Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

जब उपलब्धियां गिनाने के लिए सरकार के हाथ खाली हों, तो सरकार क्या करे ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 22, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

जब उपलब्धियां गिनाने के लिए सरकार के हाथ खाली हों, तो सरकार क्या करे ?

 Vinay Oswal

विनय ओसवाल, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

तीन राज्यों में मिली पराजय के बाद आरएसएस का मानना है कि अकेले सरकार की उपलब्धियों के भरोसे चुनाव नही जीता जा सकता. 19 दिसम्बर को दिल्ली स्थित संघ के मुख्यालय में संघ के सरकार्यवाहक भैया जी जोशी ने देर रात तक क्षेत्रीय प्रचारकों के साथ किसानों की दशा, रोजगार के अवसरों की कमी के चलते युवाओं में व्याप्त बेचैनी, रामजन्म भूमि और संगठन में बदलाव की आवश्यकता पर गहन चिंतन-मनन और मन्थन किया है.

एक अनुमान के अनुसार अगले वर्ष मार्च में चुनाव आयोग संसद के चुनावों की घोषणा कर देगा यानी सरकार के पास लोक-लुभावन घोषणाएं करने और जमीन पर उनके परिणाम दिखाने के लिए अधिकतम तीन महीने का समय हाथ में है.

राम मन्दिर निर्माण, न्यायालय का नहीं देश के सौ करोड़ हिंदुओं की आस्था का विषय बताने वाले हिंदुत्ववादियों को नहीं सूझ रहा है कि इन सौ करोड़ लोगों को उनके इस प्रश्न, “वर्ष 2017 के बाद से इन दो वर्षों में वो संसद में राम मंदिर बनाने के लिए कानून क्यों नहीं बना पाई ?“ का क्या जवाब दे ? जबकि बहुसंख्यक हिंदुओं ने उ.प्र. और केंद्र दोनों में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकारें बना दीं, तो अब कौन सी नई बाधा को रोड़ा बताया जाए ?

“राम मंदिर निर्माण में कांग्रेस ने न्यायालय में अड़ंगा डाल दिया है“ – सरकार का यह आरोप सौ करोड़ हिंदुओं के गले नहीं उतर रहा क्योंकि उसके दिल-ओ-दिमाग में हिंदुत्ववादियों ने कूट-कूटकर यह भर दिया है कि “यह न्यायालय का नहीं आस्था का विषय है.“ और सरकार के कंधे पर जिम्मेदारी थी कि वह संसद में कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट की बाधा को समाप्त करती और सौ करोड़ लोगों की आस्था का सम्मान करती.

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव में उतरने से पूर्व भाजपा सरकार क्या कदम उठाती है ?

भाजपा और आरएसएस दोनों अपने-अपने नजरिये से सभी विकल्पों पर गहनता से विचार कर रहे हैं. राम मंदिर मुद्दे पर आरएसएस और भाजपा में सामंजस्य नहीं है. छन-छन कर ऐसी जानकारियां बाहर आ रहीं है.




आरएसएस के शीर्ष स्तर के अधिकारी और विहिप निरंतर राम मंदिर मुद्दे को जोर-शोर से उछाल रहै हैं. 25 नवम्बर को सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में, सरकार्यवाहक भैयाजी जोशी ने 9 दिसम्बर को दिल्ली के रामलीला मैदान में और उसी दिन सह-सरकार्यवाहक दत्तात्रय होसबोले ने बंगलुरू में मन्दिर बनाने के लिए सरकार पर कानून बनाने अथवा अध्यादेश लाने के लिए जोर डाला था, जबकि भाजपा इसे तूल देने से सहमत नही है. उसका मानना है कि सरकार की तमाम उपलब्धियां, तमाम योजनाएं, सारी मेहनत इस मुद्दे के नीचे दब कर दम तोड़ देंगी. वैसे भी मामला सुप्रीमकोर्ट में है इसलिए सरकार कानून बनाने या अध्यादेश लाने के खिलाफ है.

तीन राज्यों में मिली पराजय के बाद आरएसएस का मानना है कि अकेले सरकार की उपलब्धियों के भरोसे चुनाव नही जीता जा सकता. 19 दिसम्बर को दिल्ली स्थित संघ के मुख्यालय में संघ के सरकार्यवाहक भैया जी जोशी ने देर रात तक क्षेत्रीय प्रचारकों के साथ किसानों की दशा, रोजगार के अवसरों की कमी के चलते युवाओं में व्याप्त बेचैनी, रामजन्म भूमि और संगठन में बदलाव की आवश्यकता पर गहन चिंतन-मनन और मन्थन किया है.




राम मंदिर मुद्दे और अनुसूचित जाति उत्पीडन निषेध पर सुप्रीम कोर्ट की राहत को दरकिनार करने से छिटके मतदाताओं की भरपाई, इलाहबाद में होने वाले महाकुम्भ में अनुसूचित वर्ग के सन्तों को पहली बार थोक संख्या में महामंडलेश्वर पद से अलंकृत कर नए मतदाताओं की बड़ी संख्या को जोड़ने और मनुवादी होने के कलंक को मिटाने के लिए जी-तोड़ प्रायस किये जा रहे हैं. साथ ही प्रयास यह भी किये जा रहे हैं कि महाकुम्भ के इस आयोजन को पूरी दुनिया का सबसे भव्य और अभूतपूर्व आयोजन बनाया जाय, जिस पर सौ करोड़ हिन्दू गर्व कर सके. इस बात की पूरी संभावना है कि राम मंदिर न बना सकने से उपजी सौ करोड़ हिंदुओं की पीड़ा पर मरहम लगाने के लिए विश्व में सबसे ऊंची राम की भव्य मूर्ति की स्थापना अयोध्या में चुनाव से पूर्व कर दी जाएगी.

इसके अलावा नए वर्ष के जनवरी माह के मध्य में इलाहाबाद में आयोजित होने वाले महाकुम्भ से पूर्व पांच विश्वविद्यालयों की निगरानी में युवाओं-महिलाओं के बीच में भी नहीं है. जातीय समरसता की त्रिवेणी बहाने, धार्मिक सद्भाव का सैलाव लाने और प्रदूषित होते पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने के पांच वैचारिक महाकुम्भों का आयोजन किया गया है. आरएसएस को उम्मीद है युवाओं और महिलाओं का ध्यान राम मंदिर सहित सरकार की अन्य विफलताओं से हटाया जा सकेगा.




जब उपलब्धियां गिनाने के लिए सरकार के हाथ खाली हों और विफलताओं पर पर्दा डालना जरूरी हो, तो सौ करोड़ हिंदुओं को देवताओं की पसंद के धार्मिक आयोजनों की भव्यता का सोमरस पान सरकारी खर्चे पर कराने से बेहतर हाथ में और क्या बचता है ?

सम्पर्क नं. : +91 7017339966




Read Also –

राजसत्ता बनाम धार्मिक सत्ता
महान शहीदों की कलम से – साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज
भाजपा या कांग्रेस दोनों से त्रस्त जनता को दर्शाने वाला चुनावी नतीजा
भाड़े का टट्टू उर्जित पटेल का भी इस्तीफा : गंभीर संकट की चेतावनी




[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…] 

Previous Post

70 साल के इतिहास में पहली बार झूठा और मक्कार प्रधानमंत्री

Next Post

सहिष्णु भारत के असहिष्णु ठुल्ले !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

सहिष्णु भारत के असहिष्णु ठुल्ले !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आग से खेल रहा है G-7

June 18, 2024

(संशोधित दस्तावेज) भारत देश में जाति का सवाल : हमारा दृष्टिकोण – भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

September 21, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.