Saturday, June 13, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

यस बैंक : भारत की बैंकिंग प्रणाली इतिहास का सबसे बड़े संकट

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 13, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

यस बैंक : भारत की बैंकिंग प्रणाली इतिहास का सबसे बड़े संकट

गिरीश मालवीय, पत्रकार

आरबीआई द्वारा नियुक्त येस बैंक के नए कर्ता-धर्ता प्रशांत कुमार ने कुछ दिनों पहले कहा कि बैंक पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक 14 मार्च को दिसंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेगा. अभी तक यस बैंक ने तीसरी तिमाही के नतीजे घोषित नही किये हैं. अभी ये भी नही पता है कि कितना एनपीए हो गया है और एसबीआई को बलि का बकरा बनाया जा रहा है. कई विशेषज्ञ अनुमान जता रहे हैं कि बैंक का वास्तविक एनपीए 30 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच गया है. यह एक भयानक आंकड़ा है.

You might also like

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

कुछ ही देर में कैबिनेट और सीसीईए की बैठक होनी है. सूत्र कह रहे हैं कि इस बैठक के दौरान कैबिनेट में यस बैंक के रिस्ट्रक्चरिंग प्लान को मंजूरी दे दी जाएगी. इस प्लान के ही तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कल गुरुवार को 7,250 करोड़ रुपए में यस बैंक के शेयर खरीदने का ऐलान किया है, जबकि कुछ दिनों पहले एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार कह रहे थे कि स्टेट बैंक, यस बैंक में अधिकतम 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर सकता है. मजे की बात यह है कि जब यस बैंक के धड़ाम होने की खबर आयी थी तो अगले दिन स्टेट बैंक 12 हजार करोड़ डालने के प्लान बना रहा था.

यानी अब एसबीआई भी बड़ी रकम निवेश करने से पीछे हट रहा है. उसके शेयरों के दाम भी गिरते जा रहा है. कल रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का बड़ा बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि यस बैंक ने अपनी दिक्कतों के बारे में कई बार सूचित किया था और इन दिक्कतों को दूर करने की योजना बनाने के लिये पर्याप्त समय उपलब्ध था लेकिन उचित कदम नही उठाए गए.

राणा कपूर ने जिस तरह यस बैंक की बैलेंस शीट को कमजोर किया, उसमें गड़बड़ी की और कई आवश्यक जानकारियां छिपाने की कोशिश की थी, उसे देखते हुए बहुत पहले उनकी विदाई हो जानी चाहिए, लेकिन मोदी सरकार सिर्फ आंखों पर पट्टी बांधकर बैठी रही.

रिजर्व बैंक ने भी राणा कपूर के मामले में ढुलमुल रवैया अपनाया. अगस्त, 2018 में कपूर को हटाए जाने के लिए 31 जनवरी, 2019 तक की समय सीमा तय करना रिजर्व बैंक के लचर प्रशासनिक फैसले का ही एक उदाहरण था. यहां तक कि आरबीआई की तरफ से यस बैंक को पिछले साल फरवरी में फंड डायवर्जन और प्रॉविजनिंग के मामले में क्लीन चिट तक दे दी गई. जब वित्त वर्ष 2018-19 में भी यसबैंक ने करीब 3,277 करोड़ रुपये के एनपीए को छिपा लिया, तब आरबीआई को होश आया और उसने अपने एक पूर्व डिप्टी गवर्नर आर. गांधी को बैंक के बोर्ड में भेजा लेकिन रिजर्व बैंक का धैर्य तब टूटा जब अक्टूबर-दिसंबर, 2019 के तिमाही नतीजे जारी करने में यस बैंक की ओर से देरी की जाने लगी. उसने 14 मार्च की तारीख दे दी लेकिन उसकी कोई तैयारी नही होती देख आरबीआई को निर्णायक फैसला लेना पड़ा.

जे. पी. मॉर्गन के एक अनुमान के मुताबिक बैंक का फंसा कर्ज 45,000 हजार करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है. बैंक का 36 फीसदी कैपिटल बैड लोन में फंसा हुआ है. अभी बैंक के लोन डूबने की आशंका ज्यादा है. यस बैंक का 10 बड़े कारोबारी समूहों से जुड़े लगभग 44 कंपनियों के पास कथित तौर पर 34,000 करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है. अनिल अंबानी समूह की नौ कंपनियों ने 12,800 करोड़ रुपये तथा एस्सेल ग्रुप ने 8,400 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है. इसके अलावा डीएचएफएल ग्रुप, इंडिया बुल्स, जेट एयरवेज, कॉक्स ऐंड किंग्स तथा भारत इन्फ्रा ने भी यस बैंक से अच्छा-खासी रकम लोन ले रखी है.

यह इधर कुआं और उधर खाई वाली स्थिति है. आरबीआई को भी अच्छी तरह से पता है कि यदि तीन जुलाई से पहले जमाकर्ताओं में यह भरोसा नहीं बैठाया गया कि यस बैंक में जमा उनकी रकम सुरक्षित है तो उसमें जमा करीब दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निकालने की होड़ मच जाएगी. और जिस तरह से मार्केट के हाल है यह होना अवश्यंभावी है. भारत की बैंकिंग प्रणाली इतिहास के सबसे बड़े संकट का सामना कर रही है.

Read Also –

यस बैंक का बचना मुश्किल लग रहा है
बिगड़ते आर्थिक हालात, FRDI बिल की धमक और खतरे में जमाकर्ताओं की जमा पूंजी
नए नोट छापने से रिजर्व बैंक का इन्कार यानी बड़े संकट में अर्थव्यवस्था
इक्कीसवीं सदी का राष्ट्रवाद कारपोरेट संपोषित राजनीति का आवरण
अनपढ़ शासक विशाल आबादी की नजर में संदिग्ध हो चुका है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Tags: आरबीआईयस बैंक
Previous Post

आर्थिक-राजनीतिक चिंतन बंजर है मोदी-शाह की

Next Post

गायत्री मंत्र की अश्लीलता एवं सच्चाई

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
Next Post

गायत्री मंत्र की अश्लीलता एवं सच्चाई

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारत में कोरोना वायरस आया कहांं से ?

April 18, 2020

न्यूनतम बैंलेंस : गरीब होने पर जुर्माना

November 28, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

June 10, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.