Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हाथरस : कानून-व्यवस्था शक्तिशाली जमातों के चंगुल में

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 1, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

हाथरस : कानून-व्यवस्था शक्तिशाली जमातों के चंगुल में

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना
हाथरस जैसी घटनाएं सिर्फ इसका संकेत नहीं हैं कि दलित आज भी कितने उत्पीड़ित हैं, यह इस बात का भी खुला संकेत है कि हमारी कानून-व्यवस्था शक्तिशाली जमातों के चंगुल में आज भी है.

सुना है, हाथरस में घटी हैवानियत की घटना की लीपापोती करने में बड़े-बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगे हुए हैं. जाहिर है, नेता जी लोग चाहे जितने प्रपंच रचें, इस तरह की घटनाओं में पुलिस-प्रशासन के आला अफसरों के सक्रिय सहयोग के बिना मामले की लीपापोती नहीं की जा सकती.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

मन में सवाल उठता है कि ये इतने बड़े-बड़े अधिकारी गण इस तरह के घृणित अपराधों में भी आखिर कैसे अपनी न्यूनतम मानवीयता को ताख पर रख कर नेताओं के राजनीतिक हितों के लिये मामलों की लीपापोती में लग जाते हैं ? आखिरकार, जब उनकी नौकरी लगी होगी तो उन्हें पता होगा कि उनकी प्रतिबद्धता अंततः कानून और संविधान के प्रति है. ठीक है कि सत्तासीन राजनेताओं की चापलूसी के बहुत सारे फायदे हैं लेकिन, कोई हद भी तो होती है.

अभी खबरों में देख रहा हूं, पुलिस ने परिजनों की सख्त आपत्ति के बावजूद उस मृतका का दाह संस्कार आधी रात को कर दिया. फिर, कोई बड़ा अधिकारी बयान दे रहा है कि रेप नहीं हुआ, कोई अधिकारी कह रहा है कि जीभ नहीं काटी गई. अब जब शव का दाह संस्कार ही हो गया तो बहुत सारे साक्ष्य भी खत्म हो गए. जो हाकिम बोलें, वही सही माना जाएगा.

रेप हुआ या नहीं, जीभ काटी गई या नहीं, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन उस मासूम किशोरी के साथ ऐसी हैवानियत की गई कि अंततः उसकी मार्मिक मौत हो गई. आखिर क्या कारण रहा होगा कि एक किशोरी की हत्या इतने खौफनाक तरीके से की गई ? क्या रेलवे ठेकेदारी का विवाद था ? क्या राजनीतिक विवाद था ? क्या गैंगवार की परिणति थी यह हत्या ?

सीधी-सी बात है कि वह लड़की थी, मासूम उम्र की थी, एक कमजोर जाति की थी और सबसे बड़ी बात, जिस गांव में वह रहती थी उसमें उसकी जाति के महज़ 15 घर थे, जबकि, जैसा सुना है, जिन आतताइयों पर आरोप है, उनकी जाति के करीब 600 घर हैं उस गांव में. हम समझ सकते हैं कि मामला क्या रहा होगा और क्यों ऐसी क्रूर हत्या हुई. हम अंदाजा लगा सकते हैं कि 600 घरों वाले लोगों में कुछेक प्रभावी अफसर होंगे, कई छुटभैये नेता होंगे, टोपी वाले कई रसूखदार होंगे जिनकी आमदरफ्त अक्सर थाना और ब्लॉक में होगी.

हमें कोई संदेह नहीं कि उनमें कई सक्रिय हो गए होंगे कि मामले की लीपापोती हो और गुनहगारों पर कोई आंच न आए. आखिर, अपना बच्चा है, थोड़ी ऊंच-नीच हो गई तो ऐसा इस उम्र में होता ही रहता है. सदियों की परंपरा जो है, पोते-भतीजे कमजोरों के साथ गुनाह करेंगे, बाबा-चाचा लोग उसे बचाने में लग जाएंगे.

अब 600 घर हैं तो एक वोटबैंक है न ? मामूली बात नहीं है कि एक कमजोर वर्ग की बालिका को न्याय दिलाने के फेर में हजारों वोटों को दांव पर लगा दें. नेताओं के अपने दांव हैं. अफसरों के अपने दांव.

न जाने कितनी हत्याएं, न जाने कितने बलात्कार, न जाने कितने अत्याचार होते हैं जिनका कोई निष्कर्ष नहीं निकलता. इलाके का बच्चा-बच्चा जानता रहता है कि गुनहगार कौन लोग हैं लेकिन पुलिस नहीं जानती, कोर्ट को पता नहीं चल पाता. फिर, इलाके का बच्चा-बच्चा अपनी खुली आंखों से देखता है कि वही गुनहगार आरोप मुक्त हो चौराहे पर खड़े ऐंठ रहे हैं. यह हमारे सभ्य होने पर और हमारे देश-समाज में कानून का राज होने पर जोरदार तमाचा है. ऐसे तमाचे लगते ही रहते हैं.

