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विद्यासागर की मूर्त्ति को तोड़कर भाजपा ने भारत की संस्कृति पर हमला किया है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 20, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
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किसी महापुरूष की प्रतिमा किसी भी समाज-सभ्यता और देश के संस्कृति का एक अहम हिस्सा होता है. वह वर्तमान को अतीत से जोड़ता है और भविष्य का मार्ग दिखलाता है. ये तमाम महापुरूष का मानव समाज के प्रति कोई-न-कोई महान देन होता है. परन्तु भाजपा भी इस देश की सभ्यता-संस्कृति को अतीत से वर्तमान को जोड़ना चाहता है और देश को अतीत में ले जाना चाहता है. यही कारण है कि वह हर उस महापुरूषों से घृणा की हद तक नफरत करती है, जिन्होंने मानव-समाज में अपनी भूमिका निभायी है. मसलन, आरएसएस-भाजपा के गुंडे भीमराव अम्बेदकर की प्रतिमा को आये दिन तोड़ रहा है. महात्मा गांधी की तो न केवल प्रतिमा ही तोड़ी जा रही है, अपितु उनकी हत्या का अभिनय भी आये दिन सरेआम दोहराकर उन्हें अपमानित भी किया जा रहा है. त्रिपुरा में अपनी जीत का जश्न मनाते हुए नफरत की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करते हुए अन्तर्राष्ट्रीय सर्वहारा के महान नेता लेनिन की प्रतिमा को बजाप्ता बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया और अब घृणा से भरे आरएसएस-भाजपा के गुंडे महान समाज-सुधारक ईश्वरचंद विद्यासागर की प्रतिमा को हथौड़ा से तोड़ डाला.

सवाल है, आखिर आरएसएस-भाजपा और उसके गुंडों को देश महापुरूषों से नफरत क्यों है ? जवाब है क्योंकि वे सारे महापुरूष, जिनकी प्रतिमा पर इस गुंडों का कहर बरपता है, अमानवीय ब्राह्मणवाद का जबर्दस्त विरोधी थे, वे मानव मात्र को एक समान मानते थे, वे मेहनतकश आवाम के प्रबल हिमायती थे. यहां तक कि ईश्वरचंद विद्यासागर भी विधवा विवाह, जो ब्राह्मणवादी अनाचार के कारण समाज में उग आये थे, के प्रबल समर्थक थे. यही कारण है कि ये भाजपाई-आरएसएस गुंडों ने उनकी प्रतिमा को ध्वस्त किया.

भाजपा-आरएसएस ब्राह्मणवादी अनैतिकता जो क्रूरता की हद तक अमानवीय है, का प्रबल पक्षधर है, और इस अनैतिकता को देश में एकबार फिर स्थापित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है. बहरहाल पश्चिम बंगाल में ईश्वरचंद विद्यासागर की प्रतिमा को ध्वस्त करने पर रविश कुमार की टिपण्णी. ]

विद्यासागर की मूर्त्ति को तोड़कर भाजपा ने भारत की संस्कृति पर हमला किया है

 Ravish Kumar रविश कुमार, पत्रकार

बंगाल में विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने की घटना ने दोनों राजनीतिक दलों को भिड़ा दिया है. कोलकाता की घटना के कुछ और वीडियो सामने आए हैं. एक वीडियो हमें व्हाट्स एप से मिला है. इस वीडियो से ज़ाहिर है कि बीजेपी के कार्यकर्ता विद्यासागर गेट पर हमला कर रहे हैं. ढाई मिनट का यह वीडियो है आप पूरा देखिए. इसे भी चुनाव आयोग के पास जमा कराया गया है.

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तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कई वीडियो ट्विट किए हैं और चुनाव आयोग को भी जमा कराया है. आज भी डेरेक ओ ब्रायन ने एक वीडियो ट्विट किया है यह साबित करने के लिए कि बीजेपी के नेता हिंसा कर रहे हैं. हम जो वीडियो दिखा रहे हैं उससे लगता तो है कि बीजेपी ने हिंसा की है मगर एक बात का ध्यान रखिएगा. कालेज के भीतर से क्या हुआ, इसका वीडियो हमारे पास नहीं है. जरूर पुलिस और चुनाव आयोग के कैमरामैन के पास होना चाहिए.




