह पूर्णतया गलत है. अंग्रेजों से आजादी की प्रथम लड़ाई जिन लोगों ने शुरू की थी

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एक कामलोलुप जनकवि आलोकधन्वा की नज़र में मैं रण्डी थी : असीमा भट्ट
गेस्ट ब्लॉग19 Apr 2025

एक कामलोलुप जनकवि आलोकधन्वा की नज़र में मैं रण्डी थी : असीमा भट्ट

आलोकधन्वा हिन्दी के जनवादी कविताओं की दुनिया में बड़ा नाम है. उनकी कविताओं में प्रेम की एक अजस्त्र धारा बहती रही है. उनकी पत्नी असीमा भट्ट उनपर और उनके चरित्र पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए 2011 में ‘कथादेश’ पत्रिका में धारावाहिक रूप से अपनी और आलोक धन्वा की विवा

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इंटरनेट वस्तुतः कम्युनिकेशन की महानतम ऊंचाई है
गेस्ट ब्लॉग08 Mar 2025

इंटरनेट वस्तुतः कम्युनिकेशन की महानतम ऊंचाई है

इंटरनेट वस्तुतः कम्युनिकेशन की महानतम ऊंचाई है जगदीश्वर चतुर्वेदी यह डिजायन का युग है. आप इन दिनों जो कुछ भी कम्युनिकेट करें

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सुब्रतो चटर्जी की पांच कविताएं
कविताएं21 Feb 2025

सुब्रतो चटर्जी की पांच कविताएं

सुब्रतो चटर्जी की पांच कविताएं 1. मेरा आना मेरा आना एक बहस का आग़ाज़ था और ये बहस बेमानी नहीं थी मेरे आने से टूट गए कई विंब ज़रख़रीद ग़ुलामों के चिकने चुपड़े चेहरे जो तुम्हारे ज़ेहन में

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मौमिता आलम के ठंडे उत्तरों के पीछे खौलते सवालों की कविता
पुस्तक / फिल्म समीक्षा09 Feb 2025

मौमिता आलम के ठंडे उत्तरों के पीछे खौलते सवालों की कविता

मौमिता आलम के ठंडे उत्तरों के पीछे खौलते सवालों की कविता । मूल्य 250/रूपये, प्रकाशन: न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, अनुवाद: अमिता शीरीं मनीष आ

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सुब्रतो चटर्जी की दो कविताएं
कविताएं22 Jan 2025

सुब्रतो चटर्जी की दो कविताएं

1. बुझी चिमनी बुझी चिमनी की कालिख़ बंट रही है जिसे लेना है अंजुरी भर ले जाओ इकहत्तर लाशों की एक सौ बयालीस बंद आंखों की कहानी उन करोड़ों खुली आंखों की कहानी से कुछ अलग नहीं है जिनमें मरे हुए सपनों का पिरामिड हज़ारों सालों से सह जाता है सहरा की गर्दो ग़ुबार इस स

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राजनीतिक कार्यकर्ता मनीष आजाद की गिरफ्तारी की तीखी निंदा
गेस्ट ब्लॉग07 Jan 2025

राजनीतिक कार्यकर्ता मनीष आजाद की गिरफ्तारी की तीखी निंदा

राजनीतिक कार्यकर्ता मनीष आजाद की गिरफ्तारी की तीखी निंदा सीएएसआर यानि कैंपेन एगेंस्ट स्टेट रिप्रेशन ने एटीएस द्वारा की गयी राजनीतिक कार्यकर्ता मनीष आजाद की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की है

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कहीं से लाओ वह दिमाग़ जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता : रघुवीर सहाय से पहली और आखिरी मुलाकात
गेस्ट ब्लॉग10 Dec 2024

कहीं से लाओ वह दिमाग़ जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता : रघुवीर सहाय से पहली और आखिरी मुलाकात

कहीं से लाओ वह दिमाग़ जो ख़ुशामद आदतन नहीं करता : रघुवीर सहाय से पहली और आखिरी मुलाकात चन्द्रभूषण अक्टूबर 1990 का आखिरी हफ्ता

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नक्सलबाड़ी उभार के दौरान उभरे महत्वपूर्ण जनवादी कवि वेणुगोपाल
गेस्ट ब्लॉग10 Dec 2024

