Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

कवि और भगवान

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 1, 2022
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

एक जरूरतमंद रोगी मंदिर में मन्नत मांगते हुए – ‘हे ईश्वर मेरी कब सुनोगे ! 4 महीने हो गए आपके दर पर आते-आते. अब तो मेरी किडनी जवाब देने ही लगी है. मेरे लिए किडनी का इंतजाम करवा दो ना ! एक बार सुन लो मेरी !’

दूसरा जरूरतमंद रोगी नमाज पढ़ते हुए – ‘या अल्लाह, तू बड़ा रहमदिल है. अपने बंदे पर रहम कर. एक अदद लीवर की जरूरत है. या अल्लाह भेज दे कोई मददगार !’

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

दोनों की प्रार्थनाएं ईश्वर और अल्लाह के पास पहुंच गई. ईश्वर के प्रतिनिधि बने विष्णु जी, अल्लाह को फोन लगाया – हेलो हेलो ! फोन अंगेज जा रहा था.

ब्रह्मा जी को फोन लगाए और बोले – अब परेशान हो गया हूं. अब लगता है भक्त की मांग पूरी ही करनी पड़ेगी. 4 महीने से मेरे मंदिर का चक्कर लगा रहा है. मेरे अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है.

ब्रम्हा जी बोले – तो ठीक है दिक्कत क्या है  नारद जी को भेज दो.

नारद जी नारायण नारायण करते हुए पृथ्वीलोक को कूच कर गए और वहां से एक कवि को उठा लिया, जिसने जल्द ही कविता लिखी थी – ‘मेरी देह से मिट्टी निकाल लो.’

कवि महाशय को थोड़ी देर बाद होश आया तो देखा आईसीयू में पड़े हैं. बोले – ‘मुझे यहां कौन और कैसे लाया ?’

नारायण नारायण करते हुए नारद जी चले आए, बोले – ‘बेटा तेरी मंशा पूरी करने आए हैं.’

कवि – ‘मेरी मंशा कौन सी मंशा ?’

नारद जी – ‘वही जो तूने कविता में लिखी थी. वह क्या थी कि मेरी देह से यह निकाल लो, वह निकाल लो…, तो हम अपने भक्तों की मांग पूरी करने के लिए तुम्हारी देह से किडनी, लीवर, आंखें आदि निकालने की सोच रहे हैं !’

कवि – ‘लेकिन मैंने किडनी, लीवर और आंखों की बात तो कभी की ही नहीं. हे भगवान ! मैं क्या जानता था कविता की बात भी सच होने लगेगी ! वह तो भाव व्यक्त करने थे तो मैंने व्यक्त कर दिए. ईश्वर मुझे बचाओ मैं किस मुसीबत में पड़ गया !’

कवि महोदय फिर से नारद जी से बोले – ‘लेकिन आपको कैसे पता चला ? क्या मेरी कविता वहां तक भी फेमस है ? क्या विष्णु जी और ब्रह्मा जी मेरी कविता पढ़ते हैं ? अरे वाह ! यह तो अद्भुत बात है !’

नाराद जी – ‘बिल्कुल पढ़ते हैं. वह अपने हर भक्त की रचना पढ़ते हैं, बल्कि उन्हें लिखने की प्रेरणा भी वही देते हैं. तुम ही बताओ क्या उनके प्रेरणा के बिना तुम कुछ भी लिख सकते हो !’

कवि – ‘अरे नहीं ऐसा तो मैंने नहीं कहा. ईश्वर का वरदहस्त तो सर पर सभी को चाहिए !’

नारद – ‘हां और जिस रचनाकार की कोई कविता ज्यादा वायरल हो जाती है, उनके हर भक्तों के मुंह से वही कविता सुनाई देती है. उस कविता को नारायण खास समय देकर पढ़ते हैं. तुम्हारी ‘देह से निकाल लो’ कविता बहुत ज्यादा वायरल हो गई है इसीलिए नारायण प्रभु ने कहा है कि तुम्हारी मांग को पूरी कर ली जाए. इधर तुम्हारी इच्छा भी पूरी हो जाएगी, उधर दो-चार और भक्तों का भला हो जाएगा !’

कवि – ‘हे ईश्वर यह क्या कह रहे हैं ! मैं बिना किडनी और बिना लीवर के कैसे जिंदा रहूंगा ?’

नारद – ‘क्या बात कर रहे हो तुम्हें जिंदा भी रहना है क्या ? चलो एक किडनी के सहारे भी जी सकते हो और लीवर केवल आधा लिया तो आधे लीवर के सहारे जी सकते हो…और जो तुम देह से मिटटी और जल और वायु निकालने की गुहार लगा रहे हो, क्या उसके बिना तुम जिंदा रह सकते हो ? बोलो बोलो कवि महोदय बोलो … ?’

कवि – ‘नारद जी, आप भी ब्राह्मण, मैं भी ब्राह्मण ! क्या अपने ब्राह्मण भाई का जान लोगे ? कोई उपाय बताओ इस मुसीबत से निकलने का ? वह कविता तो मैंने बस यूं ही लिख दी थी. मुझे क्या पता था कि इस तरह की नौबत आ जाएगी !’

नारद – ‘चल बच्चा तूने ब्राह्मण का वास्ता दिया है तो तुझे उपाय तो अब बताना ही पड़ेगा. जा तू भी चैन से रह. तुझे मैं मुक्त करता हूं. जा वापस जा और सुन दोबारा ‘यह निकाल लो, वह निकाल लो’ टाइप की कविता मत लिखना…समझा !’

कवि – ‘बिल्कुल नहीं कान पकड़ता हूं !’

  • सीमा मधुरिमा
    लखनऊ

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

भारत प्रति व्यक्ति 2000 डॉलर की अर्थव्यवस्था है ?

Next Post

पीएफआई पर प्रतिबंध तो आरएसएस पर क्यों नहीं ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

पीएफआई पर प्रतिबंध तो आरएसएस पर क्यों नहीं ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मंटो के जन्मदिन पर एक प्रेम कहानी – ‘बादशाहत का खात्मा’

June 5, 2023

भारत की दुरावस्था, सरकार का झूठ और भारतीय जनता

July 5, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.