हमने कई वीडियो में देखा कि बीजेपी के लोग कालेज पर हमला कर रहे थे और अपने मोबाइल से वीडियो भी बना रहे थे. इसके बाद हमने बंगाल बीजेपी के चीफ दिलीप घोष के ट्विटर अकाउंट पर जाकर देखा कि क्या उनके पक्ष को साबित करने वाला वीडियो है. जिसमें तृणमूल के कार्यकर्ता गुंडागर्दी करते हुए दिखा दे रहे हों या कालेज के भीतर से पत्थर चल रहा हो. हमने बंगाल बीजेपी के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के ट्विटर हैंडर पर जाकर चेक किया. वहां एक न्यूज़ चैनल का वीडियो है जिसमें कुछ लोग कालेज के गेट पर हमला कर रहे हैं मगर उसी वीडियो डेरेक ओ ब्रायन ने दिखाया था कि बीजेपी के कार्यकर्ता तोड़ रहे हैं. कैलाश विजयवर्गीय के ट्विटर हैंडल में एक वीडियो अपलोड किया है. यह वीडियो उनकी पार्टी के प्रचार का है.

यह वीडियो बांग्ला में है. इसमें धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है. पता चलता है कि अमित शाह के रोड शो में धार्मिक झांकी निकाली गई. राम और लक्ष्मण बने हुए हैं, राम की बड़ी सी प्रतिमा लेकर रोड शो में गए हैं. जय श्री राम के नारे लग रहे हैं. ममता बनर्जी को एक खास धार्मिक समुदाय का समर्थक दिखाया गया है. उन्हें हिन्दुओं को मारने वाला बताया है. यह वीडियो पूरी तरह से सांप्रदायिक है. अगर वाकई चुनाव आयोग होता तो कार्रवाई करता. इस वीडियो में विद्यासागर कालेज पर हमला करते पुलिस से जूझते कार्यकर्ताओं को भी दिखाया गया है. इसमें हिन्दू वोटर की बात की गई है और अंत में जय श्री राम का नारा लगता है और अमित शाह का चेहरा आक्रामक रूप से लाल हो जाता है.




ऐसा वीडियो किसी दूसरी पार्टी के प्रचार के लिए बनता तो चुनाव आयोग को अपने नियम याद आ जाते मगर बीजेपी के इस प्रचार वीडियो में जिस तरह से धार्मिक प्रतीकों और नारों का इस्तेमाल हुआ है उससे लगता है कि चुनाव आयोग अपने काम का चुनाव सावधानी से कर रहा है. यह वीडियो कैलाश विजयवर्गीय के ट्विटर हैंडल पर मौजूद हैं. आज ममता बनर्जी ने एक व्यक्ति राकेश सिंह का वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में राकेश सिंह बीजेपी के टीशर्ट में है और हिंसा की बात कर रहा है. हिंसा के लिए तैयार रहने की बात कर रहा है.

ममता बनर्जी यह दिखा कर आरोप लगा रही हैं कि बीजेपी के नेता हिंसा की तैयारी कर रहे थे. बंगाल के बीजेपी चीफ दिलीप घोष ने राकेश सिंह के बयान का बचाव किया है. कहा है कि अगर कोई पार्टी कार्यकर्ता अपनी सुरक्षा की बात कर रहा है तो इसमें कोई हर्ज नहीं है. बूम लाइव को दिए बयान में राकेश सिंह ने कहा है. राकेश सिंह पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. राकेश सिंह पहले कांग्रेस का उम्मीदवार रहा है. विधानसभा चुनाव के बाद राकेश सिंह बीजेपी में आ गया.

कोलकाता की सड़क पर ईश्वरचंद्र विद्यासागर बनकर कृष्णचंद वैरागी दिखे. बीजेपी के समर्थक हैं. कृष्णचंद वैरागी कहते हैं कि तीस साल से वे बंगाल के अलग अलग महापुरुषों का भेष धारण करते रहे हैं. बीजेपी का उम्मीदवार अब कृष्णचंद वैरागी को विद्यासागर बनाकर कोलकाता में घुमा रहे हैं कि उनकी पार्टी विद्यासागर का कम सम्मान नहीं करती है. वैरागी जी ने कहा कि कल रात यानी 15 मई की रात ही उन्हें बीजेपी पकड़कर लाई है. किराये पर विद्यासागर बीजेपी तो ले आई मगर मामला मूर्ति तोड़े जाने को लेकर है. इसका असर आज प्रधानमंत्री की सभा पर भी पड़ा. प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी विद्यासागर की ऊंची प्रतिमा बनवाएगी. उसी जगह पर.




ममता बनर्जी ने तो 15 मई को ही विद्यासागर के सम्मान में मार्च कर दिया था. उनके मार्च में कार्यकर्ता बंगाल के महापुरुषों की तस्वीरें ले आए. ममता कहती हैं कि प्रधानमंत्री को समर्पित एक काली प्रतिमा होनी चाहिए जो आपातकाल की याद दिलाए. ममता ने यह नहीं कहा कि प्रधानमंत्री की मूर्ति लगनी चाहिए बल्कि भाषा का खेल यहां देखिए. कहती हैं कि प्रधानमंत्री को समर्पित एक काली मूर्ति होनी चाहिए.

