Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हाथरस : संघ मानता है, पढ़े-लिखे होना सबसे बड़ा अपराध है

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 11, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

हाथरस : संघ मानता है, पढ़े-लिखे होना सबसे बड़ा अपराध है

उत्तरप्रदेश पुलिस ने हाथरस मामले के बाद आए दबाव से निपटने के लिए पहले 4 मुस्लिमों को ‘PFI’ का एजेंट बताकर बलि का बकरा बनाया तो अब ‘राजकुमारी बंसल’ को ‘नक्सली’ प्रचारित कर बलि का बकरा बना दिया है. राजकुमारी बंसल पेशे से डॉक्टर हैं, जबलपुर में पीड़ित-शोषितों के लिए लड़-भिड़ जाने के लिए जानी जाती हैं. पिछले दिनों वे हाथरस पीड़िता के घर गईं, दो दिन उनके घर रुकी. इस बात को गोदी मीडिया और सरकार ने ये कहकर प्रचारित करना शुरू कर दिया कि राजकुमारी बंसल एक नक्सली हैं और पीड़िता की भाभी बनकर घर में रही थी.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

इस पूरे प्रकरण में आपने देखा होगा पीड़िता के साथ इस सरकार की कोई सहानुभूति नहीं रही. सरकार का पूरा जोर इस मामले के बाद उपजे दबाव से निकल लेने पर है. इसके लिए सरकार को जीतने निम्नस्तर पर गिरना होगा, वह गिर रही है. ये आरएसएस और भाजपा की पुरानी टेक्निक है मुस्लिमों को आतंकवादी कहकर टारगेट करो, और अगर आलोचक हिन्दू है तो उसे वामपंथी और नक्सली कहकर खत्म करो. इस टेक्निक के पीछे के पूरे वैचारिक विमर्श पर लिखा है, अगर वक्त हो तो पढ़िए- संघ (RSS) की इस टेक्निक को समझे बिना आप आरएसएस की राजनीति को नहीं समझ सकते.

संघ का हमेशा से एक गूढ़ उद्देश्य रहा है कि संघ को कथित ऊंची जातियों की, उसमें भी ऊंची जातियों के सक्षम पूंजीपतियों की सत्ता स्थापित करनी थी, जिसके लिए ‘हिन्दू धर्म’ का चोगा ही अंतिम विकल्प था. चूंकि लोकतंत्र में सीधे एक दो जाति की श्रेष्ठता का दावा करके विजयी नहीं हुआ जा सकता था, इसलिए अपनी जातियों को आगे बढ़ाने के लिए उस धर्म को चुना गया, जिसमें उन्हें शीर्ष पर रहने की वैधता मिली हुई थी. यही कारण है सीधे जाति से न लड़कर संघ ने धर्म का रास्ता चुना. अब धर्म के राज की स्थापना के लिए जरूरी है कि ‘सेक्युलरिज्म’ जैसे शब्द को अप्रसांगिक किया जाए. यही कारण है कि संघ की विचारधारा मानने वालों ने सबसे अधिक निशाना बनाया तो सेक्युलरिज्म शब्द को.

संघ के तमाम प्रचारकों, नेताओं, कार्यकर्ताओं, समर्थकों को ‘सेक्युलिरिज्म के नाम पर’, ‘सिक्यूलरिज्म’, ‘स्यूडो सेक्युलिरिज्म’, ‘फेक सेक्युलिरिज्म’ जैसी उपमाओं का उपयोग करते हुए देखा होगा. इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक टेक्निक ही काम करती है, सेक्युलिरिज्म अप्रासंगिक हो जाएगा तो स्वभाविक है उसकी जगह एक धार्मिक राज्य ही लेगा, जिसमें कि वर्चस्व केवल कुछेक अभिजातीय जातियों का ही होगा, जिससे कि संघ असल में ताल्लुक रखता है. यही भाषा बबिता फोगाट और रंगोली चंदेल की रही है. अब आप इनकी भाषा के निहितार्थ आसानी से समझ सकते हैं, और उस स्रोत को भी जिसने इनके दिमाग में डाला है कि सेक्युलिरिज्म ही देश का सबसे बड़ा दुश्मन है न कि लिंचिंग कर देना और जय श्री राम के नारों के साथ किसी को मार देना.

सेक्युलिरिज्म जो दुनिया के सबसे ब्राइट माइंड पीपल के मस्तिष्क से निकला ऐसा एकमात्र आईडिया है, जिससे आधुनिक राज्य बिना धार्मिक संघर्ष के संचालित किए जा सकते थे, उसे आधुनिक समझदार राज्यों ने अपनाया लेकिन भारत में उसे मलाइन करने में संघ शुरू से लगा रहा.

