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नीरज सिल्वर लाये, अरशद गोल्ड लाया और वी आर सॉरी विनेश…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 12, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
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नीरज सिल्वर लाये, अरशद गोल्ड लाया और वी आर सॉरी विनेश...
नीरज सिल्वर लाये, अरशद गोल्ड लाया और वी आर सॉरी विनेश…

नीरज सिल्वर लाये, अरशद गोल्ड लाया…ऐसा दूसरी बार हुआ. जीत के बाद नीरज ने देखा कि अरशद के पास पाकिस्तानी झंडा नहीं है. अलग खड़ा है. उसने अरशद को आवाज दी. विक्ट्री फोटोशूट, अरशद ने भारतीय झंडे और नीरज के कंधे पर हाथ तले कराया. आज उसकी मां ने कहा- जीतने वाला अरशद भी उनका ही बेटा है.

नफरत के इस दौर में जब शहरों की मां-बहनें, अपने बेटों-भाइयों को तलवार लेकर नाचने को उकसा रही है, नीरज की मां का यह कहना आश्वस्त करता है कि जिंदगी से मोहब्बत अभी मरी नहीं. आगे की बात पुरानी है, एक पुराना अनुभव.

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इस्ताम्बुल एयरपोर्ट पर 5 घण्टे का ले ओवर था. ज्यादातर समय स्मोकिंग जोन में गुजरा. वह बन्द रूम नहीं था, खुली बालकनी थी. आप प्लेन को आते जाते, उड़ते उतरते देख सकते थे. साइड में मॉकटेल काउंटर भी था. परफेक्ट..

माचिस सिक्युरिटी चेक के समय जपत हो चुकी थी. वहां हीटर भी न दिखा. जाहिर है, दीप से दीप जलाना ही एकमात्र तरीका था. लेकिन किसको कहोगे ?? जाहिर है, अपनी जैसी शक्लो सूरत वाले से. मांगा, उसने दिया. दीप जलाकर बगल ही मैं बैठ गया. मुंह खोलते ही पता चल गया-पाकिस्तानी है.

पंजाबी एक्सेंट में बात कर रहा था. मर्चेंट नेवी में था. घर जा रहा था. अंग्रेजी और हिंदी (पाकी उर्दू टाइप) में एकदम फ़्लूएंट. मगर अंग्रेजी जल्द ही त्याग कर हम औकात पर आ गए. तो बात गजलों पर गयी. उसके मर्चेंट नेवी के अनुभवों पर गयी. मुरी और मुअन जोदाड़ो पर गई. दोनों जगहें उसकी घूमी हुई थी. क्रिकेट, कराची के उसके घर, परिवार पर गयी.

इतनी अच्छी भाषा में बात कर रहा था, मन करे कि बस बोलने दो, सुनते रहो. ज्यादातर उसने ही बोला. हम साइड के बार में बैठे. खाते पीते बात करते रहे. मैने वालेट निकाला. उसने धीमे से हाथ पर हाथ रखकर रोक दिया, और अपना वॉलेट निकाल कर पमेन्ट किया. बीवी लाउंज में थी, उधर भी देखना था. सो मैं लौट गया. एक डेढ़ घण्टे बाद फिर चल पड़ा. वो दिखा. हाथ हिलाया.

कुछ कहने की जरूरत नहीं थी. दोनों चले उसी बालकनी की तरफ. फिर बातें शुरू हो गयी. पर अब उसका फ्लाइट टाइम करीब था. उसने हाथ मिलाया. चला गया. मैं भी बीवी की तरफ लौट गया. घण्टे डेढ़ घण्टे बाद फिर गया. इस बार अकेला था. सिगरेट में स्वाद नहीं आया. फेंककर लौटा, तो फिर नहीं गया.

उसका चेहरा हल्का सा याद है. मेरा नाम नहीं पूछा उसने, न मैंने उसका. पूरे वक्त वो पाकिस्तान था, मैं हिंदुस्तान था. यही पहचान थी. मगर दुश्मनी की कोई खलिश नहीं. बस क्यूरियोसिटी थी. पूरे वक्त मैं उससे ज्यादा विनम्र, अधिक केयरिंग होने की कोशिश में था. पर सच यह कि उसने यह प्रतियोगिता बड़े अंतर से जीती थी.

सीमाओं के भीतर बनाया गया बनावटी माहौल, देश से बाहर जाते ही स्वतः विलीन हो जाता है. सच यही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच की सीमाएं, चाहें जमीन पर हों या दिल पर, ये कृत्रिम है, अनचाही हैं, दूसरों के द्वारा जबरन उकेरी गई है.

आप कितने भी कट्टर हों, मैं दावा कर सकता हूं कि जब किसी सीमा पार वाले से मिलेंगे, नजरें मिलाकर स्माइल कर देंगे, वो आपके कंधे पर हाथ रख देगा. जेहन में बरसो से खिंची लकीरें घुल जाएंगी. आप नीरज हो जायेगे, वो अरशद हो जाएगा.

विश्वगुरु केन्या…, केन्या की एथलीट जिसका नाम लेना जरा अजीब सा, और कठिन है, वह पेरिस में 5000 मीटर रेस का सिल्वर मेडल जीत गयी. फिर उसे नियमो के तहत डिस्क्वालिफाई कर दिया गया लेकिन केन्या टीम की जोरदार अपील के बाद, उसके विश्वगुरु राष्ट्रपति की लाल लाल आंखों से डरकर ओलंपिक कमेटी ने उसका डिस्क्वालिफिकेश रद्द कर दिया. सिल्वर मेडल भी रिस्टोर कर दिया.

पेरिस ओलंपिक में घटी यह घटना बताती है कि अपनी बात को रखने के लिए बरगद की तरह तनकर, अड़कर खड़ा होना पड़ता है. और अड़ना, तनना किसी तोतले, धूर्त, बड़बोले, बदजुबान, झक्की, कायर डरपोक धनिया पुदीना टाइप आदमी के बस का रोग नहीं होती. इनसे घर मे बकवास करवा लो बस.

केन्या वालो ने ठेंगा दिखाते हुए कहा है कि कूद कूद कर युद्ध रुकवाने वाले, लाल आंख का तीन माइक्रोमीटर सीने वाला वीर…सिर्फ सस्ता ट्रोल गुरु हो सकता है, विश्वगुरु कभी नही. तुम्हारा दुनिया मे डंका नहीं, डुगडुगी पिट रही है.

और देश की तरफ से ओलंपिक कमेटी में मेम्बरशिप के लिए, देश के किसी मजबूत व्यक्ति को भेजने की बजाय, साहेब की अपनी मालकिन, और नचनियों पे देश से लूटी दौलत लुटाने वाली, आंटी महारानी को नामित करने का नतीजा भी देश भुगत रहा है. ऐसे चमन चोंचलेबाज, रोज रोज चूकने वाले चूकीयों की जमात को यह देश छाती पर बोझ की तरह ढो रहा है.

इनके रहते हम लोग केवल हिन्दू-मुसलमान वाली बकवास, और गालीबाजी के कम्पटीशन में गोल्ड ला सकते हैं. इस रेजीम, इसके नेता, इसके निर्लज्ज पैरोकारों लानत, लानत, लानत..एक करोड़ लानत, उसपे भी 100 ग्राम एक्स्ट्रा. वी आर सॉरी विनेश. अवर हार्ट ब्लीडस् फ़ॉर यू…!

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