नक्सलबाड़ी उभार के दौरान उभरे महत्वपूर्ण जनवादी कवि वेणुगोपाल

सारांश : वेणुगोपाल एक महत्वपूर्ण जनवादी कवि थे, जिन्होंने नक्सलबाड़ी विद्रोह के दौरान अपनी पहचान बनाई. उनकी कविताओं में विद्रोह और क्रांति की भावना को व्यक्त किया गया है, जो उस समय के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को दर्शाता है. वेणुगोपाल की कविताओं में नक्सलबा

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विष्णु नागर की दो कविताएं
कविताएं10 Nov 2024

विष्णु नागर की दो कविताएं

1. अफवाह यह अफवाह है कि नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं अमित शाह गृहमंत्री आरएसएस हिंदूवादी संगठन है पुलिस को मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार ये अफवाहें जवाहरलाल नेहरू अपने गुप्त ठिकाने से फैला रहे हैं यह अफवाह भी उन्हीं की फैलाई हुई है कि भारत एक देश है ध

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परिवर्तनकामी संस्कृतिकर्मी के योद्धा शहीद अनिल ओझा
गेस्ट ब्लॉग26 Oct 2024

परिवर्तनकामी संस्कृतिकर्मी के योद्धा शहीद अनिल ओझा

प्रसिद्ध सांस्कृतिककर्मी अनिल ओझा अक्सर कहा करते थे, 'अगर कोई मुझसे दो मिनट बात करने का मौका देगा तो वह कभी उन्हें नहीं मार पायेगा.' लेकिन उनकी हत्या करने वालों ने उन्हें बात करने का भी वक्त दिया या नहीं, हम कभी नहीं जान पायेंगे. उनकी मौत सांस्कृतिककर्मियों और

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युद्ध में...
कविताएं21 Oct 2024

युद्ध में...

युद्ध में... युद्ध में सिर्फ़ हथियार के व्यापारी ही खुश नहीं होते कफ़न के व्यापारी देशों के राजा और अनेक भी खुश होते हैं फिर भी मैं उस युद्ध के खिलाफ हो कर लिजलिजी कविताएं नहीं लिख सकता

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पैलियो जिनॉमिक्स और स्वांटे पाबो : विलुप्त सजातीय जीवों का क्या कुछ हममें बचा है ?
गेस्ट ब्लॉग07 Oct 2024

पैलियो जिनॉमिक्स और स्वांटे पाबो : विलुप्त सजातीय जीवों का क्या कुछ हममें बचा है ?

पैलियो जिनॉमिक्स और स्वांटे पाबो : विलुप्त सजातीय जीवों का क्या कुछ हममें बचा है ? चन्द्र भूषण स्वीडिश जीवविज्ञानी स्वांटे पाब

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पुरुष कवि सदानन्द शाही की स्त्री विषयक कविता
गेस्ट ब्लॉग04 Oct 2024

पुरुष कवि सदानन्द शाही की स्त्री विषयक कविता

पुरुष कवि सदानन्द शाही की स्त्री विषयक कविता रीता दास राम मित्रों, पिछले चार साल से आप 'स्त्री दर्पण' की गतिविधियों को देखते

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भागी हुई लड़कियां : एक पुरुष फैंटेसी और लघुपरक कविता
गेस्ट ब्लॉग19 Sep 2024

भागी हुई लड़कियां : एक पुरुष फैंटेसी और लघुपरक कविता

भागी हुई लड़कियां : एक पुरुष फैंटेसी और लघुपरक कविता कृष्ण समिद्ध आलोक धन्वा की कविता 'भागी हुई लड़कियां' (1988) को पढ़ते हुए

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नवनीत पांडेय : 'भले ही हम थोड़े हैं पर हथौड़े हैं'
पुस्तक / फिल्म समीक्षा01 Sep 2024

नवनीत पांडेय : 'भले ही हम थोड़े हैं पर हथौड़े हैं'

नवनीत पांडेय : 'भले ही हम थोड़े हैं पर हथौड़े हैं' इन्दरा राठौड़ यदि पाने की महत्वाकांक्षा से आप मुक्त हैं , तो खोने का मलाल भ

