Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

एक रिसर्च स्कॉलर का राष्ट्रभक्ति पर एक संस्मरण

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 21, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

एक रिसर्च स्कॉलर का राष्ट्रभक्ति पर एक संस्मरण

अपनी रिसर्च के 4-5 साल तक अपने रिसर्च सुपरवाइजर की अध्यक्षता में वाराणसी के विभिन्न विद्यालयों में बी.एड. के छात्रों को टीचिंग अभ्यास के लिए ले जाता रहा हूंं. इस दौरान बिमल चंद घोष मूक बधिर विद्यालय तथा सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय सबसे अधिक जाना हुआ है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

वराणसी के विद्यालयों में बीएचयू के प्रोफेसर्स, छात्र एवं कैंपस से जुड़े लोगों की बहुत अच्छी प्रतिष्ठा है. टीचिंग हेतु विद्यालय बिलकुल निःशुल्क प्राप्त होते हैं. अध्यापक, प्रबंधन सभी प्रैक्टिस टीचिंग के दौरान खूब सहयोग करते हैं. वहीं दूसरी ओर मेरठ में एक सड़ा-सा विद्यालय पाने के लिए आपको 10,000 से 30,000 रुपया चुकाना पड़ जाता है. खैर अब मुख्य मुद्दे पर आता हूंं.

सरस्वती शिशु मंदिर में अपने अंतिम दिन प्रशिक्षु अध्यापकों ने विद्यालय का शुक्रिया अदा करने के लिए एक सांस्कृतिक और धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम का आयोजन किया. बीएचयू की परम्परा के अनुसार कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने राष्ट्रगान प्रारम्भ ही किया था, तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने मेरे मस्तिष्क पर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों की बड़ी अमिट छाप छोड़ी.

प्रमुख आचार्य जी जो संघ के एक बड़े पदाधिकारी भी थे, ने भरे असेंबली हाल में पूरी तन्मयता से राष्ट्रगान गाते छात्रों को बीच में रोक दिया और राष्ट्रगान और रविंद्रनाथ टैगोर की आलोचना भरे सभागार में उस भाषा में गरियाकर की, जिसे अपने पोस्ट में मैं उन शब्दों का उल्लेख भी नहीं कर सकता हूंं. उन्होंने बताया कि हम अपने यहांं सुबह की प्रार्थना में गायत्री मंत्र का प्रयोग करते हैं. वेद मंत्रों का प्रयोग करते हैं. राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का प्रयोग करते हैं. हम जन गण मन राष्ट्र गान का बहिष्कार करते हैं.

मेरी प्रारम्भिक शिक्षा कान्वेंट में हुई. इंटर मैने इस्लामिया कॉलेज से किया, जहांं अलीगढ यूनिवर्सिटी का प्रभाव है. ज़ाकिर हुसैन जैसे पूर्व राष्ट्रपति जहां के पूर्व छात्र रहे हैं. कानपुर यूनिवर्सिटी, आगरा यूनिवर्सिटी, मेरठ यूनिवर्सिटी, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी और बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी … प्रत्येक कैंपस में मुझे गर्व से राष्ट्र गान को गाना सिखाया गया.

अपनी एनसीसी ट्रेनिंग के दौरान मैंने पूरे भारत वर्ष में पचासों कैंप में आर्मी ट्रेनिंग ली और गर्व से ये गान गाया लेकिन राष्ट्रभक्ति का ये विकृत रूप मैं पहली बार देख रहा था, जिसमें बीएचयू के दो प्रोफेसर्स सहित सैकडों लोगों को राष्ट्रगान गाने से रोक दिया गया था. मेरे दो प्रोफेसर्स, मेरे गुरु भाई और करीब 60 प्रशिक्षु अध्यापक इस घटना के गवाह बने अवाक् से एक दूसरे का मुंह ताक रहे थे.

मैंने अपने हॉस्टल में वापिस आकर अपने रूम मैट्स और दूसरे रिसर्च स्कॉलर को भी ये घटना बताई. हमने मेस और चाय पर काफी चर्चा की और इस नतीजे पर पहुंचे कि आचार्य जी देश के गद्दार तो कतई नहीं थे. हांं, उनकी राष्ट्रीयता के प्रतीक कुछ अलहदा और सांप्रदायिक प्रकार के थे. ये उनकी स्कूलिंग, प्रशिक्षण, लालन पालन और उनके संस्कारों पर आधारित थे. ऐसी बीमार मानसिकता के लोग दोनों ओर पाये जाते हैं. उनमें से कुछ बस्ती में भी रहते होंगे. दोनों प्रकार की बीमार मानसिकता एक दूसरे को अप्रत्यक्ष तौर पर पालती-पोसती है.

