Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘स्तन क्लॉथ’ : अमानवीय लज्जाजनक प्रथा के खिलाफ आंदोलन

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 22, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

'स्तन क्लॉथ’ : अमानवीय लज्जाजनक प्रथा के खिलाफ आंदोलन

भारत की फिजा में अभिशाप की तरह मंडराता ब्राह्मणवाद को ठोस आधार प्रदान करने वाली मनुस्मृति कितना अमानवीय है, इसकी एक झलक दलित महिलाओं को अपने स्तन तक न ढ़ंकने देने का अधिकार में दिखता  था. स्तन ढ़ंकने का अधिकार भी काफी संघर्ष और शहादतों के बाद हासिल हुई है. स्तन ढ़ंकने का अधिकार 1952 ई. में भी बहुजन नेत्री वी. लक्ष्मीकुट्टी के नेतृत्व में ‘स्तन क्लॉथ’ आंदोलन चला जो 1956 ई. तक जारी रहा. ननगेली ने अपने अधिकारों के समर्थन में जो नींव रखी उसी को ज्योतिबाफुले-सावित्रीबाई फुले और बाबासाहेब ने विस्तार दिया, जिसके चलते दलित आज यहां तक पहुंच सका है.




दरअसल, वो 19वीं सदी के दौर में दौरान दक्षिण भारत में महिलाओं को अपने स्तन ढ़ंकने पर पाबंदी थी. इसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे कि किस तरह महिलाओं को इस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता होगा. इस प्रथा से बाहर निकलने के लिए स्त्रियों को काफी कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ा था.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

ननगेली तुम्हारा आभार … कि मैं आज अपने ब्रेस्ट ढांक सकती हूं. दलित इतिहास में नींव का पत्थर हो तुम और तुम्हारा विरोध ब्राह्मणों ने अपने जातीय विशेषाधिकार और लम्पटता के चलते अमानवीय और घृणित नियम-क़ानून बनाए हुए थे, जिनमें से एक अमानवीय व्यवस्था कि दलित महिलाएं अपने स्तन नहीं ढंक सकती थी.




पिछड़े वर्ग की महिलाओं पर यह बंदिश थी जिसमें दलित भी शामिल थे. अय्यंकल्ली ने यह आंदोलन चलाया था. पिछडे/दलित वर्ग की महिलाओं पर खास तौर पर यह निर्देश था कि वह ब्राह्मणों के सामने अपने स्तन खुला रखें. ऐसा नहीं करने पर उनके स्तन काट लिए जाते थे. स्तन ढंकना ऊंची कहे जाने वाली सवर्ण जातियों की महिलाओं का विशेषाधिकार था.

यदि कोई पिछड़ी/दलित स्त्री अपना स्तन ढंकना चाहे तो उसे उसे “स्तन-कर“ (ब्रेस्ट-टैक्स) जिसे मुलविकर्म कहा जाता था, चुकाना होता था. टैक्स कितना देना होगा, ये भी बाकायदा स्त्री के स्तनों के आकार औऱ प्रकार की जांच करके निर्धारित किया जाता था.




केरल के त्रावणकोर के चिरथेला में अपने पति के साथ रहने वाली ननगेली ने इस टैक्स का सार्वजनिक रूप से विरोध किया और कर-निरीक्षकों को टैक्स देने से मना कर दिया. 1803 ई. में जब टैक्स देने के लिए अधिकारियों द्वारा ननगेली को प्रताड़ित किया गया तो उसने अपने सम्मान और अस्मिता के लिए इस अमानवीय टैक्स का विरोध करते हुए दरांती से अपने दोनों ब्रेस्ट ख़ुद काटकर कलेक्टर के सामने प्रस्तुत किए. अपने आत्मसम्मान और जातीय प्रिविलेज के विरोध करते हुए ननगेली शहीद हो गईं. ननगेली के पति ने अपनी पत्नी के सम्मान, प्रेम और आत्मग्लानि में उसकी जलती चिता में कूदकर आत्महत्या कर ली.




ननगेली की मौत के बाद समाज में जैसे आंदोलन की चिंगारी भड़क गई. सभी नीची जाति के लोग इस अपमान का बदला लेने को उतावले हो गए और बगावत कर दिया. इसी का परिणाम हुआ कि दलित महिलाओं के लिए भी इस कानून को खत्म करने का ऐलान किया गया. ये वो समय था जब समाज में कई तरह के बदलाव हो रहे थे. जिसकी वजह से भी इस प्रथा का अंत होना संभव हो पाया. इस क्रूर-नृशंस प्रथा के अंत होने में अंग्रेजी हुकूमत की बहुत बड़ी भूमिका थी, ठीक उसी तरह जिस तरह सती-प्रथा के अंत होने में अंग्रेजी हुकूमत की अहम् भूमिका थी.

1947 ई. में आज़ादी मिलने के बाद भी त्रिशुर, तलापल्ली, अल्लपुझा आदि जिलों में यह अमानवीय प्रथा प्रचलित रही है. जिन लोगों ने ये घृणित प्रथा बनाये थे उन्होंने ही इन काल्पनिक देवी-देवताओं को बनाया है, और हम उस ब्राह्मण के पैर छुते हैं, जिनको जुते से मारना चाहिए. हम उसी मंदिर में जाकर घण्टा बजाते हैं, जिन पर हमें थूकना चाहिए.




Read Also –

फासीवाद विरोधी शक्तियों से आह्वान
आदिवासी संरक्षित क्षेत्र और ऑस्ट्रेलियाइतिहास से – दलाली और गुंडई ही है हिदुत्व के ठेकेदारों का पेशा
कांचा इलैय्या की किताबों से घबड़ाते क्यों हैं संघी-भाजपाई ?
महान टीपू सुल्तान और निष्कृट पेशवा



[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

केजरीवाल के खिलाफ आखिर कौन ?

Next Post

बिहार के 365 दिन में 22 हजार जघन्य आपराधिक मामले दर्ज

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

बिहार के 365 दिन में 22 हजार जघन्य आपराधिक मामले दर्ज

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

पर्यावरण

September 4, 2021

राम मंदिर से शुरू होकर वाया पुलवामा पाकिस्तान के बालकोट तक

March 1, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.