पुलिस-प्रशासन के जो बड़े अफसर इस तरह के मामलों में भी लीपापोती में लग जाते हैं, पता नहीं किन दबावों में, वे भी तो शाम को अपने घर लौटते होंगे. आखिर, वे अपनी बड़ी होती बेटियों से, बहनों से कैसे आंख मिला पाते होंगे ? कपिल मिश्रा का वह वायरल वीडियो, जिसमें वह कानून अपने हाथ में लेने की धमकी खुलेआम दे रहा था, उसमें उसके बगल में खड़े पुलिस के डीसीपी का चेहरा याद करें. हे..हे करता हंसता हुआ चेहरा. न कोई लाज, न कोई शर्म, न कोई अपराध बोध, जबकि उसके बगल में उस आपराधिक भाषा में बात करता कपिल मिश्रा पहली घनघोर बेइज्जती उस डीसीपी की ही कर रहा था.

क्या इतना बड़ा पुलिस अधिकारी सार्वजनिक रूप से इतना बेगैरत हो सकता है ? लेकिन, सबने उस अधिकारी को सैकड़ों लोगों के सामने बेगैरत हंसी हंसते देखा. जब वह डीसीपी अपने घर लौटा होगा तो अपने बच्चों से कैसे नजरें मिलाई होंगी उसने ? बच्चे तो उसके लौटने से पहले ही उस वीडियो को देख चुके होंगे.

यूपी-बिहार जैसे सामंती मिजाज वाले प्रदेशों में आज भी घटती ऐसी घटनाएं रामविलास पासवान, मायावती, जीतन मांझी आदि दलित नेताओं की राजनीति की खुदगर्ज नग्नता को उजागर करती हैं और आवाहन करती हैं कमजोर वर्ग के प्रत्येक व्यक्ति का कि वे नई राजनीति की ज़मीन तैयार करें, जिसमें ऐसे नेताओं का आना सम्भव हो सके जो उनके हितों की कीमत पर अपनी राजनीति की दलाली न करें.

हाथरस जैसी घटनाएं सिर्फ इसका संकेत नहीं हैं कि दलित आज भी कितने उत्पीड़ित हैं, यह इस बात का भी खुला संकेत है कि हमारी कानून-व्यवस्था शक्तिशाली जमातों के चंगुल में आज भी है. शक्ति का क्या है, कल किसी दूसरी जमात में हस्तांतरित हो सकती है. इतिहास अपनी गति से चलता है और न जाने कितने उत्थान-पतनों को अपने में समेटे नए दौर का सृजन करता आगे बढ़ता जाता है.

कोई भी हमेशा, हर दौर में शक्तिशाली नहीं रह सकता. जो आज कमजोर हैं, वे अगले दौर में मजबूत होंगे. होंगे ही, कोई नहीं रोक सकता उन्हें. धीरे-धीरे ही सही, समय बदल रहा है और एक दिन यह समाज भी बदला हुआ दिखेगा, शक्ति के समीकरण भी बदले हुए दिखेंगे. महज़ तीन दशकों के सामाजिक-राजनीतिक बदलावों से ही आगे कुछ दशकों के संभावित बदलावों का आकलन कर लीजिये. कानून और कोर्ट को जितना कमजोर करते जाएंगे, अपने बच्चों की जिंदगियों को सांसत में डालते जाएंगे. कोई भी नहीं बचेगा ऐसे में.

Read Also –

इंसाफ केवल हथियार देती है, न्यायपालिका नहीं
औरंगजेब : एक बेमिसाल और महान शासक
नारी शिक्षा से कांंपता सनातन धर्म !
पूंजीपतियों के मुनाफा के लिए मजदूरों का शोषण करती सरकार
तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो
देश में बलात्कार और मॉबलिंचिंग को कानूनन किया जा रहा है ?
बलात्कार एक सनातनी परम्परा
बलात्कार भाजपा की संस्कृति है
रेप और गैंगरेप जैसे अपराध पर पुरुषों की मानसिकता
मनुस्मृति : मनुवादी व्यवस्था यानी गुलामी का घृणित संविधान (धर्मग्रंथ)
गार्गी कॉलेज में छात्राओं से बदसलूकी
नारी शिक्षा से कांंपता सनातन धर्म !
तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो
देश में बलात्कार और मॉबलिंचिंग को कानूनन किया जा रहा है ?
संघी एजेंट मोदी : बलात्कारी हिन्दुत्व का ‘फकीर’
गायत्री मंत्र की अश्लीलता एवं सच्चाई

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

भगतसिंह के जन्मदिन पर : तख़्तापलट का गुप्त षड्यन्त्र

Next Post

घृणित संघी राष्ट्रवाद के बजाय ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ आज का सच है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

घृणित संघी राष्ट्रवाद के बजाय 'वसुधैव कुटुम्बकम' आज का सच है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

पटियाला हाऊस कोर्ट में केजरीवाल और टीम की हत्या की धमकी के मायने

पटियाला हाऊस कोर्ट में केजरीवाल और टीम की हत्या की धमकी के मायने

March 26, 2017

मजदूरों का लोंग मार्च राजनीतिक प्रतिरोध नहीं है

May 12, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.