Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

दुनिया के सबसे निडर पत्रकार जूलियन असांजे को रिहा करो !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 12, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
दुनिया के सबसे निडर पत्रकार जूलियन असांजे को रिहा करो !
दुनिया के सबसे निडर पत्रकार जूलियन असांजे को रिहा करो !

बेन एंड जैरी के को-फाउंडर बेन कोहेन को वॉशिंगटन डीसी में जूलियन असांजे पर मुकदमा चलाने का विरोध प्रदर्शन करने पर पुलिस ने हथकड़ी लगाकर गिरफ्तार किया. खबर पिछले बृहस्पतिवार की है, लेकिन अमेरिका के मुराद इंडियंस को बताते रहना जरूरी है. सच ये है कि अमेरिका में जूलियन का नाम लेते ही वहां की सुरक्षा एजेंसियां आपके पीछे पड़ जाती हैं और इंडिया की ईडी जैसी अमेरिकन एजेंसी जांच शुरू कर किसी न किसी एंगल से आपको बदनाम कर देती हैं.

https://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2023/07/358514485_824133229157783_9158730980590911802_n.mp4

बेन एंड जैरी के को-फाउंडर बेन कोहेन गिरफ्तार

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

डर के माहौल, बड़े पैमाने पर सरकारी निगरानी और मुखबिरों पर मुकदमा चलाने के लिए जासूसी अधिनियम के उपयोग के साथ-साथ जूलियन असांजे के उत्पीड़न ने खोजी पत्रकारिता को कमजोर कर दिया है. प्रेस न केवल जूलियन का समर्थन करने के लिए एक रेगुलर और कंटीन्यूअस अभियान चलाने में विफल रहा है, बल्कि अब सत्ता के आंतरिक कामकाज पर प्रकाश डालने का प्रयास भी नहीं करता है. यह विफलता न केवल अक्षम्य है, बल्कि समाज की तरफ से बॉयकॉट किए जाने के लिए भी उपयुक्त है.

अमेरिकी सरकार, विशेष रूप से सेना और सीआईए, एफबीआई, एनएसए और होमलैंड सिक्योरिटी जैसी एजेंसियों का जूलियन के केस में किसी भी तरह से पीछे हटने या रुकने का कोई इरादा नहीं है, जिन्हें जासूसी अधिनियम के 17 मामलों का उल्लंघन करने का दोषी पाए जाने पर 170 साल की जेल का सामना करना पड़ता है. अमेरिका राज्य के ये सारे संस्थान एक डायस्टोपियन कॉर्पोरेट अधिनायकवाद का निर्माण करने के लिए कठोर राज्य सेंसरशिप के तंत्र को मजबूत कर रहे हैं, जिसकी कुछ विशेषताओं को मैट तैब्बी (Matt Taibbi) ने ट्विटर फाइलों में उजागर किया था.

इक्वाडोर द्वारा राजनीतिक शरण दिए जाने के बाद जूलियन को इक्वाडोर के दूतावास में सात साल तक फंसाए रखने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन ने न्यायिक मानदंडों और राजनयिक प्रोटोकॉल की पूरी श्रृंखला का खुलेआम उल्लंघन किया. सीआईए ने स्पेनिश सुरक्षा फर्म यूसी ग्लोबल के माध्यम से जूलियन की अपने वकीलों के साथ बैठकों की रिकॉर्डिंग की, जिससे प्रत्यर्पण मामला अमान्य हो जाना चाहिए.

जूलियन को 11 अप्रैल, 2019 को ब्रिटिश मेट्रोपॉलिटन पुलिस द्वारा इक्वाडोर दूतावास से बाहर खींचने के बाद से कुख्यात बेलमार्श उच्च-सुरक्षा जेल में चार साल से अधिक समय से रखा गया है, जबकि दूतावास को संबंधित देश का संप्रभु क्षेत्र माना जाता है. इस मामले में जूलियन को किसी अपराध के लिए सजा नहीं सुनाई गई है. उन पर जासूसी अधिनियम के तहत आरोप लगाया गया है, जबकि वह अमेरिकी नागरिक ही नहीं हैं और विकीलीक्स भी अमेरिका-आधारित प्रकाशन नहीं है.