सेक्युलिरिज्म शब्द के अलावा दूसरा शब्द ‘वामपंथी’ है. चूंकि संघ अपने कथित दावों में कथित हिन्दू धर्म की लड़ाई लड़ रहा है, इसलिए हिंदुओं के ऐसे पढ़े-लिखे लोगों को साफ करना उसके लिए मुश्किल था, जो उसके रिग्रेसिव विचारों से सहमत न हों. चूंकि संघ इन्हें मुसलमान भी नहीं ठहरा सकता था और न ही इन्हें ईसाई मिशनरी ठहराकर अपराधी घोषित कर सकता था, इसलिए संघ ने हिंदुओं के पढ़े-लिखे वर्ग को साफ करने के लिए ‘वामपंथी’ शब्द को उठाया. और इस एक शब्द के खिलाफ इतना जहर बोना शुरू कर दिया कि वामपंथी शब्द सुनते ही नागरिकों को लगे कि वे आतंकवादियों की बात कर रहे हैं.

पहली बार जब मैंने वामपंथ शब्द सुना था तब मुझे यही जानने को मिला था कि ‘ये नक्सली होते हैं, हिंसा करते हैं, भारत को नहीं मानते, तिरंगा को नहीं मानते, देश की सीमाओं को नहीं मानते.’ इस तरह बिना वामपंथ को जाने-पढ़े ही मेरे मन में वामपंथ के लिए एक स्वभाविक घृणा आ गई. यही संघ का उद्देश्य है. अब जितनी नफरत आपमें, सेक्युलिरिज्म के लिए है, जितनी नफरत आपमें मुसलमानों के लिए है, ईसाई मिशनरियों के लिए है, वही नफरत आपमें अब हिंदुओं के उस उस वर्ग के लिए भी रहेगी जो संघ के झूठ में संघ के साथ नहीं है.

अब संघ के लिए हिंदुओं के उस वर्ग को हटाना आसान हो गया जो संघ की नफरत में उसके साथ नहीं है. अब संघ वामपंथी कहकर ‘हिंदुओं’ को भी साफ कर सकता था और आपको ये भी लगेगा कि संघ हिंदुओं की लड़ाई लड़ रहा है. इस प्रोपेगैंडा का प्रतिफल ये निकला है कि संघ के समर्थक आपको ये कहते हुए मिल जाएंगे कि ‘हिंदुओं के असली दुश्मन तो हिंदुओं का पढ़ा लिखा वर्ग ही है’. ‘इस देश को सबसे अधिक खतरा तो ‘ज्यादा’ पढ़े लिखे लोगों से है.’

यकीन मानिए संघ देश के एक बड़े हिस्से के मन में ये भरने में भी कामयाब रहा कि पढ़े-लिखे होना हमारी सदी का सबसे बड़ा अपराध है, जोकि पढ़-लिखकर हमको नहीं करना है. संघ नागरिकों के एक बड़े वर्ग के मन में ये भरने में भी कामयाब रहा कि यदि कथित ‘हिन्दू हितों’ के लिए कुछ हिंदुओं का सफाया करना पड़े भी तो देश हित में किया जा सकता है. यही कारण है कि संघ बाकी सबके मुकाबले वामपंथियों को अधिक निशाना बनाता है.

संघ की ये पुरानी टेक्निक है जिससे ये वैचारिक रूप से मुकाबला नहीं कर पाते उसे बदनाम करके ये अपनी प्रासंगिकता साबित करने की कोशिश करते हैं. जैसे इनके पास गांधी, नेहरू के मुकाबले के स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, तो इन्होंने गांधी, नेहरू के खिलाफ भ्रामक झूठ बुन-बुन कर उन्हें अप्रसांगिक बनाने की कोशिश की. अब देश के भोले-भाले नागरिक ये भूलकर कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान संघ क्या कर रहा था, इस बात पर आ गए कि नेहरू का तो एडविना से अफेयर था. गांधी तो बच्चियों के साथ सोता था.

दूसरे व्यक्ति को अप्रसांगिक बनाकर खुद को प्रासंगिक बनाना एक सर्वकालिक युक्ति है. यही संघ ने किया है. इसमें कुछ मेहनत भी नहीं लगती. इसका नतीजा ये निकला कि नेहरू और गांधी को पढ़े और जाने बिना ही नागरिक अब संघ की ओर देखेगा ही देखेगा. अब वह ये प्रश्न भी नहीं करेगा कि आपके पास स्वतंत्रता आंदोलन के समय नेहरू और गांधी जैसा एक चेहरा भी क्यों नहीं था ? नेहरू और गांधी जैसा श्रेष्ठ बनने का मार्ग कठिन था बल्कि उन्हें बदनाम करने का मार्ग बेहद सरल था. यही संघ ने अपनाया.

