Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘चौरी चौरा’ विद्रोह : जनता की बगावत को सलाम !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 7, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'चौरी चौरा' विद्रोह : जनता की बगावत को सलाम !
‘चौरी चौरा’ विद्रोह : जनता की बगावत को सलाम !
मनीष आजाद
‘मैं ‘चौरी-चौरा’ की घटना में भारत में फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत देखता हूं.’

1922 में एक पत्रकार (शाहिद आमीन की ‘चौरी चौरा’ पर लिखित पुस्तक से उद्धृत)

कोरोना काल में ‘क्वॉरन्टीन’ शब्द सभी की जुबान पर चढ़ गया है. लेकिन इतिहास की किताबों में किसी घटना को ‘क्वॉरन्टीन’ कर देने का चलन बहुत पुराना है. विशेषकर ऐसी घटना को जो इतिहास लिखने वालों की अपनी विचारधारा से मेल न खाते हो. 4 फरवरी 1922 को घटी यह घटना एक ऐसी ही घटना है, जिसे ‘मुख्यधारा’ के इतिहासकारों ने लम्बे समय तक जबरदस्ती क्वॉरन्टीन कर रखा था और इससे अपनी राजनीतिक-विचारधारात्मक दूरी बना रखी थी

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

नक्सलबारी आंदोलन के प्रभाव में जब एक बार फिर समाज में क्रांतिकारी आलोड़न शुरू हुआ तो चौरी चौरा जैसी अनेक घटनाओं को क्वॉरन्टीन से मुक्त करके उनका महत्त्व स्थापित करने का प्रयास किया जाने लगा. शाहिद आमीन, अनिल श्रीवास्तव, सुभाष चन्द्र कुशवाहा जैसे लेखकों ने ‘चौरी चौरा’ को स्थापित करने में शानदार काम किया है.

चौरी चौरा घटना से पहले गांधी के असहयोग आंदोलन ने भावी क्रांतिकारी धारा को भी अपने मे समेट रखा था और पूरा देश क्रांतिकारी सम्भावना से भर गया था. इसी असहयोग आंदोलन में बनारस में जब चंद्रशेखर आज़ाद को 30 कोड़े मारे गए तो महज 16 साल के चंद्रशेखर आज़ाद ने हर बार महात्मा गांधी की जय बोला था.

लेकिन चौरी चौरा में जब गरीब मुस्लिम दलित-पिछड़े किसानों ने असहयोग आंदोलन के दौरान ही सरकार व पुलिस के अत्याचार पर पलटवार करते हुए थाने को फूंक दिया और तत्कालीन DSP समेत 23 पुलिसकर्मियों को मार डाला तो गांधी ने न सिर्फ इतना बड़ा आंदोलन वापस ले लिया, बल्कि चौरी चौरा के क्रांतिकारियों पर टिप्पणी करते हुए उनसे यह आह्वान कर डाला कि वे सभी अपने आपको पुलिस के हवाले कर दे.

गांधी के इस गैर-जिम्मेदार कृत्य से चंद्रशेखर आज़ाद और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी काफी दुःखी हुए और इसके बाद इन क्रांतिकारियों ने अपना अलग रास्ता बनाया.

ब्रिटिश काल मे पहली बार कोर्ट ने इस केस में 172 लोगो को फांसी की सजा सुनाई. एम. एन. राय ने इसे उचित ही ‘न्यायिक हत्या’ की संज्ञा दी. तत्कालीन ‘कम्युनिस्ट इंटरनेशनल’ ने भी इसका संज्ञान लेते हुए पूरी दुनिया मे इसके खिलाफ आंदोलन करने का आह्वान किया. अंततः 19 लोगों को फांसी पर लटकाया गया.

फांसी पर चढ़ने वाले लोगों का जज़्बा इसी से समझा जा सकता है कि उन्होंने अपने परिवार वालों से कहा कि 10 साल के अंदर वो ‘पुनर्जन्म’ लेंगे और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. बाकी लोगों को आजीवन कारावास समेत लंबी लंबी सजाएं दी गई. हद तो तब हो गयी जब 1935 में संयुक्त प्रान्त (यूपी) में कांग्रेस की सरकार बनी और उसने भी इन कैदियों को जेल से आज़ाद नहीं किया.

‘आजादी’ के बाद भी इनकी उपेक्षा जारी रही और तमाम आंदोलनों-धरनों-दबावों के बाद 1993 में जाकर ही इन शहीदों का स्मारक बन सका जबकि मारे गए पुलिस वालों के स्मारक पर ‘आज़ादी’ के बाद भी सलामी ठोकी जाती रही. ‘आज़ाद’ भारत की पुलिस के लिए अंग्रेजों की पुलिस अभी भी प्रेरणास्रोत बनी हुई है.

चौरी चौरा की इस घटना में जिन्हें फांसी पर लटकाया गया, एक नज़र उन नामों पर डाल लीजिये- लोटू, महादेव, मेघू, नजर अली, रघुबीर, रामलगन, रामरूप, रूदली, सहदेव, सम्पत, श्यामसुन्दर, सीताराम, अदुल्ला, भगवान अहिर, विक्रम अहिर, दुधई, कालीचरन, लालमुहम्मद व सम्पत.

नाम से ही स्पष्ट है कि यह गरीब दलितों, पिछड़ों, मुस्लिमों का एक ‘सबाल्टर्न विद्रोह’ था. यदि यह विद्रोह राष्ट्रीय आंदोलन का ‘टेम्पलेट’ बनता तो शायद आज हमें फासीवाद का सामना नहीं करना पड़ता.

अल्जीरिया के क्रांतिकारी लेखक फ्रेंज फ़नान (Frantz Fanon) ने कहीं लिखा है कि जनता अपनी बगावतों से अपने लिए ‘सांस लेने की जगह’ (breathing space) भी बनाती है. ऐसी कितनी ही बगावतों के कारण अब तक हमें जो थोड़ी बहुत ‘सांस लेने की जगह’ हासिल थी, आज वहां एक बार फिर फासीवादी घुटन बढ़ती जा रही है. अब यह हमारा कार्यभार है कि हम इस घुटन के खिलाफ लड़ते हुए इस ‘breathing space’ को ज्यादा से ज्यादा बढ़ा सकें ताकि आने वाली पीढ़ियां खुल कर सांस ले सकें.

Read Also –

गांधी : ‘भारतीय’ बुर्जुआ मानवतावाद के मूर्त रूप
हर सम्भव तरीक़े से पूर्ण स्वतन्त्रता – भगत सिंह
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास, 1925-1967

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आगामी लोकसभा चुनाव में जीत के लिए फासिस्ट इतना बेताब क्यों है ?

Next Post

होलोकास्ट बनाम ‘होलोकास्ट इंडस्ट्री’…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

होलोकास्ट बनाम 'होलोकास्ट इंडस्ट्री'...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मोदी सरकार की आपराधिक लापरवाही का नतीजा है ऑक्सीजन की कमी

April 28, 2021

भारत में हिन्दु राष्ट्र की धोखाधड़ी

January 3, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.