यू.के. की अदालतें, जो उस मामले में लगी हुई हैं, जिसे केवल दिखावटी सुनवाई के रूप में वर्णित किया जा सकता है, उनकी अंतिम अपील, जैसा कि हम उम्मीद करते हैं, खारिज हो जाने पर उन्हें यू.एस. को सौंपने के लिए तैयार दिखाई देती हैं. अब यह कुछ ही दिनों या हफ्तों में हो सकता है.

#FreeAssangeNOW : IFJ

17 जून, 2022 को, यू.के. ने अमेरिकी सरकार के रिकॉर्ड जारी करने के लिए मुख्य रूप से देश के जासूसी अधिनियम के तहत आरोपों का सामना करने के लिए जूलियन असांजे के संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी, जिसमें पता चला कि अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान और इराक में नागरिकों के खिलाफ युद्ध अपराध किए थे और रॉयटर्स के दो पत्रकारों की हत्या की गई थी. दोषी पाए जाने पर असांजे को 175 साल तक की जेल की सजा हो सकती है.

आईएफजे (International Federation of Journalist (IFJ), असांजे की लगातार हिरासत में रहने से मीडिया की स्वतंत्रता और विश्व स्तर पर सभी पत्रकारों के अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है. जनता के जानने के अधिकार के खिलाफ अमेरिका द्वारा असांजे का पीछा करना लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के लिए गंभीर खतरा है, जो दुनिया भर में तेजी से नाजुक होते जा रहे हैं. असांजे पर व्यक्तिगत विचारों के बावजूद, उनके प्रत्यर्पण का भयावह प्रभाव पड़ेगा, जिससे सभी पत्रकार और मीडिया कर्मी जोखिम में पड़ जाएंगे.

यह मामला एक खतरनाक मिसाल कायम करता है कि अब किसी भी देश में मीडिया के सदस्यों को सार्वजनिक हित में जानकारी प्रकाशित करने के लिए जवाब देने के लिए दुनिया में कहीं भी सरकारों द्वारा निशाना बनाया जा सकता है.

विकीलीक्स को 2011 में पत्रकारिता में सबसे उत्कृष्ट योगदान के लिए वॉकली पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जो ऑस्ट्रेलियाई पत्रकारिता में उत्कृष्टता को पुरस्कृत करने के लिए एक वार्षिक पुरस्कार है, जो कि व्हिसिल-ब्लोअर को अपनी कहानियां बताने में सहायता करके जनहित पत्रकारिता पर विकीलीक्स के कार्यों के प्रभाव को मान्यता देता है. अन्य कहानियों के अलावा, वैश्विक कर बचाव योजनाओं को उजागर करने के लिए अन्य मीडिया आउटलेट्स द्वारा व्हिसल-ब्लोअर का उपयोग किया गया है.

विवादास्पद सामग्री को जारी करने में असांजे के साथ सहयोग करने वाली चेल्सी मैनिंग की सजा को राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कम कर दिया था. विकीलीक्स के किसी भी मीडिया भागीदार पर असांजे के साथ सहयोग के कारण अमेरिकी सरकार की किसी भी कानूनी कार्यवाही में आरोप नहीं लगाया गया है. प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रभाव के अलावा, असांजे के प्रत्यर्पण और आरोपों के लिए कोई कानूनी मानदंड भी नहीं है.

आईएफजे, संयुक्त राज्य सरकार से जूलियन असांजे के खिलाफ सभी आरोप वापस लेने और उन्हें अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहने के लिए घर लौटने की अनुमति देने का अपील कर रहा है. आईएफजे सभी मीडिया यूनियनों, प्रेस स्वतंत्रता संगठनों और पत्रकारों से भी आह्वान कर रहा है कि वे सरकारों से असांजे की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने का आग्रह करें. #FreeAssangeNOW

संदर्भ लिंक

  • जार्ज ऑरवेल

Read Also –

NO SURRENDER : पत्रकारिता के महान योद्धा जूलियन असांजे को मुक्त करो !
आखिर क्यों यूक्रेन पर आक्रमण करना रुस के लिए जरूरी था ?
100 करोड़ की आपराधिक मानहानि से लेकर हत्या तक

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

हे लेखक !

Next Post

किस ‘मिलान कुंदेरा’ का ‘शोक मनायें’ और किसका नहीं…!

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

किस 'मिलान कुंदेरा' का 'शोक मनायें' और किसका नहीं...!

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मुक्‍ति‍बोध की बेमि‍साल पारदर्शी प्रेमकथा

May 14, 2023

महाशय ! इज्जत मांगी नहीं कमाई जाती है

December 9, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.