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अभावों में भी क्रांतिकारी गीतों की मशाल जलाते रहे शंकर शैलेंद्र
गेस्ट ब्लॉग01 Sep 2024

अभावों में भी क्रांतिकारी गीतों की मशाल जलाते रहे शंकर शैलेंद्र

अभावों में भी क्रांतिकारी गीतों की मशाल जलाते रहे शंकर शैलेंद्र मुनेश त्यागी तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर अगर कहीं

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संक्षिप्त जीवनी : भारतीय क्रान्ति के महानायक चारु मजुमदार
गेस्ट ब्लॉग17 Aug 2024

संक्षिप्त जीवनी : भारतीय क्रान्ति के महानायक चारु मजुमदार

संक्षिप्त जीवनी : भारतीय क्रान्ति के महानायक चारु मजुमदार चारु मजुमदार का जन्म बनारस में सन्‌ 1917 में हुआ था. वहां उनके पिता वीरेश्वर मजुमदार एक स्कूल मास्टर थे. बीस के दशक के पूर्वार्ध

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क्रांतिकारी कवि वरवर राव की नजरबंदी त्रासदपूर्ण अन्याय रही !
पुस्तक / फिल्म समीक्षा21 Jul 2024

क्रांतिकारी कवि वरवर राव की नजरबंदी त्रासदपूर्ण अन्याय रही !

क्रांतिकारी कवि वरवर राव की नजरबंदी त्रासदपूर्ण अन्याय रही ! इंदरा राठौड़ सत्ता की कान में आसानी से कोई जूं रेंगती नहीं है. इस

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निर्मला पुतुल की दो कविताएं
कविताएं21 Jul 2024

निर्मला पुतुल की दो कविताएं

1. वहीं ब्याहना मुझे ! मुझे उतनी दूर मत ब्याहना जहां मुझसे मिलने जाने ख़ातिर घर की बकरियां बेचनी पड़े तुम्हें मत ब्याहना उस देश में जहां आदमी से ज़्यादा ईश्वर बसते हों जंगल नदी पहाड़ नहीं हों जहां वहां मत कर आना मेरा लगन वहां तो कतई नहीं जहां की सड़कों पर मान

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बंदूकों की गूंज के बीच दण्डकारण्य की जंगलों से प्रकाशित 'प्रभात’ के लिए अविस्मरणीय योगदान देने वाली कॉ. आलूरी ललिता
गेस्ट ब्लॉग13 Jul 2024

बंदूकों की गूंज के बीच दण्डकारण्य की जंगलों से प्रकाशित 'प्रभात’ के लिए अविस्मरणीय योगदान देने वाली कॉ. आलूरी ललिता

बंदूकों की गूंज के बीच दण्डकारण्य की जंगलों से प्रकाशित 'प्रभात’ के लिए अविस्मरणीय योगदान देने वाली कॉ. आलूरी ललिता नक्सलबाड़ी आंदोलन ने तमाम मानवीय मूल्यों पर चौतरफा शानदार प्रभाव डाला

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उसे गोली मार दी गई...
कविताएं19 Jun 2024

उसे गोली मार दी गई...

वह छः महीने की बच्ची थी उसका सबसे बड़ा दोष था आदिवासी घरों में पैदा होना वह भूख लगने पर जोर से या आहिस्ता से रोयी थी उसे मां दुध पिलाती उससे पहले गोली मार दी गई इस तरह शांत कर दी गई सत्ता द्वारा बच्ची के पेट की भूख. बच्ची की मां की चीख जंगल में गूंज उठी दिल्ली

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सुब्रतो चटर्जी की तीन कविताएं
कविताएं21 May 2024

सुब्रतो चटर्जी की तीन कविताएं

1. कोशिश घर से दूर एक घर बसाने की कोशिश है और बंदूक़ के निशाने पर मेरी रोटी भी है कितना अच्छा होता अगर एक रोटी के पीछे हज़ारों लोग नहीं होते या हज़ारों रोटियां कुछ लोगों के पीछे नहीं होती ऐसे में मुझे अपने घर से दूर और कोई घर बसाने की ज़रूरत भी नहीं होती ध्यान

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जब कहानी ने पलटकर कहानीकार से सवाल किया
गेस्ट ब्लॉग30 Apr 2024

जब कहानी ने पलटकर कहानीकार से सवाल किया

जब कहानी ने पलटकर कहानीकार से सवाल किया प्रियदर्शन लेखक और मनोविज्ञान विशेषज्ञ विनय कुमार जी ने जानना चाहा कि कविताओं पर तो ब

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'A Billion Colour Story' : क्या 'नए भारत' में हमने सारी कविताएं खो दी हैं...?
गेस्ट ब्लॉग03 Apr 2024

'A Billion Colour Story' : क्या 'नए भारत' में हमने सारी कविताएं खो दी हैं...?

