Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

रामदर्शन पांडेय उर्फ बिरिंची

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 12, 2020
in लघुकथा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

रामदर्शन पांडेय उर्फ बिरिंची

बिरिंची खड़ा है. बिरिंची काफ़ी देर से चौराहे पर खड़ा है. लेबर चौक. उसके हाथ में कुदाली है. सुबह की ठंढी हवा उसके बदन को चीर रही है. उसके बदन पर तीन सालों पहले ख़रीदी हुई क़मीज़ है, जगह जगह फटी हुई और बदरंग. उपरी जेब में बीड़ी का एक बंडल है, जिसमें दो सुट्टे बचे हुए हैं. एक भी रुपया नहीं. आज काम नहीं मिलने पर पैदल सात मील चलकर घर लौटना होगा. वहाँ भी भुखमरी.

You might also like

एन्काउंटर

धिक्कार

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

इन दिनों लेबर चौक पर यदा कदा काम मिलता है. इक्का-दुक्का लोग मास्क लगाए दिखते हैं. लेबर कॉंट्रेक्टर रामधन नहीं दिखता. सुना है तालाबंदी में गाँव चला गया, अभी तक नहीं लौटा. बिरिंची जहाँ खड़ा है, उसके बाजू में एक चाय ठेला है. प्लास्टिक के दो स्टूल ग्राहकों के लिए रखा हुआ है. खड़े-खड़े पैर थक जाने पर भी कोई उपाय नहीं है. उंकडु बैठे दूर तक नहीं दिखता. कोई ग्राहक आता हुआ दिखने पर बिरिंची दूर से पहचान लेता है. ग्राहक और सामग्री में अन्योन्याश्रय संबंध होता है.

ये बाज़ार है. क्रीतदासों को अब लोहे की ज़ंजीरें नहीं पहनाई जाती. ज़रूरत नहीं है. परिस्थितियों की ज़ंजीरें लोहे से ज़्यादा सख़्त होती हैं, यह मानव सभ्यता का अनुभव है. ग्यारह बजने को है. धूप में हल्की गर्मी है. बिरिंची खड़े-खड़े थक चुका है. वह बार-बार स्टूल की तरफ़ देखता है. अव्वल तो दोनों स्टूलों पर कोई न कोई बैठे दिखता है. कभी एक ख़ाली भी रही तो हिम्मत नहीं होती. स्टूल पर बैठने के लिए चाय पीनी होगी. चाय के लिए पैसे चाहिए. पैसे नहीं हैं.

बिरिंची को दूर से एक गाड़ी आती दिखती है. लेबर चौक के पास आकर गाड़ी धीमी होती है. बिरिंची समझ जाता है कि सेठ जी को लेबर की तलाश है. वह हाथ में कुदाली पकड़े कार की तरफ़ भागता है. उसके साथ लगभग दर्जन भर लेबर भी भागते हैं. सभी कार को घेर लेते हैं.

‘ जो भी दीजिएगा मालिक, काम कर देंगे,’ सबकी ज़ुबान पर एक ही बात.

‘ जो भंगी हो वही सामने आए, टंकी साफ करवाना है.’

सभी बिखर गए. दरअसल, भंगियों की एक टोली सुबह-सुबह किसी ने उठा ली थी. इस भीड़ में कोई भंगी नहीं था. बिरिंची सोच में पड़ गया. वह ब्राह्मण था. पहले भूमिहीन किसान, फिर लेबर बन गया था. उच्च जाति का होने का बहुत ख़ामियाज़ा उसने पहले भुगता था. कई बार उसे उसकी जाति के चलते नाली काटने जैसे काम नहीं मिलता. धीरे-धीरे वह रामदर्शन पांडेय से बिरिंची बना. अब लोग उसे बेरोकटोक काम पर ले लेते. ब्राह्मण देवता से गंदे काम करवाने का रिवाज हमारे सभ्य समाज में नहीं है.

‘ मैं हूँ मालिक, मैं कर दूँगा,’ बिरिंची ने आगे बढ़ कर कहा.

‘अरे, तू तो चमार है, भंगी का काम कैसे कर लेगा ?,’ दशरथ ने चिल्ला कर कहा.

सेठ जी समझ गए. ये बेवकूफ आपस में ही लड़ मरेंगे. वह बोले –

‘देखो, काम तो लेबर का ही है. इसमें जात-पात क्या देखना. मुझे चार लेबर चाहिए, जिसकी मर्ज़ी हो चले.’

इतना सुनना था कि दशरथ भी जाने को राज़ी हो गया. दो और राज़ी हुए. चारों सेठ के दिये हुए पते पर चल पड़े.

दिन भर चारों पैखाने की टंकी मुँह पर गमछा बाँधे साफ करते रहे. किसी ने टिफ़िन नहीं खाया. बदबू बर्दाश्त के क़ाबिल नहीं थी.

देर शाम, घर लौटकर बिरिंची ने अपनी पत्नी के हाथों एक हज़ार रुपए मज़दूरी के थमा कर नहाने चला गया. नहाते समय उसने कमर में लपेटे हुए जनेऊ को तोड़ कर फेंक दिया. लेबर की झुग्गियों में छुपने के लिए जनेऊ छुपाने की ज़रूरत थी, इसलिए कमर से बाँध कर रखता ताकि दिखे नहीं.
उस रात वह खाना नहीं खा पाया. मुँह में पहला कौर जाते ही अजीब-सी बदबू आई और उसे उल्टी हो गई. बहुत सारी उल्टी होने के बाद बिरिंची निढाल हो कर ज़मीन पर लुढ़क गया.

अगले दिन से बिरिंची कभी ख़ाली स्टूल की तरफ़ नहीं देखता था.

  • सुब्रतो चटर्जी

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

भारत ने जो प्रगति की थी, उसे धर्म के नाम पर मटियामेट कर दिया जाएगा

Next Post

मी लार्ड ! व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार वरवर राव को भी है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
लघुकथा

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है…

by ROHIT SHARMA
January 5, 2026
लघुकथा

सवाल

by ROHIT SHARMA
August 16, 2025
Next Post

मी लार्ड ! व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार वरवर राव को भी है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हिसाब

November 7, 2020

सावित्रीबाई फुले की बेटी (शिष्या) मुक्ता साल्वे, पहली दलित लेखिका का निबंध : ‘मंग महाराच्या दुखविसाई’

January 10, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.