ममता बनर्जी की डायमंड हार्बर में रैली थी. जहां एक दिन पहले प्रधानमंत्री की रैली थी. डायमंड हार्बर की रैली में ममता ने अपना पूरा भाषण बंगाल के गौरव से भर दिया. ममता ने कहा कि जब भारत को आज़ादी मिली तब गांधी बंगाल में थे. राष्ट्रगान बंगाल की देन है. जय हिन्द और वंदेमातरम बंगाल की देन है. नेताजी ने इंडियन नेशनल आर्मी बनाई. ईश्वरचंद्र विद्यासागर ज्ञान के सागर थे. ममता ने कहा कि तृणमूल ने मूर्ति नहीं तोड़ी है. तृणमूल ऐसा काम नहीं करती है. ममता का भाषण आक्रामक था. हदें भी टूट रही थीं. कहा कि नरेंद्र मोदी जी आप ममता बनर्जी को कितना जानते हैं. उसका सारा जीवन गोली और बंदूक से लड़ते हुए गुज़ारा है.

प्रधानमंत्री मोदी की कोलकाता में रैली थी. दमदम में रैली करते हुए उन्होंने धार्मिक मुद्दा उठा दिया. अब चुनाव खत्म हो रहा है. चुनाव आयोग क्या संज्ञान लेगा. बंगाल का चुनाव है इसलिए घुसपैठिए की बात आ गई. फिर बीजेपी और प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि सिटिजन अमेंडमेंट बिल पास क्यों नहीं कराया. हालांकि इस बिल को लेकर सांप्रदायिक आधार पर नागरिकता की व्याख्या की आलोचना की गई थी मगर असम और पूर्वोतत्र में इस बिल के खिलाफ हुई हिंसा को देखते हुए सरकार ने इसे राज्य सभा से पास नहीं कराया. क्या एक समुदाय विशेष को टारगेट करने के लिए घुसपैठियों का मुद्दा बनाया जा रहा है. फिर भारत सरकार के गृह मंत्रालय और असम सरकार को नेशनल रजिस्टर का काम पूरा न करने को लेकर फटकार क्यों सुननी पड़ी. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बारे में इंटरनेट सर्च कीजिए. इस चुनाव में एक चुनाव चुनाव आयोग को लेकर भी हो रहा है. कोलाकाता में अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने 9 सीटों के लिए प्रचार 20 घंटे पहले रोक दिया. झगड़ा बीजेपी और तृणमूल के बीच हुआ था लेकिन सज़ा कांग्रेस को भी मिली, सीपीएम को भी मिली और उन निर्दलीय उम्मीदवारों को भी मिली जिनका इस घटना से कोई लेना देना नहीं था. आखिर चुनाव आयोग ने सभी का प्रचार 20 घंटे पहले क्यों रोका.




बंगाल को लेकर बीजेपी भी चुनाव आयोग पर आरोप लगा रही है. बीजेपी का कहना है कि बंगाल के मामले में चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है. बीजेपी को बताना चाहिए और चुनाव आयोग को भी कि उसकी सभाओं में धार्मिक नारे लगाने की अनुमति किसने दी. जय श्री राम का नारा क्या धार्मिक नारा नहीं था.

अगर चुनाव आयोग है तो क्या चुनाव आयोग को नहीं बताना चाहिए कि अमित शाह का रोड शो धार्मिक रोड शो है या राजनीतिक रोड शो. क्या चुनाव के समय में धार्मिक झांकियों के साथ रोड शो निकालने की इजाज़त दी जा सकती है. क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ने बंगाल के पर्यवेक्षक से पूछा कि किसकी अनुमति से ये धार्मिक यात्रा निकल रही थी.क्या अमित शाह के रोड शो का कोई और मकसद था. क्या इस तरह का रोड शो निकालने की अनुमति किसी और दल को दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धार्मिक भावना और प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए था. जब कोर्ट ने आयोग से पूछा था तब धार्मिक बयान देने के कारण आज़म खान और योगी आदित्यनाथ, मेनका गांधी पर प्रचार करने से रोक लगी थी. क्या आयोग भारत की जनता को एजुकेट कर सकता है बता सकता है कि ये धार्मिक रैली किसकी इजाज़त से निकल रही है. क्या सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले सकता है. बात है कि इस पर बात क्यों नहीं हो रही है. हम चुनाव में हैं या रामलीला मैदान में हैं.

रविश कुमार की इस आलेख के साथ हम भाजपा और उसके गुंडों द्वारा फैलाये जा रहे दुष्प्रचार कि ‘विद्यासागर की मूर्त्ति को तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं ने तोड़ा है’, के सन्दर्भ में यह लिंक यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भाजपा के शीर्ष गुंडे अमित शाह से लेकर नीचे तक के गुंडे किस प्रकार दुष्प्रचार में माहिर होते हैं.




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