'A Billion Colour Story' : क्या 'नए भारत' में हमने सारी कविताएं खो दी हैं...? पद्मकुमार नरसिंहमूर्ती की फ़िल्म 'A Billion Colour Story': का प्रमुख पात्र 11 साल का हरी अजीज़ अपनी 'हिन्दू'

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कविताएं03 Apr 2024

सुब्रतो चटर्जी की दो कविताएं

हर रोज़ समंदर की तरफ़ खुलती है एक हत्यारी खिड़की और वो लड़की अपनी तर्जनी के पोर में समेटकर एक चुटकी अमावस खींच लेती है दो रेखाएं उसे यक़ीन है दुनिया के मटमैले मानचित्र को देखने में मददगार है अमावस का टुकड़ा हत्यारी खिड़की बहा ले जाती है उसे उसके खुले बाल बर्फी

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प्रेम की अधूरी कविताएं
कविताएं02 Apr 2024

प्रेम की अधूरी कविताएं

दोस्त कहते हैं - प्रेम पर कविता क्यों नहीं लिखते ? मैं दिखाता हूं उन्हें कई डायरियां, कुछ भरी, कुछ अधूरी आड़े - तिरछे रेखाचित्रों से सजे पन्ने प्रेम कविताओं के .... जिनमें से बहुत कम ही हैं जो पूरी हो सकीं डायरी के पन्ने के बीच रखे गुलाब की पंखुड़ियां सूख कर झड़

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हाशिये पर...
कविताएं13 Mar 2024

हाशिये पर...

और इस तरह धीरे धीरे उन्होंने धकेल दिया मुझे हाशिये पर फुटपाथ की ज़िंदगी पर छपे रिसालों में छपी हुई मेरी कविताएं चकले पर रात बीताने वालों को पसंद नहीं आई ये और बात है कि आमदनी घटने के बाद ज़्यादातर लोगों ने यहां अपने घरों को ही मुफ़्त का चकला समझ लिया जहां आदमी

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लौट आओ...
कविताएं16 Feb 2024

लौट आओ...

मैं जिस बसंती का हाथ थामे एक रंग बिरंगे जंगल में समाना चाहता हूं वहां तुम्हारी चाहतों का एक चिपचिपा सा लेप मौसम की पहली मंजरी सा आम के डंठल पर टिकने को बेक़रार है आम के गाल पर टपके हुए आंसू प्रेम के अतिरेक से उपजे हुए स्वेद हैं यह और बात है कि किसान की भूख और

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आदिवासी जनकवि विनोद शंकर की चार कविताएं : क्रान्ति
कविताएं26 Jan 2024

आदिवासी जनकवि विनोद शंकर की चार कविताएं : क्रान्ति

1. क्रान्ति बीसवीं सदी ने कई क्रांतियां देखीं पर 21वीं सदी ने अब तक एक भी क्रांति नहीं देखी है जबकि इसका दो दशक बीत चुका है और तीसरा दशक चालू है इसलिए पूरी दुनिया का शोषक वर्ग बेकाबू है क्योंकि उन्हें क्रांतियां ही नियंत्रित करती हैं जब ये कहीं होगी तभी पूरी द

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जनकवि विनोद शंकर की चार कविताएं : राम की प्राण प्रतिष्ठा !
कविताएं21 Jan 2024

जनकवि विनोद शंकर की चार कविताएं : राम की प्राण प्रतिष्ठा !

