Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

ढपोरशंख

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 17, 2021
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ढपोरशंख

एक मछुआरा समुद्र के किनारे अपने परिवार को लेकर रहता था और जीवन यापन के लिए समुद्र में मछलियां पकड़ता था. उसी से उसका और उसके परिवार का भरण पोषण होता था. उस मछुआरे ने सुन रखा था कि समुद्र एक देवता है और उनके पास अपार निधि है. एक दिन उसने सोचा क्यों न समुद्र देवता की अराधना करें और उनसे कोई वरदान प्राप्त कर लें, जिससे उसका और उसके गरीब परिवार का कुछ कल्याण हो जाए. इसी विचार से उसने समुद्र देवता की भक्ति में अराधना प्रारम्भ कर दी.

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

कुछ दिनों पश्चात समुद्र देवता उसकी भक्ति से प्रसन्न हो गए और उन्होंने प्रसन्न हो कर उस मछुआरे को एक शंख भेंट किया. शंख देकर समुद्र देवता ने उस मछुआरे से कहा, ‘यह शंख तुम्हारी सारी आवश्यकताएं पूर्ण करेगा. बस इसके प्रयोग में इतना ध्यान रहे कि यह शंख दिन भर में केवल एक ही बार तुम्हारी मांग पूरी करेगा. उसके पश्चात इसे पुनः प्रयोग में लाने के लिए अगले दिन की प्रतीक्षा करनी होगी.’

मछुआरा अत्यंत प्रसन्न हुआ. परन्तु दो चार दिन बाद ही उस शंख के प्रयोग की सीमा के कारण तनिक असमंजस में पड़ गया, और सोचने लगा कि काश, उस शंख के प्रयोग की कोई सीमा न होती तब कितना उत्तम होता.

इसी विचार के साथ उस मछुआरे ने पुनः समुद्र देवता की अराधना प्रारम्भ कर दी. कुछ दिनों की पूजा के बाद समुद्र देवता पुनः प्रसन्न हो गये और उस मछुआरे के मन की इच्छा जानकार उन्होंने उसे अपने हाथों से एक दूसरा शंख प्रदान किया. उससे कहा कि ‘इसका नाम ‘ढपोरशंख’ है. इस शंख से तुम जो कुछ भी मांगोगे, यह शंख उसका दुगुना तुम्हें देने की बात कहेगा, और इसके प्रयोग की कोई सीमा भी नहीं है.’

इतना सुनते ही उस मछुआरे ने पुराना शंख समुद्र में वापस फेंक दिया और ‘ढपोरशंख’ को लेकर ख़ुशी-ख़ुशी घर चल दिया. घर पहुंचते ही उसने ढपोरशंख से एक नए महल की मांग की. सुनते ही वह शंख बोला, ‘एक क्या दो महल ले लो.’ इस पर मछुआरा बोला, ‘ठीक है, दो महल बना दो.’

शंख फिर तपाक से बोल उठा, ‘दो क्या चार महल ले लो.’ फिर मछुआरे ने उस शंख से धन, वैभव, सम्पदा या जिस भी वस्तु की मांग की, उस शंख ने मांगी गई मात्रा के दोगुने, चौगुने को देने की बात की, परन्तु वास्तविकता में उस शंख से उस मछुआरे को हासिल कुछ नहीं हुआ.

मछुआरा यह जान और देख कर अत्यंत कुपित हुआ और पुनः समुद्र के किनारे खड़े हो कर समुद्र देवता को याद कर प्रार्थना करने लगा. समुद्र देवता पुनः प्रकट हुए. उनसे उस मछुआरे ने अपनी व्यथा बताई. इस पर समुद्र देवता मुस्कराते हुए बोले, ‘जिस शंख से तुम्हारी एक इच्छा प्रतिदिन पूरी हो सकती थी, तुमने उसे तो समुद्र में फेंक दिया. और दूसरा शंख जो मैंने तुम्हें बाद में दिया, वह तो ढपोरशंख है, केवल बोलता है, करता कुछ नहीं है.’

मछुआरे का जो हुआ सो हुआ परन्तु तब से हमारे समाज में ‘ढपोरशंखो’ की भरमार अवश्य हो गई !

नोट : इस कहानी के सभी पात्र और घटनायें कल्पनिक है. इसका मोदी से कोई सम्बन्ध नहीं है. कथित या अकथित रूप से यदि मोदी से कोई समानता मिलती है तो इसे मात्र एक संयोग कहा जायेगा.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

26 मई को किसान मनायेंगे काला दिवस; हर घर, वाहन व मोर्चों पर लगेंगे काले झंडे, फूंकेंगे मोदी का पुतला

Next Post

खंडहरों के बीच

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

खंडहरों के बीच

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आदिवासियों के लिए काम करने वाले फादर स्टेन स्वामी के शिलालेख के उद्घाटन से रोक रही है सरकार

January 24, 2023

सीखने के लिए आप किस चरित्र को चुनते हैं, आपका चयन है…

August 28, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.