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1999 में नाटो ने यूगोस्लाविया पर हमला क्यों किया ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 27, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
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1999 में नाटो ने यूगोस्लाविया पर हमला क्यों किया, जिसमें लगभग 2,500 नागरिक मारे गए ? यहाँ कुछ संभावित उत्तर दिए गए हैं, जो व्लादिमीर गोलस्टीन को उस बदसूरत प्रकरण से प्रतिबिंबित हुए हैं.

‘मेरे होटल से सड़क के पार, ऊँची ऑफिस बिल्डिंगों के पीछे, सेंट मार्क का काफी बड़ा चर्च है. सेंट मार्क की छाया में छिपा एक छोटा रूसी रूढ़िवादी चर्च है. चर्च ऑफ द होली ट्रिनिटी, जिसे केवल रूसी चर्च के रूप में जाना जाता है, जो गोरों के रूसी गृहयुद्ध के नेता बैरन प्योत्र निकोलायेविच रैंगल के अवशेषों की शरणस्थली के रूप में प्रसिद्ध है. अब इसे ढूँढना मुश्किल है, लेकिन सौभाग्य से एक दोस्त मुझे वहाँ ले गया.

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जैसा कि हम चर्च के चारों ओर देख रहे थे, हालाँकि हमें रैंगल में कोई विशेष दिलचस्पी नहीं थी, कुछ रूसियों ने मुझे उनकी कब्र के सामने उनकी तस्वीर लेने के लिए कहा. चित्र के लिए एक उचित कोण खोजने की कोशिश करते हुए, मैंने पास की एक दीवार पर एक छोटी-सी पट्टिका देखी. इस पट्टिका में उन रूसियों के नाम सूचीबद्ध थे जो कोसोवो में अलगाववादी अल्बानियाई लोगों के साथ संघर्ष के दौरान यूगोस्लाव सर्ब के लिए लड़ते हुए मारे गए और फिर 1999 में यूगोस्लाविया के बाद के नाटो बमबारी में मारे गए थे.

उक्त चर्च की विजिट को समाप्त करते हुए हमने पार्क के शीर्ष की ओर एक छोटा-सा रास्ता लिया. वहाँ हमने उस युद्ध का एक और क्रूर संकेत देखा : टीवी केंद्र के बगल में एक नष्ट हुई इमारत. इसमें एक पट्टिका भी थी, लिखा था ‘ज़श्तो’ (किस लिए ? क्यों ?). नीचे उस हमले के दौरान मारे गए टीवी केंद्र के लोगों के नाम थे. तत्कालीन यूगोस्लाव सरकार के अनुसार, नाटो द्वारा कुल मिलाकर 2,500 नागरिक मारे गए होंगे, हालांकि वास्तविक संख्या शायद ही कभी पता चल पाये.

एक ओर, प्रश्न ‘ज़श्तो’ उदासी भरा और उत्तेजक दोनों है. इसका अर्थ है घावों का फटना, भूलने से इन्कार और नए सिरे से शुरू करना. दूसरी ओर, भविष्य के विनाश और मूर्खतापूर्ण हत्याओं को रोकने के लिए इस प्रश्न का उत्तर खोजने की स्पष्ट आवश्यकता है.

हमें आधिकारिक आख्यानों में इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलेगा. अधिकारिक व्याख्यान हमे बताते हैं कि महान क्लिंटन प्रशासन ने कोसोवो के यूगोस्लाव प्रांत में अत्यंत जटिल स्थिति में सर्बिया और पड़ोसी क्षेत्रों में सर्बों पर अल्पसंख्यकों के ‘सम्मान’ में बमबारी करके सर्बों द्वारा मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को रोकने का फैसला किया, (वास्तव में अल्बानिया में कोसोवो अल्बानियाई लोगों का बड़ा पलायन नाटो के बम गिरने के बाद ही शुरू हुआ.). क्या नाटो और अमेरिका लिमिट टेस्टिंग कर रहा था ?