1. हे राम हे राम अब यहां क्या है तुम्हारा काम ? अब किसका प्रतिशोध लेने आएं हो ? अब किसका जमीन छीनने आएं हो ? अब किसकी अग्निपरीक्षा लेनेवाले हो ? अब किसे देश निकाला देने वाले हो ? देखो अब तानाशाही नही चलेगी तुम्हे भी अब सजा मिलेगी तडका से लेकर शंबूक तक सबने न्य

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अकविता
कविताएं04 Jan 2024

अकविता

उम्मीदें जंग खाई कच्चे लोहे के बनी कीलों जैसी थीं समुद्र की नमकीन हवाओं से खोखले हुए दीवारों पर टंगी मरे हुए, लेकिन स्वनामधन्य पूर्वजों की तरह फूलों की घाटी में तुम्हारी तफ़रीह से इनका कोई वास्ता हो या न हो एक हसीन धोखे में रहने की आदत उतनी भी बुरी नहीं है जित

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'Salt of this Sea': एक अदद घर की तलाश में फिलिस्तीन
गेस्ट ब्लॉग23 Oct 2023

'Salt of this Sea': एक अदद घर की तलाश में फिलिस्तीन

'Salt of this Sea': एक अदद घर की तलाश में फिलिस्तीन चांद से वापस लौटने के बाद नील आर्मस्ट्रांग ने पत्रकारों के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि 'चांद पर पहुंचने का सुख चाहे जितना बड़ा हो,

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लेखन का सबब अर्थात, मैं क्यों लिखता हूं ?
गेस्ट ब्लॉग22 Oct 2023

लेखन का सबब अर्थात, मैं क्यों लिखता हूं ?

लेखन का सबब अर्थात, मैं क्यों लिखता हूं ? तुषार कान्ति, भूतपूर्व माओवादी नेता स्कूल के दिनों में अन्य स्कूल की एक लड़की के प्रत

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गायब होता फिलिस्तीन, कब्जाता इस्राइल और लड़ता हमास
गेस्ट ब्लॉग11 Oct 2023

गायब होता फिलिस्तीन, कब्जाता इस्राइल और लड़ता हमास

गायब होता फिलिस्तीन, कब्जाता इस्राइल और लड़ता हमास मोहम्मद शाहीन जब भी इस्राइल ने बेगुनाह फिलिस्तीनियों पर बमबारी करनी होती है

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फिलिस्तीन : मिया खलीफा का एक व्यक्तित्व यह भी है...
गेस्ट ब्लॉग10 Oct 2023

फिलिस्तीन : मिया खलीफा का एक व्यक्तित्व यह भी है...

फिलिस्तीन : मिया खलीफा का एक व्यक्तित्व यह भी है... ये कहानी मिया खलीफा की है, जिनके प्रति रेस्पेक्ट आज हजारों गुना बढ़ गया है. अपनी मातृभूमि के लिए फाइटिंग स्प्रिरिट क्या होती है, उसका

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इसराइल-गाजा युद्ध के लिए नेतन्याहू ज़िम्मेदार हैं - इजरायली अखबार
गेस्ट ब्लॉग10 Oct 2023

इसराइल-गाजा युद्ध के लिए नेतन्याहू ज़िम्मेदार हैं - इजरायली अखबार

इजराइल के मुख्यधारा का अखबार 'Haaretz' 7 अक्टूबर के हमले के अगले ही दिन 8 अक्टूबर अंक के अपनी संपादकीय में लिखता है कि 'जो कुछ हुआ, उसकी मुख्य जिम्मेदारी 'बेंजामिन नेतन्याहू' की है क्योंकि उन्होंने फिलिस्तीनियों के अस्तित्व और उनके हकों को नजरंदाज किया.' क्या

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आतंकवादी देश इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी जनता का शानदार प्रतिरोध
ब्लॉग10 Oct 2023

आतंकवादी देश इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी जनता का शानदार प्रतिरोध

आतंकवादी देश इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी जनता का शानदार प्रतिरोध 7 अक्टूबर की अहले सुबह फिलिस्तीन की जनता का प्रतिनिधित्व करने वाली क्रांतिकारी संगठन हमास की ओर से आतंकवादी देश इजरायल पर

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फिलिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की पांच कविताएं
कविताएं09 Oct 2023

फिलिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की पांच कविताएं

फिलिस्तीनी कवि महमूद दरवेश की पांच कविताएं 1. आदमी के लिए उन्होंने उसका मुंह कपड़ा ठूंसकर बंद कर दिया उसके हाथ चट्टान से बांध दिये और कहा - 'हत्यारा' उन्होंने उसका खाना, उसके कपड़े और झंड़

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पुष्पराज की कविताएं : हमारी क्षय हो !
कविताएं25 Sep 2023

पुष्पराज की कविताएं : हमारी क्षय हो !