हमारे मेरठ कैंट में तो मेरे घर से 100 मीटर के दायरे में 14 झंडारोहण कार्यक्रम सड़क के लोगों और मार्किट के व्यापारियों के द्वारा किये गए. मैं अपने 6 वर्षीय भतीजे को खुद स्कूटी पर बैठा कर दिखाने ले जाता हूंं. मैंने खुद गिना, उनमें कम से कम 6 मुस्लिम्स द्वारा आयोजित थे. हिन्दू व्यापारी जहां अपने आयोजन और दुकानदारी दोनों में सामान रूप से व्यस्त थे, वहीं मुस्लमान बुज़ुर्ग सफ़ेद धुला कुरता पायजामा पहने इत्र लगाये ऐसे महक रहे थे कि जैसे ईद हो.

मेरा लालन पालन ऐसी स्वस्थ मानसिकता वाले लोगों के बीच ही हुआ है इसलिए मैं ऐसे सकारात्मक मानसिकता वाले लोगों को ही जनता हूंं. अब किसे राष्ट्रभक्त कहे और किसे गद्दार ? मोदी जी के इस पावन और पुनीत कृत्य को देखकर मुझे बनारस के सरस्वती शिशु मंदिर के प्रमुख आचार्य याद हो आये.

मेरी समस्या बस ये है कि आप न्यूरो मोटर समस्या से जूझते एक विकलांग व्यक्ति को जो अपने पेशियों पर नियंत्रण न होने के कारण राष्ट्रगान के दौरान भी 52 सेकण्ड सावधान खड़ा नहीं हो सकता, को इसी अपराध के कारण सिनेमा हॉल में मरने की हालत तक पीट देते हैं. क्या आप संघ प्रचारक आचार्य जी को या प्रधानमंत्री को, सत्ता में बैठे बड़ों को इसी अपराध के लिए उंगली भी छुला सकते हो ?

राष्ट्रीय प्रतीक कभी भी राष्ट्र में बसने वाले जन से बड़े नहीं होते. अब आप समझ सकेंगे कि राष्ट्रीय प्रतीक गढ़े गए हैं. विकसित हुए हैं लेकिन होते कृत्रित ही हैं. उनके प्रति बाह्य व्यवहार के द्वारा सम्मान प्रदर्शन हमारे पूर्व के प्रशिक्षण के आधार पर डिपेंड करता है.

जिन समुदायों, संस्थाओं का इतिहास काला होता है और यदि वे हमारी मूर्खता और हिन्दू अधिसंख्य वोटर की साम्प्रदायिक प्रतिक्रिया के चलते सत्ता में आ जाते हैं तो वे अपने प्रतीक, अपने महापुरुष, अपने इतिहास ज़ोर जबरदस्ती से स्थापित प्रतीकों में घुसा देने को मजबूर होते हैं. सावरकर को वीर कहना और राष्ट्रीय प्रतीकों और पुरुषों के बीच घुसा देना ऐसी ही क्रिया है.

वरना देशभक्ति तो एक अत्यंत आंतरिक भाव है जो मुसीबत के समय देश की आवश्यकता के समय स्वतः स्फूर्त ही अंदर से बाहर को परिलक्षित होने लगता है. फिलहाल घुसपैठ किये फ़र्ज़ी प्रतीकों और महापुरुषों को सैलूट करते हुए स्वतंत्रता दिवस को मनाइए.

  • तनवीर अल हसन फरीदी

Read Also –

देश के आजादी के आंदोलन में भगत सिंह की शहादत और संघ के गोलवलकर
आधी रात वाली नकली आजादी
अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक और मोदी की सरकारी तानाशाही
खतरे में आज़ादी के दौर की पुलिस के सीआईडी विभाग की फाइलें 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

विश्व हिंदी सम्मेलन

Next Post

सुप्रीम कोर्ट : न च दैन्यम, न पलायनम !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

सुप्रीम कोर्ट : न च दैन्यम, न पलायनम !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मंडी

June 23, 2021

माया से बाहर निकलो और धर्म के लिए वोट करो क्योंकि हिन्दुराज में हिंदुत्व ही खतरे में है … !

October 25, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.