Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

तुम तो मधु लिमये हो महुआ !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 21, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
तुम तो मधु लिमये हो महुआ !
तुम तो मधु लिमये हो महुआ !
kanak tiwariकनक तिवारी

फिलवक्त मूल कांग्रेस की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा पर भाजपा के निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि उन्होंने संसद में सवाल पूछने के लिए हीरानंदानी ग्रुप के बिल्डर दरशन हीरानंदानी से भेंट और रिश्वत तोहफे में स्वीकार की है. महुआ मोइत्रा इस पर कानूनी कार्यवाही कर रही हैं लेकिन मेरा मकसद उस मामले में पड़ना नहीं है. मैं महुआ से उस वक्त प्रभावित हो गया था. जब लोकसभा में उन्होंने अपना पहला भाषण देकर भारी भरकम सरकारी ताकत की जगहंसाई करा दी थी और उनके मुंह बंद हो गए थे. तब मैंने सांसद महुआ मोइत्रा पर एक लेख लिखा था, जब उन्होंने लोकसभा में पहली बार अपना तेजतर्रार भाषण दिया था. महुआ के तेवर जस के तस हैं, जो अभी लोकसभा में फिर उनकी तकरीर में देखने मिला.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शेरनी की तरह दहाड़ती हैं. उन्होंने पार्टी का एक नुमाइंदा लोकसभा में महुआ मोइत्रा के नाम से निर्वाचित कराया है. अपने पहले भाषण में महुआ ने दो तिहाई बहुमत की संसदीय हेकड़ी के तैश को समझा दिया कि कपड़ा धोबी के यहां कितना भी साफ सांप्रदायिक भावनाएं भड़काकर धो लिया गया हो, उस पर लोकतंत्रीय इस्तरी चलाने से ही संसद की व्यापक समझ का मानक पाठ तैयार किया जा सकता है. अपने पहले क्रिकेट मैच में महुआ ने लोकसभा की पिच पर छक्का लगा दिया. बीच बीच में दो तिहाई वाले भारी भरकम सत्ता पक्ष की व्यवधानी हुल्लड़ सुनने में बेहूदी लगी.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

लोकसभा में दिया जा रहा महुआ का भाषण जैसे हिन्दुस्तान का जख्मी और कराहता हुआ मौजूदा इतिहास इंसानी प्रतिनिधि बनकर देश के नागरिकों की चेतना को झिंझोड़ रहा है. महुआ मोइत्रा की तरह यदि छह सांसद भी संसद की तकरीरों में इसी तरह सजग रहे, तो भारी भरकम सत्तामूलक धड़े का हुल्लड़बाज हिस्सा अपने उस लक्ष्य तक तो पहुंचने में कठिनाई महसूस करेगा, जो एक बरसाती नदी के मजहबी, उद्दाम उफान की तरह हिन्दुस्तानियत की सदियों पुरानी उगी फसल को बेखौफ होकर काफी कुछ बहा ले गया.

अवाम की दौलत का केवल एक पार्टी और एक नेता के लिए दुरुपयोग हो रहा है. देश के चुनिंदा काॅरपोरेटी ही मीडियामुगल हैं. सत्ता और संपत्ति के गठजोड़ का खुला खेल चल रहा है. उसकी परत परत नोचकर महुआ ने संसद को अभियुक्त भाव से आंज भी दिया. मार्मिक सवाल पूछा कि देश की सेना तो देश की सेना है, वह एक व्यक्ति की सेवा में चुनाव प्रचार का एजेंडा कैसे बन सकती है. यह वह भाषण था जिसने मार्क एंटोनी भले न हो, मधु लिमये, हीरेन मुखर्जी, नाथ पई, हेम बरुआ, सोमनाथ चटर्जी और राममनोहर लोहिया की एक साथ याद दिला दी.

सरकार के मुख्य घटक भाजपा की पूरी नीयत और ताकत जवाहरलाल नेहरू के रचे लोकशाही के एक-एक अवयव पर निजी हमला करने की है. महुआ ने राजस्थान के पहलू खान और झारखंड के तबरेज अंसारी का नाम लेकर माॅब लिंचिंग की ओर अपनी आवेशित करुणा के जुमले में हमला किया. महुआ मोइत्रा के संदेश में भारतीय नवोदय के अशेष हस्ताक्षरों राजा राममोहन राय, रवींद्रनाथ टैगोर, काज़ी नजरुल इस्लाम, विवेकानन्द और सुभाष चन्द्र बोस आदि की सामूहिक संकेतित अनुगूंज थी.

लगभग कारुणिक तैश में इस महिला सांसद ने कहा आज भारत में एकल तरह की राष्ट्रीयता या संस्कृति अमल में लगभग हत्यारिणी है. लोगों को घरों से निकालकर सड़कों पर कत्ल किया जा रहा है. असम का उल्लेख करते कहा राष्ट्रीय नागरिकता, रजिस्टर जैसे मुद्दे की आड़ में इस देश के गरीब, मजलूम और अशिक्षित लोगों से पूछा जा रहा है कि वे दस्तावेजी सबूत दें कि कब से भारत के नागरिक हैं.

व्यंग्य की भृकुटि में महुआ ने चेहरे पर कसैलापन लाते सरकारी बेंच की तरफ तीखा सवाल किया. इस देश में तो मंत्री तक अपनी पढ़ाई की डिग्री बताने में नाकाबिल रहे हैं. 2014 से 2019 के बीच देश में मानव अधिकारों का उल्लंघन कम से कम दस गुना बढ़ गया है. संसद घमंड नहीं करे कि सरकार के पास जरूरत से ज्यादा बहुमत है. उससे कमतर संख्या के विपक्ष को ज्यादा जवाबदारी के साथ जम्हूरियत की हिफाजत करनी होगी.

अपने भाषण के संयत आचरण के लिए महुआ ने बहुत अदब और सम्मान के साथ देश के महान नेता मौलाना आजाद की याद की और उनके कहे उद्धरण का पाठ किया. सच है, लोगों को भले अन्यथा समझाया जाता हो लेकिन 70 बरस पुराना लोकतंत्र और संविधान कहीं न कहीं दरक तो जरूर रहे हैं. उनके भाषण में एक देशभक्त की पीड़ा एक बुद्धिजीवी के कथन की भविष्यमूलकता और एक आम नागरिक से सरोकार रखने की सैद्धांतिक और प्रतिनिधिक कशिश ने एक साथ तृणमूल कांग्रेस की. इस युवा सांसद के भाषण को संसद के अभिलेखागार में अपनी सम्मानित जगह पर रखने का वचन तो वक्त ने दिया होगा.

Read Also –

आरएसएस का वैचारिक पोस्टमार्टम – मधु लिमये
भारत में फासीवाद और उसका भविष्य : फासीवादी विचारधारा वामपंथी सड़ांध पर पैदा होता है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

महिषासुर का फैलता दायरा और मिथकों की राजनीति

Next Post

गर्भवती अनिता और उनके पति बृजेश को रिहा करो !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

गर्भवती अनिता और उनके पति बृजेश को रिहा करो !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

March 11, 2026

पीएम केयर फंड : भ्रष्टाचार की नई ऊंचाई

May 14, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.