पुष्पराज सरकार के साथ सहकार करिए और पूछिए कि सवाल क्या है ? एक मुख्यमंत्री के लजीज बनिए और कहिए कि युद्ध जारी है जनता गोली दाग रही है रेल पटरी से उतर चुकी है और आप कह रहे हैं कि स्त्रियों के नाम बदलने

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(संशोधित दस्तावेज) भारत देश में जाति का सवाल : हमारा दृष्टिकोण - भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)
गेस्ट ब्लॉग19 Sep 2023

(संशोधित दस्तावेज) भारत देश में जाति का सवाल : हमारा दृष्टिकोण - भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय कमेटी द्वारा ‘ भारत देश में जाति का सवाल-हमारा दृष्टिकोण ’ नामक दस्तावेज मई 2017 में जारी किया गया था. उसके बाद कुछ सीसी सदस्यों से और राज्य कमेटियों के सदस्यों से दस्तावेज पर कुछ सलाहों, व्याख्याओं और संशोधन केंद्रीय कमेटी के पास आ

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बुद्धिजीवियों को प्रताड़ित कर सरकार माओवादियों की नई फसल तैयार कर रही है ?
ब्लॉग05 Sep 2023

बुद्धिजीवियों को प्रताड़ित कर सरकार माओवादियों की नई फसल तैयार कर रही है ?

बुद्धिजीवियों को प्रताड़ित कर सरकार माओवादियों के नई फसल तैयार कर रही है ? (तस्वीर - बांये, साहित्यकार विनोद शंकर, दांये, इंजीनियर रोहित कुमार) अभी खबर आई है कि केन्द्र की मोदी सत्ता के

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बेटी बनाम कविता
कविताएं03 Sep 2023

बेटी बनाम कविता

कोख में बेटियां ही नहीं मारी जाती 'कोख' में कविताएं भी मारी जाती हैं कुछ बेटियां कोख के बाहर भी मारी जाती हैं कुछ कविताएं कागज़ पर उतरने के बाद भी कत्ल कर दी जाती हैं. कोख में 'बीज के अखुआते' ही औरत सबसे पहले घर के 'स्वामी' के बारे में सोचती है ठीक वैसे ही कवि

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बुद्धिलाल पाल की तीन कविताएं
कविताएं29 Aug 2023

बुद्धिलाल पाल की तीन कविताएं

1. चिर-निद्रा फासिस्ट के सिर पर कोई सींग नही होते दिखता है आदमी जैसा चलना फिरना बात करना आदमी जैसे ही लंबे दांत नाखून भी नहीं होते हैं धर्म साहित्य के गुटखों से विषैले सांप्रदायिक प्रवचनों सामंतवाद पूंजीवाद के अमानवीयकरण जहरों से भरा अर्ध निद्रा तंद्रा में मूर

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भारत की मेहनतकश जनता के सच्चे मित्र सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉ. मिलिंद बाबूराव तेलतुमब्डे अमर रहें !
गेस्ट ब्लॉग28 Aug 2023

भारत की मेहनतकश जनता के सच्चे मित्र सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉ. मिलिंद बाबूराव तेलतुमब्डे अमर रहें !

आम मेहनतकश जनता के सच्चे मित्र सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय कमेटी सदस्य कॉ. मिलिंद बाबूराव तेलतुमब्डे अमर रहें ! 13 नवंबर, 2021 को महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ राज्यों के सीमावर्ती ग्राम पारेव

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'साहित्य में प्रतिरोध की क्या भाषा होनी चाहिए ?' बहस अभी खत्म नहीं हुआ है !
गेस्ट ब्लॉग11 Aug 2023

'साहित्य में प्रतिरोध की क्या भाषा होनी चाहिए ?' बहस अभी खत्म नहीं हुआ है !

'साहित्य में प्रतिरोध की क्या भाषा होनी चाहिए ?' बहस अभी खत्म नहीं हुआ है ! विनोद शंकर 'साहित्य में प्रतिरोध की क्या भाषा होन

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