Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home पुस्तक / फिल्म समीक्षा

होलोकास्ट बनाम ‘होलोकास्ट इंडस्ट्री’…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 8, 2024
in पुस्तक / फिल्म समीक्षा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
होलोकास्ट बनाम 'होलोकास्ट इंडस्ट्री'...
होलोकास्ट बनाम ‘होलोकास्ट इंडस्ट्री’…
मनीष आजाद
‘मुझे लगता है कि होलोकास्ट को बेचा जा रहा है, जबकि जरूरत उससे सबक लेने की है.’

– रब्बी अर्नोल्ड जैकोब वोल्फ (Rabbi Arnold JacobWolf)

एकाध अपवादों को छोड़ दें तो होलोकास्ट पर लिखने वाले, विशेषकर अपना संस्मरण लिखने वाले यहूदी लेखक इजरायल और अमेरिका की आक्रामक नीतियों के समर्थक होते हैं. लेकिन Norman G Finkelstein इसके अपवाद हैं.

You might also like

‘कास्ट एंड रिवोलुशन’ : जाति उन्मूलन का एक क्रान्तिकारी नज़रिया

‘नो अदर लैंड’, तब जाएं तो जाएं कहां ?

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

Finkelstein के माता/पिता हिटलर के यातना शिविर में थे लेकिन इसके बावजूद Finkelstein इस बात को समझ पाए कि अमेरिका और इजरायल की ताकतवर यहूदी लाबी होलोकास्ट की भयावह स्मृतियों का दोहन करके इजरायल की क्रूर आक्रामक नीतियों को, और गाज़ा में चल रहे जनसंहार (Genocide) को वैधानिकता प्रदान कर रहे हैं. इसे ही Finkelstein ने अपनी इसी नाम की किताब में ‘होलोकास्ट इंडस्ट्री’ कहा है.

मजेदार बात यह है कि इस ‘इंडस्ट्री’ से ऐसे ‘होलोकास्ट संस्मरण’ भी छप गए या छापे गए, जो पूरी तरह फर्जी थे. यानी उनके लेखक कभी भी यातना शिविर में नहीं थे. बहुचर्चित ‘The Painted Bird’ और ‘Fragments’ ऐसे ही संस्मरण हैं.

एक पड़ताल में यह पता चला कि Fragments के लेखक Wilkomirski तो यहूदी भी नहीं थे. उनका असली नाम Bruno Doessekke था.

‘Night’ जैसी बहुचर्चित ‘होलोकास्ट संस्मरण’ के लेखक और नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित Elie Wiesel के इजराइल समर्थक रुख का पर्दाफाश करते हुए लेखक ने Elie Wiesel को ‘होलोकास्ट इंडस्ट्री’ का ‘सीईओ’ घोषित किया है.

इसके अलावा ‘Holocaust study’ के नाम पर पूरे विश्व से होलोकास्ट सहानुभूति के आधार पर अथाह पैसा उठाया जाता है और ‘Holocaust study’ में स्टूडेंट्स को यह पढ़ाया जाता है कि ‘होलोकास्ट’ सिर्फ यहूदियों का हुआ है और यह स्थापित किया जाता है कि यहूदियों का नया ‘धर्म’ इजरायल है.

इतिहास में काले लोगों, अफ्रीकन लोगों तथा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया… देशों में वहां के मूल निवासियों के साथ क्या हुआ, इसे यहूदी होलोकास्ट के मुकाबले बहुत मामूली बताया जाता है और इतिहास में हुई अमानवीय क्रूरताओं के प्रति एक पक्षपातपूर्ण दृष्टि आरोपित की जाती है.

‘होलोकास्ट इंडस्ट्री’ की इसी यहूदी लाबी ने स्विस बैंक को कैसे घुटने टेकने पर और उसे 1.25 बिलियन डॉलर हर्जाने के तौर पर देने पर मजबूर किया, इसका बहुत ही दिलचस्प विवरण इस किताब में है.

दरअसल स्विस बैंक में उन यहूदियों के खाते थे, जो होलोकास्ट में मारे गए. यह हर्जाना उन्हीं खातों में जमा पैसों को लेकर था, लेकिन इससे ज्यादा ऐसे ही खाते अमरीका में भी थे, लेकिन यहूदी लॉबी ने यहां चुप्पी ओढ़ ली और हर्जाने की कोई मांग नहीं की.

अपनी इस महत्वपूर्ण किताब में Finkelstein इसी ‘होलोकास्ट इंडस्ट्री’ का पर्दाफाश करते हैं और यह चेतावनी भी देते हैं कि होलोकास्ट से संबंधित किसी भी साहित्य को पढ़ते हुए उसकी राजनीति पर भी एक नज़र डाल लेना बेहद जरूरी है.

Read Also –

‘वियतनाम, अफगानिस्तान, अल्जीरिया को देखिए कि औपनिवेशिक युद्ध कैसे समाप्त हुए ?’ – हमास
हिटलर सिर्फ़ ‘हिटलर’ में नहीं होता

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Tags: FinkelsteinHitlarHolocaustHolocaust IndustryIsraelJewishRabbi Arnold JacobWolf
Previous Post

‘चौरी चौरा’ विद्रोह : जनता की बगावत को सलाम !

Next Post

16 फरवरी को ग्रामीण भारत बंद का अपील किया है किसान-मजदूरों का संयुक्त मोर्चा ने

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘कास्ट एंड रिवोलुशन’ : जाति उन्मूलन का एक क्रान्तिकारी नज़रिया

by ROHIT SHARMA
June 9, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘नो अदर लैंड’, तब जाएं तो जाएं कहां ?

by ROHIT SHARMA
April 16, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

by ROHIT SHARMA
April 2, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

दि फर्स्ट ग्रेडर : एक मर्मस्पर्शी फिल्म

by ROHIT SHARMA
March 23, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘No Other Land’: A moment of hope and solidarity

by ROHIT SHARMA
March 4, 2025
Next Post

16 फरवरी को ग्रामीण भारत बंद का अपील किया है किसान-मजदूरों का संयुक्त मोर्चा ने

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

गधे की विडंबना

August 21, 2024

काना शहर

September 21, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.