इन आधिकारिक खबरों के पीछे एक और दु:खद तस्वीर सामने आती है. ये लोग क्यों मरे ? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्राधिकरण को इग्नोर कर, बिना आत्मरक्षा के प्रमाण या संयुक्त राष्ट्र चार्टर की शर्तो के उल्लंघन बिना नाटो का यह अभियान क्यों आगे बढ़ा ? क्या यह मेडेलीन अलब्राइट, बिल क्लिंटन और सुसान राइस जैसे उदारवादी हस्तक्षेपवादियों की यू.एस. और नाटो नेताओं की सत्ता की लालसा को संतुष्ट करने के लिए था ? या रवांडा में 1994 के नरसंहार का जवाब देने में अपनी विफलता पर क्लिंटन प्रशासन के अपराध को शांत करने के लिए ?

क्या इसका उद्देश्य वियतनाम युद्ध के बाद से कोसोवो में कैंप बॉन्डस्टील के बाद से यूरोप में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा स्थापित करना था ? या कोसोवो की विशाल खनिज संपदा और सुश्री अलब्राइट सहित अन्य व्यावसायिक अवसरों तक अमेरिकी पहुंच के लिए ? या यह अंततः पश्चिम और सोवियत संघ के बीच ‘तीसरे रास्ते’ में एक सफल यूगोस्लाव प्रयोग को खत्म करने के लिए था ?

ऐसा लगता है कि इन सभी कारणों से इन लोगों को मरना पड़ा और वाशिंगटन में उदारवादी हस्तक्षेपवादियों और नियोकॉन्स द्वारा तैयार किए गए सिद्धांतों (R2P) और पूर्ण स्पेक्ट्रम वाले प्रभुत्व की ‘रक्षा के लिए जिम्मेदारी’ के सिद्धांतों को व्यवहार में लाना पड़ा.

जो लोग मारे गए वे अनिवार्य रूप से एक न्यू वर्ल्ड ऑर्डर प्रयोग के गिनी पिग थे, यह देखने के लिए कि R2P – Responsibility to Protect – को लागू करने के लिए दुनिया को कितनी दूर धकेला जा सकता है, एक ऐसी नीति जिसका इस्तेमाल शाही महत्वाकांक्षाओं को छिपाने के लिए किया जा सकता है. और यह काम किया.

यूगोस्लाविया अपने अप्रचलित चार्टर के जनादेश के बाहर संचालित नाटो की शक्ति का सामना करने में असमर्थ था : अर्थात् एक कथित सोवियत खतरे के खिलाफ पश्चिमी यूरोप की रक्षा करने के लिए नाटो ने यह किया. वास्तव में कोई यह तर्क दे सकता है कि शीत युद्ध समाप्त होने के साथ, यूगोस्लाविया पर हमले का एक अन्य उद्देश्य नाटो को अस्तित्व का औचित्य प्रदान करना था. (यह बाद में अफगानिस्तान और फिर लीबिया में अपने संचालन के कानूनी रंगमंच के बाहर और भी आगे बढ़ जाएगा.)

सर्बों की मदद के लिए रूस बहुत कम कर सकता था. तब एक परीक्षण के रूप में चीनी दूतावास भी निशाने पर आया था, ऐसा चीनी नागरिकों सहित सबको लगता है. इस हमले में चीनी दूतावास पपूरी तरह नेस्तनाबूद हो गया था, कितने मरे मेरा ख्याल है ये बात कभी पता नहीं चलेगी. हालांकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा कि यह एक ‘गलती’ थी. जो हो, कड़वी हकीकत यह है कि चीनियों ने बदले में कुछ नहीं किया.

इस प्रकार दुनिया में R2P लागू हो गया – यूगोस्लाव सर्ब के लिए कोई सुरक्षा नहीं. अमेरिकी शक्ति की सीमाओं और उसके प्रतिरोध की सीमाओं का पता लगाने के लिए उन्हें प्रयोग में मरना पड़ा.

  • व्लादिमीर गोल्डस्टीन (अनुवाद जॉर्ज ऑरवेल, 03 Aug 18)

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