इसी प्रकार संघ ने हमारी भाषा में ‘लोकतंत्र के नाम पर’, ‘अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर’ ‘और ले लो आजादी’ ‘आजादी गैंग’ जैसे शब्द जोड़े. आप अब आसानी से समझ सकते हैं कि संघ ने न केवल लोकतंत्र जैसे मूल्य को अप्रसांगिक बनाया बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकारों को भी बेकार की बातें साबित करने में एक हद तक सफलता भी पाई है. आप आराम से अन्दाजा लगा सकते हैं लोकतंत्र अप्रसांगिक होगा तो राजशाही का आधुनिक रूप लागू करना कितना आसान होगा. यही संघ की इच्छा है. यही संघ कर रहा है.

अब आप सोचिए –

  • सेक्युलिरिज्म जैसा शब्द जो सभी धर्मों के लोगों के जीने की आजादी देता है.
  • अभिव्यक्ति की आजादी, जैसा शब्द जो आपके, मेरे, हम सबके बोलने की आजादी देता है.
  • लोकतंत्र, जो हम सबको स्वतंत्रता प्रदान करता है.

इन शब्दों को खोकर हम क्या पाने जा रहे हैं ? हमारे लोकतंत्र, हमारे बोलने की आजादी, हमारी स्वतंत्रता को खत्म करके कोई हमें क्या देना चाहता है ?

  • अगर लोकतंत्र नहीं तो क्या संघ लोकतंत्र की जगह वापस से जमींदारी, राजशाही, सामन्तशाही स्थापित करना चाहता है ?
  • अगर अभिव्यक्ति की आजादी नहीं तो क्या संघ ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ की जगह ‘लाठी की आजादी’ स्थापित करना चाहता है ?
  • क्या संघ सेक्युलिरिज्म और धार्मिक आजादी छीनकर केवल ऊंची जातियों के मंदिरों में प्रवेश की नीति को लागू करना चाहता है, जिसमें वेद, पुराण, उपनिषद पढ़ने की आजादी सिर्फ कुछेक जातियों को होगी ?

जबाव ढूंढिए, मिलेंगे, उतने भी मुश्किल नहीं.

  • श्याम मीरा सिंह

Read Also –

अंतरराष्ट्रीय साज़िश
हाथरस : इससे पहले कि अंधेरे में जलती लाश दिन के उजाले में उड़ती लाशों का कारण बन जाये
हाथरस : कानून-व्यवस्था शक्तिशाली जमातों के चंगुल में
इंसाफ केवल हथियार देती है, न्यायपालिका नहीं
औरंगजेब : एक बेमिसाल और महान शासक
नारी शिक्षा से कांंपता सनातन धर्म !
पूंजीपतियों के मुनाफा के लिए मजदूरों का शोषण करती सरकार
तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो
देश में बलात्कार और मॉबलिंचिंग को कानूनन किया जा रहा है ?
बलात्कार एक सनातनी परम्परा
बलात्कार भाजपा की संस्कृति है
रेप और गैंगरेप जैसे अपराध पर पुरुषों की मानसिकता
मनुस्मृति : मनुवादी व्यवस्था यानी गुलामी का घृणित संविधान (धर्मग्रंथ)
गार्गी कॉलेज में छात्राओं से बदसलूकी
नारी शिक्षा से कांंपता सनातन धर्म !
तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो
देश में बलात्कार और मॉबलिंचिंग को कानूनन किया जा रहा है ?
संघी एजेंट मोदी : बलात्कारी हिन्दुत्व का ‘फकीर’
पुलिस विभाग : अनैतिकता के जाल से निकलने की छटपटाहट
सेना, अर्ध-सेना एवं पुलिस, काॅरपोरेट घरानों का संगठित अपराधी और हत्यारों का गिरोह मात्र है
क्रूर शासकीय हिंसा और बर्बरता पर माओवादियों का सवाल

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

  •  Share on Facebook
  •  Share on Twitter
  •  Share on Google+
  •  Share on Reddit
  •  Share on Pinterest
  •  Share on Linkedin
  •  Share on Tumblr
Previous Post

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के गांव गढ़ा कोला का दर्शन

Next Post

मुक्ति का रास्ता

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

मुक्ति का रास्ता

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

ease of doing business रैंकिंग और हम

November 1, 2018

नफरत का विश्वगुरु आरएसएस, आज भी कांग्रेस के लिए दरी बिछाता है…!

August 28, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.