Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सारकेगुड़ा : आदिवासियों की दुःखों से भरी कहानियां

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 7, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सारकेगुड़ा : आदिवासियों की दुःखों से भरी कहानियां

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता

छत्तीसगढ़ के सारकेगुड़ा गांव में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट आने के बाद अपराधियों के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग को लेकर अनशन पर बैठा था. मुख्यमंत्री के सलाहकार ने कारवाई करने का आश्वासन दिया. थाने से अपना अनशन समाप्त कर सारकेगुड़ा गांव वापस आया.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

यह वही गांव है जहां 7 साल पहले 17 निर्दोष आदिवासियों को पुलिस ने चारों तरफ से घेरकर गोलियों से भून दिया था. आज दोपहर का खाना खिलाने के लिए एक आदिवासी लड़की अपने घर ले गई. लड़की का घर आधा बन चुका है. घर के सामने मिट्टी की कच्ची ईंटें पड़ी हुई हैं.

मैने पूछा, ‘घर बनाने के लिए यह ईंटें कौन बना रहा है ?’ वह बोली, ‘मैं खुद बना रही हूं.’ अन्य ग्रामीणों के अलावा यह लड़की भी कल से थाने में मेरे साथ थी. मैंने पूछा, ‘बेटा तुम्हारी पढ़ाई पूरी हो गई ?’ लड़की ने कहा, ‘नही. बीएससी कर रही थी लेकिन पैसे नहीं थे इसलिए पढ़ाई छोड़ दी.’ मैंने कहा, ‘पढ़ाई फिर से चालू करो. पैसे का कहीं ना कहीं से इन्तजाम हो जाएगा. हम अपने कुछ मित्रों से मदद के लिये कहेंगे.’

आज खाना खाते समय लड़की के घर में बैठा था उसने मुझे बताया कि ‘मेरा घर सलवा जुडूम के समय पुलिस ने जला दिया था. बाद में इस गांव के दूसरे घरों को जलाया गया था. लड़की ने बताया मेरे पिताजी का हाथ भी पुलिस ने तोड़ दिया था. इस घटना के कुछ समय बाद पिताजी का देहांत हो गया. दीवार पर एक बच्चे की फोटो लगी थी और उस पर फूलों का हार चढ़ा हुआ था.

मैंने पूछा, ‘यह किसका फोटो है ?’

लड़की ने बताया था, ‘यह मेरा छोटा भाई है. उस रात पुलिस ने जब ग्रामीणों पर गोली चलाई, तब यह भी मारा गया.’ मैंने फोटो के नीचे लिखा हुआ नाम पढ़ा. मुझे पूरी घटना याद आ गई.

मैंने कहा, ‘यह तो वही बच्चा है जो गणित में गोल्ड मेडलिस्ट था.’

वह लड़की बोली, ‘जी हां, यह वही है.’

मैं सोचने लगा पहले निर्दोष पिता को पुलिस ने मारा. फिर पुलिस ने घर जला दिया. फिर छोटे भाई को भी मार दिया. पिछले 7 साल से लड़की यह लड़की जांच आयोग की मदद कर रही थी. गांव के आदिवासियों को ले जाकर आयोग के सामने गवाही दिलवा रही थी. अब जांच आयोग ने फैसला दिया है कि मारे गए आदिवासी निर्दोष ग्रामीण थे, जिनकी पुलिस ने हत्या की थी.

मैं सोच रहा था आदिवासियों की दुःखों से भरी यह कहानियां क्या कभी इस देश के तथाकथित सभ्य समाज के सामने कभी आएंगी ? इस लड़की का साहस, धैर्य और इसके दुःख की क्या हमारे समाज के लिये कोई कीमत है ? मैं चाहता हूं कि मेरी बेटियां इस लड़की से मिलें और सीखें कि जिंदगी का मुकाबला कैसे किया जाता है ?

Read Also –

छत्तीसगढ़ : पोटाली गांव में सुरक्षा बलों का आदिवासियों के खिलाफ तांडव
गरीब आदिवासियों को नक्सली के नाम पर हत्या करती बेशर्म सरकार और पुलिस
छत्तीसगढ़ : आदिवासी युवाओं को फर्जी मुठभेड़ में मारने की कोशिश का विरोध करें
‘भारतीय पुलिस गुंडों का सबसे संगठित गिरोह है’
नक्सलवाद : लड़ाई तो सुरक्षाबलों और जनता के बीच है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

क्या ऐसे ही भारत में इंसाफ़ होगा ?

Next Post

तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

देश के वर्तमान सत्ताधारी शासक का पाखण्ड

January 21, 2021

रिज़र्व बैंक की स्वायत्ता को कैसे खोखला किया गया ?

April 4, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.